Disaster Management: चक्रवात से जानमाल के नुकसान में 98% की कमी; आपदा प्रबंधन के लिए ये कदम उठा रही सरकार
सूत्रों का कहना है कि पिछली यूपीए सरकारों के दौरान आपदा के बाद राहत प्रदान की जाती थी, लेकिन अब यह स्थिति बदल गई है। वर्तमान सरकार के दौरान आपदा से पहले ही तैयारियों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, ताकि कोई हताहत न हो।
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अरब सागर में उठा भयावह चक्रवात बिपरजॉय गुजरात में समुद्र तट से टकरा रहा रहा है। जिसके कारण भन सिर्फ गुजरात बल्कि कई अन्य राज्यों पर भी इसका गंभीर प्रभाव दिख रहा है। गुजरात के कई इलाकों में हो रही भीषण बारिश और तूफान के कारण जन-जीवन प्रभावित हुआ है। केंद्र सरकार ने भी इस बाबत कई जरूरी कदम उठाए हैं। इस बीच, सूत्रों ने दावा किया है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने देश में आपदा प्रबंधन के लिए एक समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया है। इसके परिणामस्वरूप भीषण चक्रवात के दौरान जान-माल के नुकसान में 98 प्रतिशत की कमी आई है।
ये भी कहा गया है कि पिछली यूपीए सरकारों के दौरान आपदा के बाद राहत प्रदान की जाती थी, लेकिन अब यह स्थिति बदल गई है। वर्तमान सरकार के दौरान आपदा से पहले ही तैयारियों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, ताकि कोई हताहत न हो।
प्राकृतिक आपदा से जान-माल का भारी नुकसान होता है, लेकिन मोदी सरकार चक्रवात, भूकंप और बाढ़ जैसी आपदाओं से प्रभावित लोगों के जीवन को सुरक्षित करने की पूरी कोशिश कर रही है। केंद्र सरकार किसी भी आपदा से प्रभावित सभी लोगों को सहायता और आवश्यकताएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सूत्रों ने यह भी बताया कि सरकार की यह प्रतिबद्धता प्राकृतिक आपदाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सरकार ने महामारी के दौरान भी ऐसा किया है। भारत ने प्रभावी योजना और उसको धरातल पर उतारकर युद्धग्रस्त क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों को निकालने में भी सफलता प्राप्त की है।
गृहमंत्रालय ने आपदा प्रबंधन को लेकर की है इन योजनाओं की घोषणा
आपदा प्रबंधन के लिए गृह मंत्रालय ने भी 8,000 करोड़ रुपये से अधिक की तीन प्रमुख योजनाओं का एलान किया है। इन योजनाओं में सभी राज्यों में अग्निशमन सेवाओं का आधुनिकीकरण, सात प्रमुख शहरों में बाढ़ न्यूनीकरण कार्यक्रम और 17 राज्यों में भूस्खलन की रोकथाम के उपाय शामिल है। इसके अलावा, फायर ब्रिगेड सेवाओं के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए सभी राज्यों को लगभग 5,000 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, अहमदाबाद, हैदराबाद और पुणे में बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए 2,500 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। सूत्रों ने कहा कि भूस्खलन से निपटने के लिए 17 राज्यों को 825 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।