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मोदी सरकार की दिव्यांगजनों को बड़ी सौगात, ट्रेनिंग के बाद आईटी सेक्टर में भी मिलेंगे मौके

Sun, 26 Aug 2018 10:16 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Updated Sun, 26 Aug 2018 10:16 PM IST
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Modi government's gift of Divyangjan, After the training, there will bein the IT sector

मोदी सरकार बड़े पैमाने पर दिव्यांगों को स्किल ट्रेनिंग देने की योजना बना रही है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 2022 तक 25 लाख दिव्यांगजनों को भौगोलिक परिस्थिति के मुताबिक ट्रेनिंग देने की योजना बनाई है, इसके लिए खास प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए गए हैं। सरकार इस योजना के तहत नए विकलांग पुनर्वास केन्द्रों की स्थापना भी करेगी और दिव्यांगों के लिए जॉब फेयर भी आयोजित करेगी।

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देश में 2 करोड़ 68 लाख दिव्यांग

सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय के तहत दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग में संयुक्त सचिव डॉली चक्रवर्ती के मुताबिक 2011 की जनगणना के हिसाब से देश में 2 करोड़ 68 लाख दिव्यांग हैं, जिनमें डेढ़ करोड़ पुरुष और 1 करोड़ 18 लाख महिलाएं हैं। सरकार की योजना है कि दिव्यांगजनों को भौगोलिक परिस्थितियों के मुताबिक मौके उपलब्ध कराए जाएं, ताकि लंबे वक्त तक अवसरों का फायदा उठा सकें। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य है कि कैसे दिव्यागों को प्रशिक्षण देकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करके सशक्त बनाया जाए। सरकार का लक्ष्य है कि साल 2022 तक 25 लाख दिव्यांगों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए।
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भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से ट्रेनिंग

विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक भौगोलिक परिस्थितियों के मुताबिक ट्रेनिंग देने से दिव्यांगों को ज्यादा समस्या भी नहीं होगी और उन्हें अपने इलाके में ही काम करने के अवसर मिल सकेंगे। इसके अलावा उनकी प्रोफेशनल ग्रोथ भी बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि जैसे उत्तर-पूर्व इलाका कृषि विविधता से भरपूर है और वहां इसकी काफी संभावनाएं हैं। विभाग की योजना है कि इस क्षेत्र के दिव्यांगों के लिए कृषि पद्धतियों पर कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इसका फायदा यह होगा कि इस इलाके के लोगों को कृषि पद्धतियों के नए मानकों की जानकारी मिल सकेगी और वे लंबे समय तक इसका लाभ उठा सकेंगे, साथ ही दूसरे लोगों को भी मदद कर सकेंगे।
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आईटी कंपनियों से मांगा सहयोग

इसके अलावा विभाग डेयरी फार्मिंग, मधुमक्खी पालन और बागवानी में भी ट्रेनिंग देने की योजना बना रहा है। साथ ही आईटी कंपनियों से भी सहयोग मांगा जा रहा है ताकि दिव्यांगों को आईटी इंडस्ट्री में भी कैरियर बनाने का मौका मिल सके। साथ ही, विभाग की योजना है कि कुटीर उद्योगों जैसे कॉटेज इंडस्ट्री, मोबाइल रिपेयरिंग, टेलरिंग, कैशियर और अकाउंटेंसी का प्रशिक्षण दिया जाए। विभाग का कहना है कि प्रशिक्षण कार्यक्रम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वे दिलचस्पी के साथ इसमें हिस्सेदारी करें।

नक्सल प्रभावित राज्यों में भी खुलेंगे केन्द्र

सरकार ने दिव्यांगों को प्रशिक्षण देने के लिए देश के सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में 310 जिले चिन्हित किए हैं, जहां 262 जिला विकलांगता पुनर्वास केन्द्र बनाए जाएंगे। साथ ही, सरकार नक्सल प्रभावित राज्यों जैसे छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उड़ीसा जैसे 10 राज्यों के 106 जिलों में जिला विकलांगता पुनर्वास केंद्र बनाने की योजना बना रही है। वहीं सरकार इन केन्द्रों में मेडिकल प्रोफेशनल्स, मेडिकल टेक्नीशियन और थेरेपिस्टों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी काम कर रही है।  


ब्रांड एंबेसडर करेगा प्रचार   

इसके अलावा सरकार की योजना है इस स्कीम का देशभर में प्रचार किया जाए, इसके लिए एक ब्रांड एंबेसडर भी नियुक्त करेगी। साथ ही उद्योग संगठनों फिक्की, एसोचैम, सीआईआई से भी सहयोग मांगा जाएगा। इसके अलावा दिव्यांगजनों के लिए देशभर में जॉबफेयर भी आयोजित किए जाएंगे। दिव्यांगजनों द्वारा निर्मित उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर प्रदर्शनियों का आयोजन किया जाए। विभाग इन प्रदर्शनियों का आयोजन अगले साल जनवरी से शुरू करेगा। साथ ही, विभाग दिव्यांगजनों के लिए राज्य स्तर पर कई प्रतियोगिताएं भी आयोजित करेगा।

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