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पहाड़ों को कंकरीट के जंगलों में बदलने की इजाजत नहीं दी जा सकती: एनजीटी 

Sat, 18 Nov 2017 04:07 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 18 Nov 2017 04:07 AM IST
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Mountains can not be allowed to be converted into cement forests says National Green Tribunal
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने हिमाचल प्रदेश में विकास के चलते लगातार हो रहे पर्यावरणीय विनाश पर चिंता और कड़ी नाराजगी जाहिर की है। पीठ ने कहा है कि पहाड़ों को सीमेंट के जंगल में तब्दील करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। लगातार बढ़ रही आबादी का बोझ और अंधाधुंध निर्माण न सिर्फ पर्यावरण को क्षति पहुंचा रहे हैं बल्कि एक बड़ी आपदा को भी दावत दे रहे हैं। सोच-समझ कर विकास होना चाहिए। 

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पढ़ें- एनजीटी ने दिल्ली-एनसीआर में निर्माण कार्यों पर लगी रोक हटाई
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इसलिए सरकार तीन महीनों के भीतर शिमला के लिए डेवलपमेंट प्लान तैयार करे। वहीं एनजीटी ने हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के भवन विस्तार को भी हरित क्षेत्र में निर्माण करने से रोक दिया है। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग ने जगह की कमी के चलते नई आधुनिक लाइब्रेरी, बच्चों के लिए सुविधा केंद्र, साक्षात्कार कक्ष, पार्किंग के लिए अतिरिक्त निर्माण की मांग की थी। 
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आवेदक की आपत्ति थी कि जहां निर्माण किया जाना है वह क्षेत्र हरित या जंगल क्षेत्र है। इसकी तस्वीरें भी ट्रिब्यूनल के समक्ष सबूत के तौर पर पेश की गईं थीं। पीठ ने याची की आपत्ति व अन्य तथ्यों को आधार बनाते हुए कहा कि ऐसी एक भी वजह नहीं है कि निर्माण की अनुमति दी जाए। यहां तक कि तमाम सरकारी कार्यालय हरित क्षेत्र या जंगलों को ही अपना ठिकाना बना रहे हैं। 

हिमाचल लोक सेवा आयोग दूसरी जगह करें निर्माण कार्य 

Mountains can not be allowed to be converted into cement forests says National Green Tribunal
NGT

ऐसे में इससे पर्यावरण और पारिस्थितिकी को काफी नुकसान है। इसलिए निर्माण की इजाजत नहीं दी जा सकती। हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग को किसी दूसरी जगह पर निर्माण कार्य करना चाहिए। पीठ ने कहा है कि राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकरण पूर्ण व विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर यह सुनिश्चित करें कि सूबे में कूड़ा-कचरा प्रबंधन और सीवेज शोधन की व्यवस्था मुकम्मल हो। 

इसके अलावा हरित क्षेत्रों या ऐसे प्रतिबंधित क्षेत्र जहां पुराने मकान मौजूद हैं उनके विस्तार या नए निर्माण के विषय में सुपरवाइजरी समिति के पास ही आवेदन करें। पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि किसी भी नदी, जलाशय में बिना शोधित सीवेज का प्रवाह किसी भी सूरत में नहीं जाना चाहिए। सीवेज सोधन संयंत्र व पाइपलाइन व्यवस्था को ठीक कर सीवेज का शोधन किया जाना चाहिए। पीठ ने इसके लिए भी तीन महीनों में कार्ययोजना तैयार करने का आदेश दिया है। 

पीठ ने कहा कि हरित क्षेत्र या जंगल किनारे जिनके घर या मकान व जमीन हैं यह उनकी भी जिम्मेदारी है कि उनके घर व आस-पास के पेड़-पौधे बचे रहें। पीठ ने राज्य सरकार, संबंधित विभागों और स्थानीय प्राधिकरणों को आदेश दिया है कि वे आपदा प्रबंधन के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करें। कार्ययोजना में पूर्व बचाव और राहत पर जोर दिया जाना चाहिए।

ताकि किसी भी तरह की अनहोनी और प्राकृतिक आपदा से कम से कम नुकसान प्राकृतिक संसाधनों, व्यक्तियों और संपत्तियों को हो। राहत और बचाव के संबंध में भी पूर्व तैयारी होनी चाहिए। 

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