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Mohan Bhagwat: 'देश बेहतर बनाना नागरिकों के अपने हित में'; भागवत बोले- RSS पूरे देश और हिंदू समाज के लिए काम..

Fri, 10 Oct 2025 10:46 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर। Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 10 Oct 2025 10:46 PM IST
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Mohan Bhagwat Making nation better in own interest of citizens RSS works for entire country and Hindu society
मोहन भागवत (फाइल) - फोटो : एएनआई

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अपने देश का निर्माण और सुधार करना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है और ऐसा करने से उनके अपने हितों की रक्षा होती है एक पुस्तक विमोचन समारोह में भागवत ने कहा कि अपने देश का निर्माण और उसे बेहतर बनाना हमारा कर्तव्य है। ऐसा कर हम अपने हितों की रक्षा करते हैं। जो देश अच्छा प्रदर्शन करता है, वह दुनियाभर में सुरक्षित और सम्मानित होता है। संघ के गठन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि डॉ. केशव हेडगेवार ने नागपुर में संगठन की स्थापना की क्योंकि इस शहर में पहले से ही निस्वार्थ सेवा और सामाजिक जागरूकता की भावना थी। हालांकि देशभर में ऐसे लोग हैं जो हिंदुत्व पर गर्व करते हैं और हिंदुओं के बीच एकता का आह्वान करते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि संघ जैसा संगठन केवल नागपुर में ही आकार ले सकता है। त्याग और सामाजिक प्रतिबद्धता की भावना यहां पहले से ही विद्यमान थी और इसने डॉ. हेडगेवार को संघ की स्थापना में मदद की।

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उन्होंने कहा कि संघ पूरे देश और हिंदू समाज के लिए काम करता है। नागपुर अपने स्वयंसेवकों के लिए विशेष स्थान रखता है, लेकिन वह किसी विशेष दर्जे का दावा नहीं करता। छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य (स्वशासन या स्वतंत्र राज्य) प्राप्त करने के लिए अपने प्रयास व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि ईश्वर, धर्म और राष्ट्र के लिए शुरू किए थे। उन्होंने कहा कि जब शिवाजी महाराज ने स्वराज्य की स्थापना की तो उन्होंने अपने मित्रों को अपने लिए नहीं, बल्कि एक बड़े उद्देश्य के लिए एकत्रित किया। उनकी एकता की भावना ने लोगों को शक्ति प्रदान की। जब तक उनके आदर्शों ने समाज को प्रेरित किया, उस काल का इतिहास प्रगति और विकास को प्रतिबिंबित करता रहा।

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भागवत ने कहा कि शिवाजी महाराज के दृष्टिकोण ने देशभर के शासकों और स्वतंत्रता सेनानियों को प्रभावित किया और यहां तक 1857 के विद्रोह को भी प्रेरित किया। अंग्रेजों ने व्यवस्थित रूप से उन प्रेरणादायक भारतीय प्रतीकों को नष्ट करने का प्रयास किया, जिन्होंने लोगों को एकजुट किया था और प्रतिरोध की भावना को मजबूत किया था। उन्होंने कहा कि हमें अपने अतीत से सीखने की जरूरत है कि कैसे लोगों ने समाज की भलाई के लिए निस्वार्थ भाव से संघर्ष किया। हमारे इतिहास में भारत को शांति और समृद्धि का देश बनाने की पर्याप्त शक्ति है, जो विश्व में योगदान दे सके।

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