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मानसून सत्र: खरगे की मनुस्मृति वाली टिप्पणी पर संसद में हंगामा, बयान का हिस्सा रिकॉर्ड से हटाया गया
Thu, 30 Jul 2026 03:39 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राहुल कुमार
Updated Thu, 30 Jul 2026 03:39 PM IST
सार
Parliament Monsoon Session: राज्यसभा में मानसून सत्र के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे की मनुस्मृति पर की गई टिप्पणी से इतना बड़ा विवाद क्यों बढ़ गया? सत्ता पक्ष ने उनके बयान पर माफी की मांग क्यों की, जेपी नड्डा ने किन आधारों पर इसे तथ्यात्मक रूप से गलत बताया और सभापति ने खरगे के बयान के एक हिस्से को सदन की कार्यवाही से हटाने का फैसला क्यों लिया? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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मल्लिकार्जुन खरगे
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
संसद के मानसून सत्र में गुरुवार को राज्यसभा में पेपर लीक बिल पर चर्चा चल रही है। इस दौरान विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थाओं पर आरएसएस का कब्जा कर लिया है। इस दौरान उन्होंने मनुस्मृति को लेकर भी बयान दिया, जिस पर सदन में हंगामा शुरू हो गया। सरकार की ओर से उनकी बयान को आशांति फैलाने वाला करारा दिया गया है।
राज्यसभा में कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कुछ वर्षों में 152 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं, लेकिन एक को भी सजा नहीं हुई। सरकार क्या कर रही थी, क्या एजेंसियां सो रही थीं? शिक्षा कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं है। शैक्षणिक संस्थाओं पर आरएसएस का कब्जा है। यूनिवर्सिटी में आरएसएस के लोग भरे जा रहे हैं। बजट में छह फीसदी भागीदारी शिक्षा बजट की होनी चाहिए, लेकिन तीन फीसदी से भी कम है।
उन्होंने तर्क दिया कि यदि सत्ता पक्ष इसी पुस्तक का हवाला दे रहा है तो इसकी जिम्मेदारी भी उसी की बनती है, क्योंकि वह पिछले 12 वर्षों से सत्ता में है। इस पर जेपी नड्डा ने फिर मूल और ब्रिटिश काल से पहले के संस्करण को पेश करने की मांग की और कहा कि ऐसे बयान समाज में अशांति फैलाते हैं। बाद में सभापति ने खरगे की मनुस्मृति संबंधी टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया।
फर्क इस बात से पड़ेगा कि आप यह परीक्षा कैसे आयोजित करते हैं और बिना पेपर लीक के तैयारी कैसे करते हैं, यह उस पर निर्भर करता है... ऐसा कड़ा कानून लाने की मांग हमने 2024 में ही की थी। लेकिन तब आपने हमारी बात नहीं मानी। और आपने अपने भाषण में कहा कि आप लोग सहमत नहीं थे। लेकिन हम बार-बार आपसे ऐसा कड़ा कानून बनाने के लिए कहते रहे। लेकिन आपने ऐसा नहीं किया। जो काम आप दो साल बाद कर रहे हैं, वह 2024 में ही क्यों नहीं किया?
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राज्यसभा में कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कुछ वर्षों में 152 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं, लेकिन एक को भी सजा नहीं हुई। सरकार क्या कर रही थी, क्या एजेंसियां सो रही थीं? शिक्षा कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं है। शैक्षणिक संस्थाओं पर आरएसएस का कब्जा है। यूनिवर्सिटी में आरएसएस के लोग भरे जा रहे हैं। बजट में छह फीसदी भागीदारी शिक्षा बजट की होनी चाहिए, लेकिन तीन फीसदी से भी कम है।
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खरगे के किस बयान के बाद शुरू हुआ हंगामा?
- खरगे ने कहा, विश्वविद्यालयों में अच्छे शिक्षक, अच्छे वीसी आएं, लेकिन आप जो सिलेबस बदल रहे हैं, उसमें ये भी आ रहा है, शूद्र के वेद पाठ सुनने पर शीशे और जस्ते से उसके कान भर दिए जाए। वेद मंत्र का उच्चारण करने पर उसकी जीभ काट ली जाए।
- ये आरएसएस सिलेबस है। ऐसे विचारों की निंदा करता हूं। ऐसी सामग्री को सिलेबस से हटाया जाए। यूपीए सरकार ने सबको समान शिक्षा के लिए शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया। खरगे इस बयान के बाद संसद में हंगामा शुरू हो गया।
- खरगे के बयान की निंदा करते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि विपक्ष के नेता ने जो कहा है, वह मेरी जानकारी में तथ्यों से परे है। अगर इस बात कोई तथ्य है तो वो प्रमाणित करें। वो मनुस्मृति के मूल पाठ को प्रमाणित करें। इसके बाद नड्डा ने कहा कि भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी को इस विषय पर अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए।
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मल्लिकार्जुन खरगे की प्रमुख मांगें क्या?
