{"_id":"64e7528e9dc6a02acc04e283","slug":"mp-election-shivraj-government-cabinet-expansion-analysis-and-its-political-significance-bjp-strategy-news-2023-08-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"MP Election: चुनाव से डेढ़ माह पहले BJP क्यों उठाने जा रही जोखिम,चुनाव में भारी न पड़ जाए मंत्रियों को ये ओहदा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
MP Election: चुनाव से डेढ़ माह पहले BJP क्यों उठाने जा रही जोखिम,चुनाव में भारी न पड़ जाए मंत्रियों को ये ओहदा
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर उल्टी गिनती शुरू हो गई है। अक्टूबर के पहले या दूसरे सप्ताह में चुनावों की घोषणा हो सकती है। इससे पहले सत्ताधारी भाजपा असंतुष्ट नेताओं को मनाने के साथ साथ क्षेत्रीय और जातिगत संतुलन साधने में जुट गई है। चुनाव से महज डेढ़ माह पहले भाजपा राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार करने जा रही है। इसे लेकर सत्ता और संगठन में बैठकों का दौर जारी है। हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार कब होगा इसे लेकर अनिश्चितता है। इस समय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अलावा 30 मंत्री हैं। 35 मंत्रियों वाली मुख्यमंत्री की मंत्रिपरिषद में अभी चार पद खाली हैं। नए बने मंत्रियों को कामकाज के लिए सिर्फ डेढ़ माह का ही वक्त मिलेगा।भाजपा सूत्रों का कहना है कि हाल में जब केंद्रीय मंत्री अमित शाह का दौरा हुआ और उन्हें प्रदेश चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव ने ये फीडबैक दिया। इसके मुताबिक मंत्रिमंडल विस्तार न होने से कई बड़े नेता नाराज हैं। इसी के बाद ही मंत्रिमंडल विस्तार की कवायद शुरु हो गई है। सीएम हाउस में बुधवार देर रात हुई बैठक में रीवां विधायक राजेंद्र शुक्ला और बालाघाट विधायक गौरीशंकर बिसेन को मंत्रिमंडल में शामिल करने पर सहमति बन गई। बाकी के दो विधायकों के नाम पर राय नहीं बन सकी। मंत्रिमंडल में लोधी वर्ग के प्रतिनिधि को जगह दी जानी है। दलित—आदिवासी वर्ग से भी एक मंत्री बनाने पर मंथन चल रहा है। लेकिन ये कौन होंगे अभी इनके नाम तय नहीं हुए हैं। गुरुवार को भी सुबह भी केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बीच करीब आधा घंटा बैठक चली है। अगर नामों पर सहमति बनती है तो मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण की तारीख और समय तय हो जाएगा।
इसलिए पड़ी मंत्रिमंडल विस्तार की जरूरत
अमर उजाला से बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार ऋषि पांडेय कहते हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा अपनी कड़ियां मजबूत करने में लगी हुई है। इसलिए क्षेत्रीय-जातिगत समीकरणों को साधने के लिए पार्टी ने मंत्रिमंडल विस्तार करने जा रही है। राज्य में जब 2020 में बीजेपी की जो सरकार बनी, वह ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन से बनी है। सिंधिया के साथ आए लोगों को साधने के चक्कर में कैबिनेट में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन बिगड़ गया है। इसका नतीजा यह हुआ है कि कई क्षेत्रों को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिल गया। इसकी वजह से पार्टी में असंतोष बढ़ता जा रहा था। आखिरी विस्तार के जरिए पार्टी असंतोष को कम करने की कोशिश कर रही है। प्रदेश के विंध्य-बुंदेलखंड को मिलाकर करीब 56 सीटें हैं। इसके बावजूद दोनों इलाकों का प्रतिनिधित्व शिवराज कैबिनेट