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Hindi News ›   India News ›   Monsoon Session: Low Productivity, in Lok Sabha 52 and rajya sabha 55 percent, due to disruption uproar

Monsoon Session : संसद में काम कम-हंगामा ज्यादा.. लोकसभा में 52 तो राज्यसभा में 55 फीसदी समय व्यवधान से बर्बाद

Tue, 09 Aug 2022 07:31 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Tue, 09 Aug 2022 07:31 AM IST
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संसद का मानसून सत्र तय समय से चार दिन पहले ही सोमवार को खत्म हो गया। सत्र महंगाई पर विपक्ष के हंगामे, सदस्यों के निलंबन और राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति चुनाव के कारण जाना जाएगाा। हंगामे से दोनों सदनों की कार्य उत्पादकता 50 फीसदी से भी कम रही। 16 बैठकों के दौरान लोकसभा में सात तो राज्यसभा में चार विधेयक पारित किए गए। 

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सत्र के दौरान लोकसभा के चार तो राज्यसभा के 23 विपक्षी सांसदों को निलंबित किया गया। पूरे सत्र में कामकाज पर हंगामा भारी रहा। महंगाई, जीएसटी और जांच एजेंसियों की कार्रवाइयों समेत कई मुद्दों पर पर हंगामे के कारण राज्यसभा में 85 घंटे की जगह महज 38 घंटे की कार्यवाही चली। उच्च सदन में 45 फीसदी से भी कम कामकाज हो पाया। इसी प्रकार लोकसभा में 44 घंटे 29 मिनट ही कामकाज हो पाया। लोकसभा स्पीकर ने कहा कि इस बार सदन की उत्पादकता महज 48 फीसदी ही रही।
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शून्यकाल में उठाए गए 98 मामले
मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में शून्यकाल के दौरान 98 तो नियम 377 के तहत 318 मामले उठाए गए। इस दौरान संसद की स्थायी समितियों ने 41 रिपोर्टें पेश कीं। मंत्रियों की ओर से 47 वक्तव्य दिए गए। इस दौरान 46 प्रश्नों के मौखिक उत्तर दिए गए। सत्र में 91 निजी विधेयक पेश किए गए।
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लोकसभा में सात विधेयक तो राज्यसभा में चार पारित
लोकसभा में सात विधेयक पारित हुए, छह विधेयक पेश किए गए। राज्यसभा में चार विधेयक पारित किए गए। लोकसभा में भारतीय अंटार्कटिका, कुटुंब न्यायालय संशोधन, राष्ट्रीय डोपिंग रोधी, वन्य जीव संरक्षण संशोधन, केंद्रीय विश्वविद्यालय संशोधन, ऊर्जा संरक्षण संशोधन, नई दिल्ली मघ्यस्थता केंद्र संशोधन बिल पर मुहर लगी। जबकि राज्यसभा में भारतीय अंटार्कटिका, केंद्रीय विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय डोपिंग रोधी और कुटुंब न्यायालय संशोधन बिल पर मुहर लगी।

महंगाई पर वार और पलटवार
दोनों सदनों में महंगाई पर पांच घंटे से अधिक की चर्चा में सरकार और विपक्ष के बीच जमकर वार-पलटवार हुआ। इससे दोनों सदनों में एक भी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा नहीं हो पाई। खेलों को बढ़ावा देने के मुद्दे पर बीते सत्र की तरह इस सत्र में भी चर्चा अधूरी रही। वन्य जीव संरक्षण संशोधन बिल के इतर किसी दूसरे बिल पर सार्थक चर्चा नहीं हो पाई।

तय समय से चार दिन पहले समापन
संसद के मानसून सत्र का तय समय से चार दिन पहले ही सोमवार को समापन हो गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करते हुए कहा कि सदन 16 दिन चली और 7 विधेयक पारित हुए। वहीं, राज्यसभा में सभापति एम वेंकैया नायडू ने भी सदन को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करते हुए कहा कि सदन में हुए काम के बारे में सचिवालय बाद में विस्तृत जानकारी देगा।

