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Money Laundering Case: ED की मांग पर मलिक का जवाब, कहा- एजेंसी को नहीं है मेरे स्वास्थ्य की पुख्ता जानकारी
Tue, 27 Sep 2022 11:10 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Tue, 27 Sep 2022 11:10 PM IST
सार
62 साल के मलिक को फरवरी अंत में ईडी ने गिरफ्तार किया था। उन पर दाउद इब्राहिम की प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों को लेकर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया गया है। वह अभी न्यायिक हिरासत में जेल में है।
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नवाब मलिक
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
दाउद इब्राहिम की संपत्तियों की खरीद फरोख्त व मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार चल रहे एनसीपी नेता नवाब ने मंगलवार को कहा कि ईडी के पास उनके उनके स्वास्थ्य का आकलन करने के लिए कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। उनका ये जवाब ईडी द्वारा नवाब मलिक के स्वास्थ्य की पुष्टि के लिए एक मेडिकल बोर्ड के गठन की मांग करने वाली याचिका के बाद आया है।
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गौरतलब है कि वरिष्ठ राकंपा नेता नवाब मलिक मई से मुंबई के एक निजी अस्पताल में गुर्दे से संबंधित बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करा रहे हैं। दरअसल, बीते सप्ताह ईडी ने विशेष लोक अभियोजक सुनील गोंजाल्विस के माध्यम से विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष एक आवेदन दिया था। इसमें जांच एजेंसी ने नवाब मलिक के स्वास्थ्य की पुष्टि के लिए एक मेडिकल बोर्ड के गठन की मांग की गई थी।
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जिसके बाद मलिक ने अपने वकील के माध्यम से मंगलवार को ईडी की याचिका पर अपना लिखित जवाब दाखिल किया। इसमें उन्होंने कहा कि आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के बीच में ईडी की याचिका दुर्भावनापूर्ण और परोक्ष उद्देश्य से दायर की गई है।
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लिखित जवाब में उन्होंने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष के पास कोई विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध नहीं है कि आरोपी के स्वास्थ्य की स्थिति क्या है। ऐसे में उसकी मेडिकल बोर्ड के गठन की मांग खारिज किए जाने योग्य है। फिलहाल, अदालत ने चार अक्टूबर को अर्जी पर दलीलें सुनने के लिए सूचीबद्ध किया है।
फरवरी में हुए थे गिरफ्तार
62 साल के मलिक को फरवरी अंत में ईडी ने गिरफ्तार किया था। उन पर दाउद इब्राहिम की प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों को लेकर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया गया है। वह अभी न्यायिक हिरासत में जेल में है। ईडी की टीम ने 23 फरवरी की सुबह करीब सात बजे उनके घर पर छापेमारी की थी। इसके बाद ईडी उन्हें अपने साथ ले आई थी। करीब छह घंटे पूछताछ के बाद उनकी गिरफ्तारी हुई थी।
करोड़ों की जमीन कौड़ियों की खरीद मामले में हुई थी गिरफ्तारी
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मलिक की गिरफ्तारी के बाद पूरी कहानी का पर्दाफाश किया था। ईडी ने कोर्ट में बताया था कि, मंत्री नवाब मलिक ने कथित रूप से मुनिरा प्लंबर से 300 करोड़ रुपये का प्लाट कुछ लाख रुपये में एक कंपनी के जरिये हड़पा था। इस कंपनी का नाम सॉलिड्स इन्वेस्टमेंट प्रा.लि. है और कंपनी का मालिक मलिक परिवार है।
ईडी ने आरोप लगाया था कि मलिक यह कंपनी भगोड़े डॉन दाउद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर और डी गैंग के अन्य सदस्यों के सहयोग से चलाते रहे हैं। इस संबंध में मुनिरा प्लंबर ने ईडी को दिए बयान में बताया कि कुर्ला में गोवाला कंपाउंड में उनका 3 एकड़ का प्लॉट था। इस जमीन पर अवैध कब्जे को खाली कराने और विवादों को निपटाने के लिए सलीम पटेल ने उससे पांच लाख रुपये लिए थे, लेकिन उसने यह जमीन थर्ड पार्टी को बेच दी जबकि सलीम को कभी प्रापर्टी को बेचने के लिए नहीं कहा था। यही नहीं, 18 जुलाई 2003 को जमीन के मालिकाना हक ट्रांसफर करने से संबंधित कागज पर ही हस्ताक्षर नहीं किया था। उन्हें इस बात की भनक नहीं थी कि सलीम पटेल ने यह जमीन किसी दूसरे को बेच दी है।
वहीं, इस जमीन से जुड़े कागजातों को खंगालने के बाद ईडी को पता चला कि इसके पीछे सरदार शाहवली खान है जो 1993 के मुंबई बम धमाके का आरोपी है। वह टाडा और मकोका के तहत औरंगाबाद की जेल में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है। शाहवली खान ने ईडी को बताया था कि सलीम पटेल भगोड़े डॉन दाउद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर का करीबी था। हसीना के निर्देश पर ही सलीम ने मुनिरा की जमीन के बारे में सभी फैसले लिए थे।