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OBC कोटे में 'सब कोटा' देने की तैयारी में केंद्र सरकार
amarujala.com- presented by: संदीप भट्ट
Updated Thu, 24 Aug 2017 09:27 AM IST
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केंद्र सरकार ओबीसी कोटे के अंदर कोटे की व्यवस्था करने की तैयारी में है। ओबीसी में उप श्रेणियां बनाने के लिए एक आयोग का गठन करने के लिए राष्ट्रपति के पास सिफारिश भेज दी गई है। आयोग अपने गठन के बाद 12 हफ्तों में सरकार को रिपोर्ट सौंपेगा।
सरकार की मंशा बिहार, झारखंड सहित 11 राज्यों की तर्ज पर पिछड़ी जातियों और अति पिछड़ी जातियों की उप श्रेणियां बनाने की हैं। इसके बाद केंद्र सरकार की नौकरियों में भी आरक्षण का लाभ उठाने से वंचित कुछ जातियों को सीधा लाभ होगा। बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक के बाद वित्त मंत्री ने ओबीसी आरक्षण के लिए क्रीमी लेयर की सीमा को छह लाख से बढ़ा कर आठ लाख करने का फैसला लिया लिए जाने की जानकारी दी।
पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का फैसला कर चुकी मोदी सरकार ने अब ओबीसी कोर्ट के अंदर कोटे की व्यवस्था कर पिछड़ी जातियों में शुमार उन जातियों को राहत देने की तैयारी की है, जिन्हें आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है।
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गौरतलब है कि बीती सदी के नब्बे के दशक में मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू होने के बाद से ही ओबीसी आरक्षण व्यवस्था की सिफारिश की मांग उठती रही है। जेटली ने बताया कि यूपीए शासनकाल के दौरान वर्ष 2011 में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने ओबीसी में उपश्रेणियां बनाने की सिफारिश की थी। उसके बाद वर्ष 2012-13 में संसद की स्थाई समिति ने भी इसी आशय की सिफारिश की थी।
अब मंत्रिमंडल ने सिफारिशों के अनुरूप नई व्यवस्था के लिए आयोग गठित करने का फैसला किया है। यूपीए सरकार के दौरान वर्ष 2013 में इसकी समीक्षा की गई थी मगर कोई फैसला नहीं लिया गया था।
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सरकार की मंशा बिहार, झारखंड सहित 11 राज्यों की तर्ज पर पिछड़ी जातियों और अति पिछड़ी जातियों की उप श्रेणियां बनाने की हैं। इसके बाद केंद्र सरकार की नौकरियों में भी आरक्षण का लाभ उठाने से वंचित कुछ जातियों को सीधा लाभ होगा। बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक के बाद वित्त मंत्री ने ओबीसी आरक्षण के लिए क्रीमी लेयर की सीमा को छह लाख से बढ़ा कर आठ लाख करने का फैसला लिया लिए जाने की जानकारी दी।
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पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का फैसला कर चुकी मोदी सरकार ने अब ओबीसी कोर्ट के अंदर कोटे की व्यवस्था कर पिछड़ी जातियों में शुमार उन जातियों को राहत देने की तैयारी की है, जिन्हें आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है।
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गौरतलब है कि बीती सदी के नब्बे के दशक में मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू होने के बाद से ही ओबीसी आरक्षण व्यवस्था की सिफारिश की मांग उठती रही है। जेटली ने बताया कि यूपीए शासनकाल के दौरान वर्ष 2011 में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने ओबीसी में उपश्रेणियां बनाने की सिफारिश की थी। उसके बाद वर्ष 2012-13 में संसद की स्थाई समिति ने भी इसी आशय की सिफारिश की थी।
अब मंत्रिमंडल ने सिफारिशों के अनुरूप नई व्यवस्था के लिए आयोग गठित करने का फैसला किया है। यूपीए सरकार के दौरान वर्ष 2013 में इसकी समीक्षा की गई थी मगर कोई फैसला नहीं लिया गया था।
बिहार ने 70 के दशक में की थी पहल
ओबीसी में उपश्रेणियां बनाने की पहल बीती सदी के 70 के दशक में कर्पूरी ठाकुर सरकार ने की थी। उस दौरान ओबीसी कोटे में कोटा देने के लिए अनुसूची एक और अनुसूची दो की व्यवस्था की गई थी। इसके तहत ओबीसी को पिछड़ी जाति और अत्यंत पिछड़ी जाति (ईबीसी) के रूप में बांटा गया।
ईबीसी में उन जातियों को शामिल किया गया जो ओबीसी में शामिल दूसरी जातियों के तुलना में बेहद पिछड़े थे। बाद में झारखंड, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, आंधप्रदेश प्रदेश, तेलंगाना सहित 11 राज्यों ने अपने यहां ऐसी ही व्यवस्था लागू की। ऐसी व्यवस्था लागू करने वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश नहीं है।
सरकार-भाजपा का दोहरा सियासी दांव
क्रीमी लेयर की सीमा बढ़ाने के अलावा उपश्रेणियां बनाने के लिए आयोग गठन के फैसले को मोदी सरकार को दोहरा सियासी दांव माना जा रहा है। दरअसल मिशन 2019 के लिए भाजपा और मोदी सरकार की पहले से ही पिछड़ी जातियों में पैठ बढ़ाने पर नजर है।
इसी क्रम में सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का फैसला करने के बाद इसका जम कर प्रचार प्रसार किया। क्रीमी लेयर की सीमा बढ़ा कर इसी वर्ग को साधने की दिशा में एक और पहल की। मगर उपश्रेणियां बना कर मास्टर स्ट्रोक लगाया।
सरकार और पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि इस दांव से ओबीसी में आरक्षण का पूरा लाभ लेने से वंचित जातियां पार्टी के पक्ष में खड़ी होगी। क्योंकि इसमें शामिल ज्यादातर जातियां एक दो जातिविशेष पर आरक्षण का लाभ हजम करने का दशकों से आरोप लगाती रही है।
ईबीसी में उन जातियों को शामिल किया गया जो ओबीसी में शामिल दूसरी जातियों के तुलना में बेहद पिछड़े थे। बाद में झारखंड, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, आंधप्रदेश प्रदेश, तेलंगाना सहित 11 राज्यों ने अपने यहां ऐसी ही व्यवस्था लागू की। ऐसी व्यवस्था लागू करने वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश नहीं है।
सरकार-भाजपा का दोहरा सियासी दांव
क्रीमी लेयर की सीमा बढ़ाने के अलावा उपश्रेणियां बनाने के लिए आयोग गठन के फैसले को मोदी सरकार को दोहरा सियासी दांव माना जा रहा है। दरअसल मिशन 2019 के लिए भाजपा और मोदी सरकार की पहले से ही पिछड़ी जातियों में पैठ बढ़ाने पर नजर है।
इसी क्रम में सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का फैसला करने के बाद इसका जम कर प्रचार प्रसार किया। क्रीमी लेयर की सीमा बढ़ा कर इसी वर्ग को साधने की दिशा में एक और पहल की। मगर उपश्रेणियां बना कर मास्टर स्ट्रोक लगाया।
सरकार और पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि इस दांव से ओबीसी में आरक्षण का पूरा लाभ लेने से वंचित जातियां पार्टी के पक्ष में खड़ी होगी। क्योंकि इसमें शामिल ज्यादातर जातियां एक दो जातिविशेष पर आरक्षण का लाभ हजम करने का दशकों से आरोप लगाती रही है।