खरगे को ईडी के समन पर राज्यसभा में कांग्रेस का हंगामा  
राज्यसभा में सोमवार को कांग्रेस ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की तरफ से राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को समन दिए जाने पर जमकर हंगामा किया। कांग्रेस सांसदों ने ईडी के समन को संसद तथा सांसदों का घोर अपमान बताते हुए कहा कि दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों तय करें कि ऐसा फिर कभी नहीं होगा। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष को ईडी ने ईमेल से समन भेजा कि वह नेशनल हेराल्ड बिल्डिंग में यंग इंडियन के दफ्तर में मौजूद रहें। खरगे ने कहा कि संसद का सत्र चल रहा है और नेता प्रतिपक्ष होने से पहले से कार्यक्रम तय हैं, ऐसे में उनका अधिकृत प्रतिनिधि मौजूद रहेगा। ब्यूरो

बैंकिंग में 80 फीसदी तक घटे जाली नोट : सरकार
बैंकिंग प्रणाली में नकली नोटों की कीमत में करीब 80 फीसदी की गिरावट आई है। 2016-17 में बैंकिंग प्रणाली में शामिल नकली नोटों की कीमत 43.47 करोड़ रुपये थी, जो 2021-22 में घटकर 8.26 करोड़ रुपये हो गई है। सोमवार को लोकसभा में नोटबंदी के नकली नोटों पर असर से जुड़े सवाल के जवाब में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक जाली नोट पड़ोसी देशों से तस्करी के जरिये भारत आते हैं। 2016-17 में नकली नोटों की अनुमानित संख्या करीब 7.62 लाख थी, जो 2020-21 में घटकर 2.08 लाख रह गई है।  चौधरी ने दावा किया कि नकली नोट घटने में नोटबंदी का अहम योगदान रहा है। उन्होंने बताया कि भारत और बांग्लादेश के बीच जाली नोटों की तस्करी रोकने के लिए एक साझा कार्यबल काम कर रहा है।

देश में कॉरपोरेट दिवाला के चल रहे 1,999 मामले
देशभर में कंपनियों के दिवालिया होने के 1,999 मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया चल रही है, जिसे इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत अंजाम दिया जा रहा है। सोमवार को लोकसभा में कॉरपोरेट कार्य राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कहा, कॉरपोरेट दिवाला निस्तारण प्रक्रिया (सीआईआरपी) पर लगने वाला समय व्यवसाय की प्रकृति, व्यावसायिक चक्र, बाजार धारणा और मार्केटिंग के प्रयास जैसे कारकों पर निर्भर करती है। मंत्री के मुताबिक, कोरोना महामारी के कारण संकटग्रस्त संपत्ति बाजार में मंदी रही है।

गति शक्ति विश्वविद्यालय बिल को संसद की मंजूरी, परिवहन में शोध को मिलेगा बढ़ावा
गति शक्ति विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गई। सोमवार को राज्यसभा ने यह विधेयक पारित कर दिया। लोकसभा यह विधेयक पहले ही पारित कर चुकी है। इससे पहले विधेयक पेश करते हुए रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, इसके जरिये राष्ट्रीय रेल और परिवहन विश्वविद्यालय को स्वायत्त केंद्रीय विश्वविद्यालय के तौर पर गति शक्ति विश्वविद्यालय में बदला जाएगा। वैष्णव ने कहा कि यह गति शक्ति विश्वविद्यालय को कॉरपोरेट निकाय बनाने की दिशा में कदम है। उन्होंने कहा, यह खासतौर पर परिवहन केंद्रित पाठ्यक्रम चलाएगा, जिनमें पुलों, सुरंगों, भौतिक विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नई ऊर्जा जैसे विषयों के अनुप्रयुक्त अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

भाजपा सांसद का दावा, आदिवासी लड़कियों से शादी कर जनसांख्यिकी बदल रहे घुसपैठिए
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोमवार को लोकसभा में बांग्लादेशी मुसलमानों की भारत में घुसपैठ का मुद्दा उठाकर दावा किया किया कि वे झारखंड में हजारों आदिवासी लड़कियों से शादी कर यहां की जनसांख्यिकी बदल रहे हैं। उन्होंने साहिबगंज जिला परिषद अध्यक्ष का उदाहरण दिया, जो आदिवासी कोटा से चुनी गई और मुस्लिम से शादी कर ली। दुबे ने कहा कि राज्य की हेमंत सोरेन सरकार झारखंड का इस्लामीकरण कर रही है, यहां अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए। नियम 377 में मामला उठाते हुए गोड्डा से सांसद दुबे ने प्रदेश में राष्ट्रीय जनसंख्या पंजीकरण करवाने के लिए भी कहा। उन्होंने बताया कि  पिछले 13-14 साल से घुसपैठ हो रही है। बोले, बांग्लादेशी मुसलमान भारत के हिंदू और मुसलमान, दोनों के हक की नौकरी व संसाधनों पर कब्जे कर रहे हैं।

