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Monkeypox: 'स्टाफ के लिए पीपीई किट, संदिग्ध आइसोलेन में...' मंकीपॉक्स के लिए तय हुए इलाज का प्रोटोकॉल, पढ़ें

Wed, 21 Aug 2024 02:52 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Wed, 21 Aug 2024 02:52 PM IST
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सार
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक इस बीमारी में इलाज के प्रोटोकॉल का भी पूरा खाका तैयार किया जा चुका है। दिल्ली एम्स की ओर से जारी किए गए इलाज के प्रोटोकॉल के मुताबिक सबसे पहले संदिग्ध मरीज को आइसोलेशन एरिया में ले जाने की तैयारी की गई है। 
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Monkeypox Emergency Protocol Finalised suspected infected patients in Isolation Staff PEP Kit news and updates
मंकीपॉक्स के मामले - फोटो : freepik.com

विस्तार

विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से मंकी पॉक्स जैसी बीमारी के लिए घोषित की गई इमरजेंसी के बाद अब देश में इलाज का प्रोटोकॉल जारी कर दिया गया है। मरीज के स्पेशल वार्ड से लेकर सुरक्षित किए गए बेड और जांच के लिए तैयार की गई लैब को अलर्ट मोड पर रखा गया है। दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (एम्स) की ओर से मरीजों के इलाज संबंधित प्रोटोकॉल तैयार कर संबंधित विभागों को जारी कर दिया है। इसके तहत मंकीपॉक्स के संदिग्ध मरीज को सबसे पहले आइसोलेशन एरिया में रखने की तैयारी की गई है। उसके बाद गंभीरता देखते हुए आगे के चिकित्सकीय परीक्षण और इलाज की व्यवस्था की जाएगी।


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और पीएमओ की ओर से लगातार मंकीपॉक्स के इलाज और उसकी तैयारी को लेकर निगरानी की जा रही है। इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदारों की समन्वय करने के लिए अलग-अलग कमेटियों का गठन भी किया जा चुका है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक इस बीमारी में इलाज के प्रोटोकॉल का भी पूरा खाका तैयार किया जा चुका है। दिल्ली एम्स की ओर से जारी किए गए इलाज के प्रोटोकॉल के मुताबिक सबसे पहले संदिग्ध मरीज को आइसोलेशन एरिया में ले जाने की तैयारी की गई है। यहां पर संदिग्ध मरीज को देखा जाएगा। इस दौरान तैयारी ऐसी की गई है कि संदीप मरीज का अन्य मरीज और स्टाफ से संपर्क कम से कम हो। इसके अलावा मरीजों की देखरेख के लिए तय किया गया है कि स्टाफ को पीईपी किट भी पहनी होगी। ताकि अस्पताल के स्टाफ को संक्रमण से बचाया जा सके।


एम्स की ओर से जारी की गई गाइडलाइंस के मुताबिक सबसे पहले मरीज की स्क्रीनिंग की जाएगी। जिसमें मरीज के बुखार और रैशेज के साथ साथ उसकी पूरी हिस्ट्री की जानकारी इकट्ठा की जाएगी। इस दौरान अगर मरीज को सांस लेने में दिक्कत से लेकर सर दर्द, मांसपेशियों में दर्द और पीठ में दर्द के साथ लगातार बुखार बना है तो इमरजेंसी के लिए तैनात किए गए चिकित्सक के माध्यम से मंकीपॉक्स के परीक्षण के लिए सैंपल लेने की व्यवस्था की जाएगी। क्योंकि एम्स में पांच बेड मंकीपॉक्स के मरीजों के लिए अलग से तैयार किए गए हैं। जो मरीज की गंभीरता देखते हुए इमरजेंसी में तैनात मुख्य चिकित्सा अधिकारी की सलाह पर मरीज को भरती करने की राय देंगे। गाइडलाइन में तय किया गया है कि एम्स आने वाले मरीज को अस्थाई रूप से बनाए गए वार्ड में दाखिल करने के बाद सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किया जाएगा।

एम्स प्रशासन की ओर से अपने अस्पताल में इलाज के लिए जारी की गई एसओपी के मुताबिक अगर संदिग्ध मरीज में पुष्टि होती है तो इसकी जानकारी केंद्र सरकार की ओर से बनाए गए नोडल सेंटर पर भी दी जाएगी। इसके अलावा इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम के हेल्पलाइन नंबर 8745011784 पर भी जानकारी दी जाएगी। ताकि केंद्र सरकार की टीम इस मामले में मरीज के इलाके में जाकर ट्रैकिंग और ट्रेसिंग कर सकें। एम्स की ओर से तैयार किए गए इलाज की इस गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि मरीज की पूरी ट्रैवल हिस्ट्री और संपर्क में आए सभी लोगों पर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग नजर रखेगा। इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने संबंधित राज्यों को मुख्य सचिव के माध्यम से अवगत भी कर दिया गया है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक मरीज की ट्रैवल हिस्ट्री के साथ-साथ उनके संपर्क में आए लोगों को भी मॉनिटर किया जाएगा। इसके लिए इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम से संबंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश भी दिए जा चुके हैं। निर्देशों के मुताबिक जिन संदिग्ध मरीज और मरीजों के लिए अस्पताल में बेड सुरक्षित किए गए हैं वहां पर केंद्र सरकार की ओर से समुचित बंदोबस्त सुनिश्चित किए जाएं। इसमें संदिग्ध मरीजों की जांच से लेकर रिपोर्ट आने तक उनके दाखिल किए जाने और मॉनिटरिंग किया जाना है।
 
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