टीम मोदी में 36 नए चेहरे: सात पुराने चेहरों को मिली तरक्की तो चार दिग्गजों समेत 12 की हुई छुट्टी
- पिछड़ा वर्ग, दलितों, जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधियों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व जहां बढ़ाया है, वहीं उत्तर प्रदेश को खासा तवज्जो दी है
- सात महिलाओं को इस मंत्रिपरिषद विस्तार में जगह दी गई है, इसके बाद अब केंद्रीय मंत्रिपरिषद में महिला मंत्रियों की कुल संख्या 11 हो गई है
- दूसरे कार्यकाल के विस्तार में 43 मंत्रियों ने ली शपथ, विस्तार के जरिए मिशन 2022 का फूंका बिगुल
- चुनावी राज्यों, क्षेत्रीय संतुलन और विस्तार की संभावना वाले राज्यों का रखा ध्यान
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विस्तार
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में बुधवार को पहला मंत्रिमंडल विस्तार किया गया। इसके बाद अब टीम मोदी 36 नए चेहरों से लैस हो गई है। विस्तार में जहां सात पुराने मंत्रियों को बेहतर कार्य का पुरस्कार मिला है, वहीं मापदंडों पर खरा न उतरने वाले चार दिग्गजों समेत 12 मंत्रियों को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी है। विस्तार के जरिए पीएम नरेंद्र मोदी ने चुनावी राज्यों को साधने, संभावना वाले राज्यों में प्रभाव बढ़ाने, क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने के अलावा नेतृत्व की नई पीढ़ी तैयार करने की दिशा में सियासी कसरत की है।
राष्ट्रपति भवन में बुधवार को आयोजित समारोह में मंत्रिमंडल विस्तार के तहत 43 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। इनमें 15 कैबिनेट और 28 राज्य मंत्री शामिल हैं। स्वतंत्र प्रभार वाले तीन मंत्रियों और चार राज्य मंत्रियों को अब कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। मंत्रिमंडल में पहली बार त्रिपुरा को प्रतिनिधित्व दिया गया है, जबकि सात महिलाएं टीम मोदी में अपनी जगह बनाने में कामयाब हुई हैं।
चुनावी राज्यों का रखा खास ख्याल
विस्तार के दौरान नए चेहरों और पदोन्नति के मामले में चुनावी राज्यों का विशेष ख्याल रखा गया है। जिन 36 नए चेहरों को टीम मोदी में जगह मिली है, उनमें से करीब 40 फीसदी यानी 15 मंत्री चुनावी राज्यों से हैं। इसके अलावा पदोन्नति में भी करीब साठ फीसदी हिस्सेदारी चुनावी राज्यों को दी गई है। विस्तार में सात मंत्रियों को तरक्की मिली है, जिनमें चार चुनावी राज्यों से हैं। गौरतलब है कि अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा, पंजाब, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं।
पूर्वोत्तर के मजबूत किले का ध्यान
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दशकों तक पूर्वोत्तर में प्रभाव जमाने के लिए संघर्ष करता रहा है। वर्तमान में पूर्वोत्तर के राज्यों में भाजपा की पकड़ मजबूत हुई है। भविष्य में किसी तरह की ढिलाई न हो, इसके मद्देनजर विस्तार में पूर्वोत्तर के राज्यों को खास अहमियत दी गई है। पूर्वोत्तर से जुड़े स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री किरेन रिजिजू को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है, जबकि असम के पूर्व सीएम सर्बानंद सोनोवाल को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। त्रिपुरा की प्रतिमा भौमिक के जरिए पहली बार इस राज्य को केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दिया गया है, जबकि मणिपुर से राजकुमार रंजन सिंह को जगह मिली है। यह पहला अवसर है, जब पूर्वोत्तर के राज्यों से एक ही समय में चार-चार मंत्रियों को केंद्र सरकार में प्रतिनिधित्व का अवसर मिला है।
