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Monkeypox threat : मुंबई में कस्तूरबा अस्पताल के 28 बेड रिजर्व, मंकीपॉक्स के संदिग्ध मरीजों को रखेंगे
Mon, 23 May 2022 03:29 PM IST
सुरेंद्र जोशी
पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Mon, 23 May 2022 03:29 PM IST
सार
इस वार्ड में मंकीपॉक्स के संदिग्ध मरीजों को आइसोलेट कर रखा जाएगा। आज की तारीख में मुंबई में मंकीपॉक्स का कोई संक्रमित या संदिग्ध मरीज होने की खबर नहीं है।
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मंकीपॉक्स
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
दुनिया के कई देशों में मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों के बीच मुंबई नगर निगम ने इससे निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। महानगर के कस्तूरबा अस्पताल में 28 बिस्तरों का एक वार्ड आरक्षित कर दिया गया है।
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इस वार्ड में मंकीपॉक्स के संदिग्ध मरीजों को आइसोलेट कर रखा जाएगा। बृहन्मुंबई महानगर पालिका के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने कहा कि आज की तारीख में मुंबई में मंकीपॉक्स का कोई संक्रमित या संदिग्ध मरीज होने की खबर नहीं है।
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बीएमसी ने जारी की एडवायजरी
बीएमसी के लोक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने कहा कि इस बीमारी को लेकर एडवायजरी जारी की गई है। बीएमसी ने कहा है कि मंकीपॉक्स वन्य प्राणियों में पाई जाने वाली बीमारी है। यह आमतौर पर पश्चिम व मध्य अफ्रीका के जंगलों में पाई जाती है। कभी कभार ही यह अन्य क्षेत्रों में फैलती है।
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- जिन देशों में इस बीमारी का प्रकोप है या जहां इसके मरीज मिले हैं, वहां से आने वाले हवाई यात्रियों का एयरपोर्ट पर परीक्षण किया जा रहा है।
- संदिग्ध मरीजों को आइसोलट करने के लिए कस्तूरबा अस्पताल में 28 बिस्तरों का एक पृथक वार्ड बनाया गया है। संदिग्ध मरीजों के सैंपल पुणे स्थित राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान (NIV) को भेजे जाएंगे।
- मुंबई के सभी अस्पतालों व स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने यहां पाए जाने वाले किसी भी मंकीपॉक्स संक्रमित या संदिग्ध की सूचना तुरंत कस्तूरबा अस्पताल को दें।
- इस बीमारी से संक्रमित आमतौर पर बुखार, दाने और लिम्फ नोड्स में सूजन जैसी समस्या से ग्रस्त होता है। ये कई चिकित्सा समस्याएं पैदा करती है।
- यह आमतौर पर दो से चार सप्ताह तक चलने वाली सीमित बीमारी है।
- गंभीर मामलों में मृत्यु दर 1-10 फीसदी के बीच हो सकती है।
- यह बीमारी जानवरों से इंसानों के साथ-साथ इंसान से इंसान में भी फैल सकती है।
- मंकीपॉक्स वायरस कटी त्वचा, सांस, श्लेष्मा झिल्ली के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है।