- देश की सभी परीक्षाओं के लिए हर साल एक निश्चित वार्षिक परीक्षा कैलेंडर बनाया जाए, ताकि छात्रों को अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।
- सरकार 'नेशनल यूथ एम्प्लॉयमेंट स्ट्रैटेजी' संसद में पेश करे, जिसमें युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजन की स्पष्ट योजना हो।
- सार्वजनिक क्षेत्र और सरकारी संस्थानों के सभी खाली पदों पर जल्द भर्ती की जाए।
- विशेष रूप से अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षित रिक्त पदों को भरा जाए।
- पेपर लीक मामलों की जांच सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त हाई पावर कमेटी से कराई जाए, ताकि जवाबदेही तय हो सके।
- लाठीचार्ज, महिलाओं को घसीटने और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई जैसे मामलों की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में कराई जाए।
- सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए केवल कड़े कानून नहीं, बल्कि परीक्षाओं का पारदर्शी और समयबद्ध संचालन सुनिश्चित करे।
- शिक्षा व्यवस्था में निष्पक्ष नियुक्तियां हों और विश्वविद्यालयों को वैचारिक प्रभाव से मुक्त रखा जाए।
- सरकार युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया और समय पर परीक्षा परिणाम सुनिश्चित करे।
- पेपर लीक रोकने के लिए संगठित नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई और जवाबदेही तय की जाए।
सुधांशु त्रिवेदी और कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी के बीच तीखी नोकझोंक
सुधांशु त्रिवेदी ने बोलना शुरू किया तो उन्होंने पूर्व कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायाधीश विलियम जोन्स और डॉ. भीमराव आंबेडकर की पुस्तक का हवाला देते हुए मूल ग्रंथ के प्रमाणीकरण की आवश्यकता बताई। इस दौरान कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने एक पुस्तक दिखाते हुए कहा कि यह मौजूदा सरकार के कार्यकाल में प्रकाशित हुई है, बाजार में उपलब्ध है और इस पर कोई प्रतिबंध नहीं है।उन्होंने तर्क दिया कि यदि सत्ता पक्ष इसी पुस्तक का हवाला दे रहा है तो इसकी जिम्मेदारी भी उसी की बनती है, क्योंकि वह पिछले 12 वर्षों से सत्ता में है। इस पर जेपी नड्डा ने फिर मूल और ब्रिटिश काल से पहले के संस्करण को पेश करने की मांग की और कहा कि ऐसे बयान समाज में अशांति फैलाते हैं। बाद में सभापति ने खरगे की मनुस्मृति संबंधी टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया।
खरगे ने लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर और क्या कहा?
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, पेपर लीक की वजह से कितने बेगुनाह लोगों को नुकसान हुआ, कितने लोगों की पिटाई हुई, कितने माता-पिता परेशान हुए, कितनी महिलाएं और बच्चे परेशान हुए। चर्चा के लिए आए 'पब्लिक एग्जामिनेशन अमेंडमेंट बिल 2026' में आपने सिर्फ आंकड़े बदले हैं। इस बिल में बस आंकड़े ही बदलते रहे। इससे कुछ नहीं होने वाला। आपने ज्यादा जुर्माना, कड़ी सजा, स्पेशल टास्क फोर्स, फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसे प्रावधान शामिल किए हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।फर्क इस बात से पड़ेगा कि आप यह परीक्षा कैसे आयोजित करते हैं और बिना पेपर लीक के तैयारी कैसे करते हैं, यह उस पर निर्भर करता है... ऐसा कड़ा कानून लाने की मांग हमने 2024 में ही की थी। लेकिन तब आपने हमारी बात नहीं मानी। और आपने अपने भाषण में कहा कि आप लोग सहमत नहीं थे। लेकिन हम बार-बार आपसे ऐसा कड़ा कानून बनाने के लिए कहते रहे। लेकिन आपने ऐसा नहीं किया। जो काम आप दो साल बाद कर रहे हैं, वह 2024 में ही क्यों नहीं किया?