पश्चिम बंगाल पर मजबूत संदेश
विस्तार के जरिए मोदी सरकार ने पश्चिम बंगाल में लंबी लड़ाई लड़ने का संदेश दिया है। विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन न करने के कारण दो मंत्रियों बाबुल सुप्रियो और देबश्री चौधरी को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया है। इसके बदले में पश्चिम बंगाल से चार मंत्री बनाए गए हैं। नए मंत्रियों में शांतनु ठाकुर मतुआ तो निशिथ प्रमाणिक राजवंशी बिरादरी से हैं। दो मंत्री हटाकर और चार नए मंत्री बनाकर भाजपा और मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि राज्य में वह मजबूती से राजनीतिक लड़ाई लड़ेगी।
क्षेत्रीय संतुलन, असंतोष और विस्तार की संभावना का ध्यान
विस्तार के जरिए क्षेत्रीय संतुलन साधने के साथ ही असंतोष वाले राज्यों का भी ध्यान रखा गया है। मसलन असंतोष से जूझ रहे कर्नाटक से तीन, त्रिपुरा से एक मंत्री बनाया गया है। विस्तार की संभावना वाले राज्यों में शामिल तमिलनाडु को भी टीम मोदी में प्रतिनिधित्व दिया गया है, जबकि ओडिशा से दो मंत्रियों को जगह मिली है। पंजाब से जुड़े हरदीप पुरी और तेलंगाना के जी. किशन रेड्डी को पदोन्नत कर कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।
नहीं बढ़ी सहयोगियों की संख्या
पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि विस्तार में सहयोगियों का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। जब सरकार का गठन हुआ था, तब सहयोगी दल के तौर पर शिवसेना, अकाली दल, लोजपा और आरपीआई को प्रतिनिधित्व मिला था। बाद में शिवसेना और अकाली दल ने राजग से नाता तोड़ लिया। विस्तार के बाद अब जदयू और अपना दल को प्रतिनिधित्व मिला है, जबकि लोजपा कोटे से रामविलास पासवान की जगह पशुपति पारस मंत्री बने हैं। इस प्रकार अब भी सरकार में सहयोगी दलों की संख्या पहले की तरह चार ही है।
काम करने वालों को ही जगह
विस्तार के जरिए पीएम ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि उनकी टीम में काम करने वालों की ही जगह पक्की है। इस आशय का सख्त संदेश देने के लिए छह कैबिनेट मंत्रियों, एक स्वतंत्र प्रभार और पांच राज्य मंत्रियों की छुट्टी की। जिन मंत्रियों की छुट्टी हुई है, उनमें रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर, डीवी सदानंद गौड़ा, डॉ. हर्षवर्धन, रमेश पोखरियाल निशंक और संतोष गंगवार अब तक सरकार के कद्दावर चेहरे थे।
डॉ. वीरेंद्र कुमार होंगे नया दलित चेहरा
विस्तार के जरिए सरकार ने दलित चेहरे का विकल्प भी ढूंढ लिया है। रामविलास पासवान के निधन के बाद दलित चेहरे का चयन यक्ष प्रश्न था। हालांकि मध्यप्रदेश से डॉ वीरेंद्र कुमार को कैबिनेट मंत्री बनाकर सरकार ने इसका जवाब दे दिया है। लगातार सात लोकसभा चुनाव जीतने वाले डॉ. कुमार मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में राज्य मंत्री थे। रामविलास की जगह गठबंधन के दलित चेहरे के रूप में पीएम ने उनके भाई पशुपति पारस पर भरोसा जताया है।
कुछ सवालों का जवाब मिलना बाकी
गहलोत की विदाई के बाद कुछ सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं। मसलन गहलोत राज्यसभा में सदन के नेता थे। इसके अलावा गहलोत भाजपा की सबसे ताकतवर इकाई संसदीय बोर्ड के भी सदस्य थे। अब निगाह इस पर टिकी है कि इन दोनों पदों के लिए भाजपा और मोदी किस चेहरे को आगे करेंगे।