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Hindi News ›   India News ›   Monsoon session in August How will parliament meetings take place in this time of Pandemic

अगस्त में शुरू होगा संसद का मानसून सत्र, कैसे होगा बैठकों का आयोजन?

Wed, 08 Jul 2020 07:42 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 08 Jul 2020 07:42 PM IST
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Monsoon session in August How will parliament meetings take place in this time of Pandemic
संसद - फोटो : एएनआई

केंद्र सरकार इस साल संसद का मानसून सत्र अगस्त के तीसरे या अंतिम सप्ताह में आयोजित करने की योजना बना रही है। यह सत्र करीब एक महीना चलेगा और संसदीय परंपरा के मुताबिर 23 सितंबर तक समाप्त होगा। इस दौरान सरकार दोनों सदनों में 11 अध्यादेश पारित कराने की योजना बना रही है। ये सभी अध्यादेश केंद्रीय कैबिनेट से मंजूर हो चुके हैं। 

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लेकिन, वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के इस दौर के बीच संसद के सत्र का आयोजन आसान काम नहीं होगा। पहले यह माना जा रहा था कि इस साल का मानसून सत्र 'हाइब्रिड' हो सकता है। इसमें आधी कार्रवाइयां भौतिक रूप से और आधी कार्रवाइयां वर्चुअल रूप से होने की संभावना जताई जा रही थी। 

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राज्यसभा में बैठने की व्यवस्था को लेकर नायडू ने की थी चर्चा

राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान उच्च सदन की कार्यवाही आयोजित करने के लिए विभिन्न विकल्पों को लेकर बीते दिनों अधिकारियों के साथ चर्चा की थी। इस दौरान कहा गया था कि सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते हुए मुख्य हॉल और दीर्घा में केवल 127 सदस्यों के बैठने की ही व्यवस्था हो सकती है ।

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इस दौरान सीमित तौर पर डिजिटल भागीदारी के विकल्प पर भी विचार किया गया। सूत्रों के अनुसार उचित दूरी बनाए रखने के नियमों का पालन करते हुए राज्यसभा के कक्ष और दीर्घा में 127 सदस्यों के ही बैठने की व्यवस्था हो सकती है। सूत्रों ने कहा कि मीडिया दीर्घा को छोड़कर सभी दीर्घा का इस्तेमाल होगा। मीडिया दीर्घा में भी सामाजिक दूरी का पालन करते हुए मीडियाकर्मियों के लिए बैठने की व्यवस्था होगी।


सूत्रों के अनुसार वेंकैया नायडू की इस चर्चा के दौरान यह राय सामने आई कि सदन के कक्ष और दीर्घा में 127 सदस्यों के लिए बैठने की व्यवस्था की जाए और बाकी सदस्यों के लिए केंद्रीय हॉल या बालयोगी सभागार से डिजिटल तरीके से शिरकत करने का प्रावधान रखा जाए। उन्होंने बताया कि एनआईसी पर बढ़े भार के मद्देनजर डिजिटल तरीके से सीमित भागीदारी पर विचार किया गया है।

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