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डाक विभाग ले आया 'आपका बैंक आपके द्वार', लॉकडाउन में 20 लाख लोगों ने किया ट्रांजैक्शन

Mon, 13 Apr 2020 07:50 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 13 Apr 2020 07:50 PM IST
सार

  • हर ट्रांजैक्शन पर बस 30 रुपए देकर निकालें दस हजार तक
  • देश के किसी  बैंक में खाता और आधार नंबर होना जरूरी
  • डिमॉनेटाइजेशन के समय थी इसे लाने की योजना
  • सैनिटाइज करके होता है डिवाइस का इस्तेमाल
  • डाक विभाग के पास कस्टमर का बैंक से जुड़ा कोई ब्यौरा नहीं आता

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more than 20 lakh people done the transaction through India post during lockdown in india
Postman - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

लॉकडाउन के दौरान देश के दूरदराज के लोगों का सहारा डाक विभाग बन गया। डाक विभाग नें गांव-गांव में बैंकिग की सुविधा उपलब्ध कराई और 23 मार्च से 3 अप्रैल तक के आंकड़े बताते हैं कि इसने लोगों के दरवाजे पर बैंक की सुविधा पहुंचाकर करीब 20 लाख लोगों को धनराशि का भुगतान कर दिया।
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डाक विभाग के निदेशक (एकाऊंट) डीके पांडे के अनुसार इसी लॉकडाउन के दौरान देश के लोगों को इसकी अहमियत भी समझ में आई। तमाम मध्यवर्ग के लोगों ने भी सुविधा का लाभ उठाया।

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बस पांच मिनट में लीजिए दस हजार रुपए

डीके पांडे का कहना है कि यह आधार एनेबल्ड पेमेंट सिस्टम है। इसके लिए केवल देश में  बैंक में खाता और आधार नंबर होना जरूरी है। पांडे के अनुसार लोगों को सहूलियत दी गई है कि वह अपने पोस्टमास्टर, डाकिया या हर जिले में के लिए दिए गए विशेष नंबर पर जानकारी दे दें।

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इसके बाद डाकिया खुद छोटी सी डिवाइस लेकर पहुंच जाता है। इस डिवाइस पर ट्रांजैक्शन चाहने वाले व्यक्ति का अंगूठा रखा जाता है और इसके बाद वह आधार नंबर के जरिए डिवाइस उसके बैंक खाता से कनेक्ट कर देता है। इस तरह से डाक विभाग तत्काल उस व्यक्ति को 30 रुपए तक की धनराशि लेकर 10 हजार रुपए तक उपलब्ध करा देता है।

डीमॉनेटाइजेशन के समय थी इसे लाने की योजना

डीके पांड बताते हैं कि यह योजना डीमॉनेटाइजेशन के समय लाने की थी, लेकिन तकनीकी तैयारियां पूरी न होने के कारण रुक गई थी। इसके बाद इसे दिसंबर 2019 में लाने का रास्ता साफ हुआ।

जनवरी 2020 में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आगे बढ़ाया गया, लेकिन लॉकडाउन के समय में लोगों को यह ज्यादा उपयोगी नजर आई। पांडे बताते हैं कि यह पूरी तरह से सुरक्षित है।

अधारकार्ड अथॉरिटी और उच्चतम न्यायालय की गाइडलाइन का पूरा पालन करती है। इतना ही नहीं, डाक विभाग के पास भी कस्टमर का बैंक आदि से जुड़ा कोई ब्यौरा नहीं आता। डिवाइस से हाथ हटाते ही, हमारा डेटा से कोई संपर्क नहीं रहता।

सैनिटाइज करके होता है डिवाइस का इस्तेमाल

निदेशक के अनुसार कोविड-19 का संक्रमण देखते हुए डाकिए को मास्क, ग्लव्स सब दिए गए हैं। डिवाइस को भी पूरी तरह सैनिटाइज करके दिया जाता है। हर इस्तेमाल के बाद यह सैनिटाइज की जाती है। डीके पांडे बताते हैं कि इसका इस्तेमाल पेंशन धारक, शारीरिक रूप से कमजोर लोग अधिक करते हैं।

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