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चीनी मीडिया ने बांधे तारीफ के पुल, कहा- भारत बिना एशिया की 21वीं सदी असंभव

Fri, 11 Oct 2019 08:34 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Fri, 11 Oct 2019 08:34 AM IST
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Modi Jinping can skip kashmir issue in their meeting, chinese media gave big statement on India
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी-चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शुक्रवार को दूसरी अनौपचारिक बैठक के लिए चेन्नई आ रहे हैं। उनके भारत दौरे से पहले चीनी मीडिया ने भारत के साथ दोस्ती को अहम बताया है। चीनी मीडिया का कहना है कि दोनों देश मिलकर ही 21वीं सदी को एशिया का बना सकते हैं। चीन के सरकारी अखबार का कहना है कि पिछले कुछ समय से एशिया की सदी की बात हो रही है।

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एशिया के कई नेता और रणनीतिकारों का कहना है कि 19वीं सदी यूरोप और 20वीं सदी अमेरिका की रही है। अब 21वीं सदी एशिया की होगी। चीन के अखबार ने भारतीय थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि यह चीन और भारत की आर्थिक प्रगति से ही संभव हो पाएगा।
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चीनी मीडिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की दूसरी अनौपचारिक बैठक को अहम बताते हुए कहा है कि इससे संबंध नए आयाम पर पहुंचेंगे। अखबार ने भारत के साथ आर्थिक सहयोग का जिक्र करते हुए कहा कि चीनी कंपनियों ने पिछले कुछ सालों में भारत के मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हुए निवेश में इजाफा किया है। वहीं भारतीय कंपनियों का भी चीन में निवेश बढ़ा है।

भारत-चीन के बिना एशिया का उदय असंभव

अखबार का कहना है कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद यदि शांतिपूर्ण ढंग से निपटा लिया जाए तो यह दुनिया के सामने एक मिसाल बन जाएगा। इससे दुनिया को संदेश मिलेगा कि कैसे दो ताकतें एक साथ आ सकती हैं। अखबार का कहना है कि यदि चीन और भारत के संबंध अच्छे नहीं रहते तो इससे एशिया का उदय असंभव है। अखबार ने लिखा, 'यदि दोनों देश द्विपक्षीय मुद्दों पर तार्किक ढंग से विचार नहीं करते हैं तो एशिया से बाहर की ताकतें इसका फायदा उठाएंगी।'

कश्मीर मुद्दे पर हो सकती है बात

मोदी और जिनपिंग की मुलाकात में कश्मीर मसले का जिक्र होगा या नहीं यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। दोनों देशों के कश्मीर को लेकर विचार अलग हैं। इस मुद्दे पर बैठक के दौरान चर्चा गतिरोध पैदा कर सकता है। दोनों पक्ष इस बात का फैसला करेंगे कि वह इस मुद्दे को छोड़ना चाहते हैं या इसपर नरमी से अपना पक्ष रखेंगे। हालांकि बैठक में व्यापार और निवेश जैसे मुद्दों पर चर्चा होना तय है। चीन भारत को अमेरिका के साथ चल रहे व्यापार युद्ध में अपने साथ लाना चाहता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी उत्पादों के टैरिफ को बढ़ा दिया है जिसका चीनी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है।

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