में न के बराबर है। पिछले चुनावों में भाजपा को मालवा-निमाड़ और ग्वालियर-चंबल संभाग में हार मिली थी। लेकिन विंध्य क्षेत्र से पार्टी को अच्छी सफलता मिली थी। बावजूद इसके सरकार में विंध्य क्षेत्र को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। सरकार में विंध्य क्षेत्र की उपेक्षा की वजह से क्षेत्र की जनता और स्थानीय बीजेपी नेता नाराज हैं। इसलिए पार्टी अब लोगों और स्थानीय नेताओं की नाराजगी दूर करने के लिए विंध्य क्षेत्र से राजेंद्र शुक्ला को मंत्री बनाकर ब्राह्मणों को साधने में जुटी है।
इसलिए नए मंत्रियों पर बढ़ेगा दबाव
पांडेय कहते है कि, प्रदेश में अक्टूबर के पहले हफ्ते में आचार संहिता लग सकती है इसलिए नए मंत्रियों को मंत्रालय संभालने और काम करने के लिए महज डेढ़ माह का ही समय मिलेगा। ऐसे में उन्हें अपने क्षेत्र के लोगों के कामों और उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए बहुत कम समय है। इन डेढ़ माह में मंत्रियों पर अपने पद के दायित्वों को पूरा करने का दबाव लगातार बना रहेगा। इस दौरान लोगों के काम नहीं हुए तो उन्हें चुनाव में इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है।
जातिगत-क्षेत्रीय समीकरणों के चलते इन विधायकों के नाम हैं चर्चा में
- विंध्य से पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ला नाम लगभग तय माना जा रहा है। शुक्ला चार बार रीवां सीट से विधायक हैं। वे पहले भी सरकार में मंत्री रह चुके हैं। विंध्य अंचल में बीजेपी का बड़ा चेहरा हैं। 2018 के चुनाव में भाजपा को विंध्य में बड़ी कामयाबी मिली थी। रीवा जिले की सभी 8 सीट पार्टी ने जीती थी।
- महाकौशल से गौरीशंकर बिसेन का नाम है। बिसेन छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय हैं और सात बार से पार्टी के विधायक हैं। भाजपा सरकारों में कई अहम मंत्रालय भी संभाल चुके हैं। इसके अलावा 1998, 2004 में लोकसभा के सदस्य चुने गए।
- बुंदेलखंड में ओबीसी मतदाताओं को अपने पाले में करने के लिए पार्टी लोधी समाज से एक विधायक को कैबिनेट में शामिल कर सकती है। इनमें विधायक राहुल लोधी के साथ पूर्व मंत्री जालम सिंह पटेल का नाम चर्चा में है। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के छोटे भाई नरसिंहपुर से तीन बार के विधायक जालम सिंह पटेल इससे पहले एक बार राज्यमंत्री रह चुके हैं। वहीं, पूर्व सीएम उमा भारती के भतीजे और टीकमगढ़ जिले की खरगापुर सीट से पहली बार के विधायक राहुल सिंह लोधी को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। राहुल को शामिल करके उमा भारती और उनके समर्थकों को साधा जा सकता है।
- ग्वालियर चंबल क्षेत्र में अनुसूचित जाति के वोटर को लुभाने के उद्देश्य से लाल सिंह या इमरती देवी में किसी एक को मंत्री बनाए जाने पर चर्चा हो रही है। यह दोनों नेता ही वर्तमान में विधायक नहीं हैं।
- आदिवासी जिले झाबुआ की सुलोचना रावत का नाम भी चल रहा है। सुलोचना रावत जब कांग्रेस से बीजेपी में आई थी तो मुख्यमंत्री ने उनको मंत्रिमंडल में शामिल करने का भरोसा दिया था।
जातीय समीकरण के हिसाब से भी देखें तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में सवर्णों के बीच संतुलन बनता नहीं दिखा। मंत्रिमंडल में ठाकुर वर्ग के लगभग दर्जन भर मंत्री हैं। वहीं, ब्राह्मण वर्ग से केवल तीन ही मंत्री हैं। इसके अलावा वैश्य, सिंधी, लोधी, जाटव, पंवार सहित कई जातियों का शिवराज सरकार में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।