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लोगों पर सरकारी विज्ञापनों के असर का पता लगाएगी मोदी सरकार, नियुक्त करेगी रिसर्च एजेंसी

Mon, 18 Jun 2018 01:27 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 18 Jun 2018 01:27 PM IST
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Modi Government planning to appoint research agency to investigate impact of advertisements

सरकारी विज्ञापनों का लोगों पर पड़ने वाला असर को जानने के लिए केंद्र सरकार सर्वे कराने की योजना बना रही है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय अपनी इस योजना पर किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी को नियुक्त करने की तैयारी कर रहा है। इससे विज्ञापनों में खर्च होने वाले धन के उचित इस्तेमाल की भी रणनीति बन सकेगी। 

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इसके साथ ही मोदी सरकार अध्ययन से यह भी जानना चाहती है कि केंद्र की कल्याणकारी योजनाएं जमीनी स्तर पर गांव के लोगों के लिए कितनी प्रभावशाली साबित हुई हैं और कितने लोगों को इसका फायदा पहुंचा है। और लोगों पर बेहतर प्रभाव के लिए किस सरकारी योजना का इस्तेमाल किस माध्यम में किया जाए। 
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मोदी सरकार के चार साल पूरे होने पर 'साफ नीयत, सही विकास' के नारे के साथ जनता के बीच उतरी भाजपा ने शहरी क्षेत्रों में खासी पकड़ बनाई है। लेकिन सरकार जानना चाहती है कि 'साफ नीयत, सही विकास' कैंपेन ग्रामीण इलाकों में कितना कारगर साबित हुआ है। साथ ही सरकार की चिंता यह भी है कि केन्द्र की कल्याणकारी योजनाएं प्रभावशाली ढंग से गांवों तक पहुंच पाई हैं या नहीं, साथ ही सरकार जानना चाहती हैं कि इन योजनाओं को लेकर ग्रामीण अंचलों में रहने वाले ग्रामवासियों की क्या प्रतिक्रियाएं हैं।
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'साफ नीयत, सही विकास' नारे के जरिए मोदी सरकार राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान, पीएम आवास योजना, गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन देने वाली उज्ज्वला योजना, ग्रामीण विद्युतीकरण योजना और मुद्रा स्कीम जैसी कई योजनाएं लागू करके लोगों को संदेश देना चाहती है कि सही विकास के लिए मोदी सरकार की नियत बिल्कुल सही है। साथ ही सरकार शहरों में वेबसाइट और होर्डिंग-बैनर के जरिए अपनी बात पहुंचा रही है।
  
पार्टी ने खुद 'संपर्क से समर्थन' अभियान के जरिए 4 हजार कार्यकर्ताओं, जिनमें केन्द्रीय मंत्रियों, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, उप-मुख्यमंत्रियों, सांसदों, विधायकों, जिला पंचायत सदस्य एवं वरिष्ठ संगठन पदाधिकारियों को समाज के एक लाख प्रतिष्ठित लोगों तक व्यक्तिगत पहुंचने की जिम्मेदारी सौंपी। जिसके तहत पार्टी कार्यकर्ता प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र की भाजपा-नीत सरकार की उपलब्धियों को घर-घर पहुंचा रहे हैं। 

इसके अलावा सरकार ने इस कैंपेन को पूरे देश में प्रचारित करने के लिए टीवी, रेडियो, अखबार, थिएटर जैसे मल्टी-मीडिया माध्यमों के अलावा बड़े-बड़े होर्डिंग्स और डिस्प्ले बोर्ड का भी इस्तेमाल कर रही है। पार्टी के इतने बड़े देशव्यापी कार्यक्रम आयोजित करने के बावजूद कहीं न कहीं सरकार को लग रहा है कि शहरी क्षेत्रों में तो प्रचार ठीक से पहुंच पा रहा है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में इसकी पहुंच को लेकर अभी भी संशय है।

अभियान से जमीनी हकीकत की मिलेगी जानकारी

सूत्रों के मुताबिक सरकार रिसर्च एजेंसी को हायर करके ग्रामीण इलाकों के अलावा देशभर में व्यापक सर्वेक्षण के जरिए इस अभियान का असर पता लगाने योजना बना रही है। हालांकि सरकार ने ‘साफ नीयत, सही विकास’ का जमीनी असर पता करने के लिए हालांकि अभी तक किसी एजेंसी को चयनित नहीं किया गया है, लेकिन इसके लिए सरकार ने एक प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसके जरिए कैंपेन की असली जमीनी हकीकत का पता चल सकेगा। 

चयनित एजेंसी इस अभियान के असर पता लगाने के लिए एक व्यापक सर्वेक्षण करेगी और पता लगाएगी कि सरकार का संदेश कितने प्रभावशाली ढंग से जनता में पहुंच रहा है। साथ ही एजेंसी को जिम्मेदारी दी जाएगी कि वह ग्रामीण इलाकों पर ज्यादा फोकस करे। सूत्रों का कहना है कि शहरों में तो सरकारी योजनाओं का असर दिखता है, लेकिन सुदूर इलाकों और गांवों में सरकारी योजनाओं का प्रभाव कैसा है, यह पता का जिम्मा एजेंसी को दिया जाएगा। 

सूत्रों के मुताबिक एजेंसी अपना काम जुलाई तक पूरा करेगी। इस दौरान एजेंसी जमीनी स्तर पर लोगों के इंटरव्यू भी लेगी और लोकेशन की जीपीएस रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इसके अलावा एजेंसी देश को छह रीजनल जोन में बांट कर वास्तविक जनसांख्यिकीय प्रतिनिधित्व पर फोकस करके कैंपेन की पहुंच और उसके प्रभावों की रिपोर्ट सरकार को भेजेगी।

रिपोर्ट में सरकारी योजनाओं के लाभान्वितों से बातचीत, योजनाओं से उनके जीवन में आए बदलावों और सरकार के प्रति लोगों के नजरिए को भी शामिल किया जाएगा। सर्वे के दौरान मिलने वाले फीडबैक और इनपुट सरकार के आगामी एक साल के शासनकाल के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

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