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पर्यटन विकास पर पीएम मोदी बोले: हमारे गांव भी टूरिज्म का केंद्र बन रहे, बॉर्डर इलाकों का विकास हो रहा
Fri, 03 Mar 2023 11:18 AM IST
हिमांशु मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Fri, 03 Mar 2023 11:18 AM IST
सार
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज वो समय है, जब हमारे गांव भी टूरिज्म का केंद्र बन रहे हैं। बेहतर होते इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण अब दूर-सुदूर के गांव टूरिज्म मैप पर आ रहे हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को डेवलपिंग टूरिज्म विषय पर आयोजित पोस्ट बजट वेबिनार को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए सरकार की कई योजनाओ का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज वो समय है, जब हमारे गांव भी टूरिज्म का केंद्र बन रहे हैं। बेहतर होते इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण अब दूर-सुदूर के गांव टूरिज्म मैप पर आ रहे हैं। आगे उन्होंने कहा कि देश के बॉर्डर इलाकों का भी तेजी से विकास हो रहा है। बॉर्डर किनारे बसे गांवों में 'वाइब्रेंट बॉर्डर विलेज योजना' भी शुरू की है।
प्रधानमंत्री ने और क्या कहा?
वेबीनार को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने टूरिज्म को बढ़ावा देने पर फोकस किया। कहा, 'होम स्टे हों, छोटे होटल हों, छोटे रेस्टोरेंट हों ऐसे अनेक बिजनेस के लिए लोगों को ज्यादा से ज्यादा सपोर्ट करने का काम हमें करना है। बोले, जब यात्रियों के लिए सुविधाएं बढ़ती हैं, तो कैसे यात्रियों में आकर्षण बढ़ता है, उनकी संख्या में भारी वृद्धि होती है, ये भी हम देश में देख रहे हैं।
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उन्होंने कहा, भारत के विभिन्न स्थलों में अगर Civic Amenities बढ़ाई जाएं, वहां डिजिटल कनेक्टिविटी अच्छी हो, होटल-हॉस्पिटल अच्छे हों, गंदगी का नामो-निशान ना हो, बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर हो तो भारत के टूरिज्म सेक्टर में कई गुना वृद्धि हो सकती है।
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस सरकारों पर भी निशाना साधा। कहा कि, यात्राओं की इस पुरातन परंपरा के बावजूद दुर्भाग्य ये रहा कि इन स्थानों पर समय के अनुकूल सुविधाएं बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने आगे कहा, पहले सैकड़ों वर्षों की गुलामी और आजादी के बाद के दशकों में इन स्थानों की राजनीतिक उपेक्षा ने देश का बहुत नुकसान किया। अब आज का भारत इस स्थिति को बदल रहा है। जब संसाधन नहीं थे, तब भी कष्ट उठाकर लोग यात्राओं पर जाते थे। चारधाम यात्रा, द्वादश ज्योर्लिंग की यात्रा, 51 शक्तिपीठ की यात्रा, ऐसी कितनी ही यात्राएं हमारे आस्था के स्थलों को जोड़ती थीं। हमारे यहां होने वाली यात्राओं ने देश की एकता को मजबूत करने का भी काम किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, भारत के संदर्भ में देखें तो टूरिज्म का दायरा बहुत बड़ा है। सदियों से हमारे यहां यात्राएं होती रही हैं, ये हमारे सांस्कृतिक-सामाजिक जीवन का हिस्सा रहा है। भारत में हमें टूरिज्म सेक्टर को नई ऊंचाई देने के लिए Out of the Box सोचना होगा और Long Term Planning करके चलना होगा। जब भी कोई टूरिस्ट डेस्टिनेशन को विकसित करने की बात आती है तीन सवाल बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।
पहला- उस स्थान का Potential क्या है?
दूसरा- Ease of Travel के लिए वहां की Infrastructural Need क्या है, उसे कैसे पूरा करेंगे?
तीसरा - Promotion के लिए नया क्या करेंगे?
उन्होंने कहा, आज का 'नया भारत नए वर्क कल्चर' के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने बजट का भी जिक्र किया। कहा कि इस बार भी बजट की खूब वाह-वाही हुई है। देश के लोगों ने इसे पॉजिटिव तरीके से लिया है।
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प्रधानमंत्री ने और क्या कहा?
वेबीनार को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने टूरिज्म को बढ़ावा देने पर फोकस किया। कहा, 'होम स्टे हों, छोटे होटल हों, छोटे रेस्टोरेंट हों ऐसे अनेक बिजनेस के लिए लोगों को ज्यादा से ज्यादा सपोर्ट करने का काम हमें करना है। बोले, जब यात्रियों के लिए सुविधाएं बढ़ती हैं, तो कैसे यात्रियों में आकर्षण बढ़ता है, उनकी संख्या में भारी वृद्धि होती है, ये भी हम देश में देख रहे हैं।
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उन्होंने कहा, भारत के विभिन्न स्थलों में अगर Civic Amenities बढ़ाई जाएं, वहां डिजिटल कनेक्टिविटी अच्छी हो, होटल-हॉस्पिटल अच्छे हों, गंदगी का नामो-निशान ना हो, बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर हो तो भारत के टूरिज्म सेक्टर में कई गुना वृद्धि हो सकती है।
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस सरकारों पर भी निशाना साधा। कहा कि, यात्राओं की इस पुरातन परंपरा के बावजूद दुर्भाग्य ये रहा कि इन स्थानों पर समय के अनुकूल सुविधाएं बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने आगे कहा, पहले सैकड़ों वर्षों की गुलामी और आजादी के बाद के दशकों में इन स्थानों की राजनीतिक उपेक्षा ने देश का बहुत नुकसान किया। अब आज का भारत इस स्थिति को बदल रहा है। जब संसाधन नहीं थे, तब भी कष्ट उठाकर लोग यात्राओं पर जाते थे। चारधाम यात्रा, द्वादश ज्योर्लिंग की यात्रा, 51 शक्तिपीठ की यात्रा, ऐसी कितनी ही यात्राएं हमारे आस्था के स्थलों को जोड़ती थीं। हमारे यहां होने वाली यात्राओं ने देश की एकता को मजबूत करने का भी काम किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, भारत के संदर्भ में देखें तो टूरिज्म का दायरा बहुत बड़ा है। सदियों से हमारे यहां यात्राएं होती रही हैं, ये हमारे सांस्कृतिक-सामाजिक जीवन का हिस्सा रहा है। भारत में हमें टूरिज्म सेक्टर को नई ऊंचाई देने के लिए Out of the Box सोचना होगा और Long Term Planning करके चलना होगा। जब भी कोई टूरिस्ट डेस्टिनेशन को विकसित करने की बात आती है तीन सवाल बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।
पहला- उस स्थान का Potential क्या है?
दूसरा- Ease of Travel के लिए वहां की Infrastructural Need क्या है, उसे कैसे पूरा करेंगे?
तीसरा - Promotion के लिए नया क्या करेंगे?
उन्होंने कहा, आज का 'नया भारत नए वर्क कल्चर' के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने बजट का भी जिक्र किया। कहा कि इस बार भी बजट की खूब वाह-वाही हुई है। देश के लोगों ने इसे पॉजिटिव तरीके से लिया है।