पोंजी स्कीमों के खिलाफ सीबीआई ने 100, ईडी ने 87 केस दर्ज किए
सीबीआई ने पिछले साढ़े तीन साल में पोंजी स्कीमों के 100 केस दर्ज किए, इनमें 132 कंपनियां शामिल थीं। वहीं प्रवर्तन निदेशालय ने इनमें से 87 मामलों में काला धन सफेद करने के आरोपों की जांच शुरू की है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में सोमवार को यह जानकारी केंद्रीय एजेंसियों से मिली सूचनाओं के आधार पर दी।

 

पोंजी स्कीम में ठगने के लिए निवेशकों को बड़े मुनाफे का लालच दिया जाता है। शुरुआती निवेशकों को नये फंसाए गए निवेशकों का कुछ पैसा देकर विश्वसनीय हासिल की जाती है, बाद में बड़ी संख्या में आए निवेशक ठगे जाते हैं। पंकज चौधरी ने पांच सांसदों द्वारा पूछे सवालों के जवाब में बताया कि 2019 से जून 2022 तक इन मामलों में सीबीआई ने 21 और ईडी ने 8 आरोपी गिरफ्तार किए हैं।


दूसरी ओर गंभीर अपराध जांच कार्यालय (एसएफआईओ) को कॉरपोरेट मंत्रालय ने तीन साल में 9 केस सौंपे हैं, जिनमें 85 कंपनियां शामिल हैं। यह मामले चिट फंड घोटाले, मल्टी लेवल मार्केटिंग व अन्य पोंजी स्कीमों के हैं। वित्तीय घपलों को रोकने के लिए आरबीआई द्वारा बनाए सचेत पोर्टल पर भी पिछले दो साल में 1,540 शिकायतें दर्ज करवाई गई। ब्यूरो

प्रदूषण के डाटा की मनमानी व्याख्या कर रहे निजी संस्थान
प्रदूषण के आधार पर शहरों के सूचीकरण की कोई व्यवस्था नहीं है। निजी संस्थान सैटेलाइट डाटा की मनमानी व्याख्या कर इस तरह की सूचियां तैयार करते हैं, जिनकी जमीनी हकीकत से कोई वास्ता नहीं होता है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अश्विनी चौबे ने सोमवार को लोकसभा में बताया कि इस तरह की सूचियां का कोई वैधानिक अस्तित्व नहीं है। उन्होंने बताया कि इन सूचियों के आंकड़ों की पुष्टि के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण और जीवन प्रत्याशा में कोई रैखिक संबंध नहीं है, जैसा कि शिकागो यूनिवर्सिटी के इनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट (एपिक) ने एयर क्वालिटी लाइफ इडेक्स (एक्युएलआई) जारी कर दावा किया था। इसके साथ ही चौबे ने बताया कि सिर्फ वायु प्रदूषण की वजह से मौत होने के कोई प्रत्यक्ष वैज्ञानिक प्रमाण या आंकड़े भी मौजूद नहीं हैं।

बुनियादी ढांचे के मुद्रीकरण से 1.62 लाख करोड़ जुटाएंगे
आधारभूत संरचना मुद्रीकरण से केंद्र सरकार इस वर्ष 1.62 लाख करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। सोमवार को लोकसभा में वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि सरकार ने पिछले वर्ष नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन (एनएमपी) के जरिये 2025 तक ढांचागत संपत्तियों के मुद्रीकरण से 6 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। 2021-22 में इसके तहत 97,000 करोड़ रुपये जुटाए गए। हाईवे टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (टीओटी) आधारित पीपीपी रियायतें, एनएचएआई का इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट), पावरग्रिड इनविट, खनिज और कोयला ब्लॉकों की वार्षिक नीलामी, रेलवे कॉलोनियों के पुनर्विकास में निजी निवेश, पीपीपी मोड पर पट्टे पर दिए गए 6 हवाई अड्डों और पोर्ट टर्मिनलों के निजी निवेश पीपीपी मोड पर लगाई गई बोलियों से मौजूदा वित्त वर्ष में 1,62,422 करोड़ की पूंजी सरकार को मिलने की उम्मीद है।

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