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Modi@75: संसद पहुंचे तो किया प्रणाम..बच्चों के लिए तोड़ा प्रोटोकॉल, राजनीतिक संस्कृति का नया पाठ पढ़ा रहे पीएम

Wed, 17 Sep 2025 06:11 AM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Wed, 17 Sep 2025 06:11 AM IST
सार

राजनीतिक संस्कृति का नया दौर जिसमें विनम्रता सबसे पहले है उसे पीएम मोदी सार्वजनिक जीवन में नरम और संवेदनशील भाषा के साथ मुख्यधारा में लेकर आए हैं। जहां मंत्री अब जवानों के साथ खाना खाते हैं, सांसद स्कूली बच्चों के साथ तस्वीरें साझा करते हैं और अधिकारी फ्रंटलाइन कर्मचारियों को सुर्खियों में लेकर आते हैं। जब शीर्ष पर सहजता का उदाहरण सामने आता है, तो नेता और नागरिक के बीच की दूरी कम लगने लगती है।

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Modi@75: PM Modi is teaching a new lesson of political culture, in which humility is the first
पीएम मोदी - फोटो : एक्स/नरेंद्र मोदी
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विस्तार

नीतियों और भाषणों से इतर, पीएम मोदी की स्वाभाविक संवेदना और विनम्र व्यवहार में यह बखूबी झलकता है, जो उनके उच्च पद को मानवीय स्पर्श देता है। वे संसद की सीढ़ियों पर झुककर लोकतंत्र के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं। किसी बच्चे से हाथ मिलाने के लिए सुरक्षा घेरे को पार कर जाते हैं। ऐसे पल भारत की राजनीतिक संस्कृति को नए युग की ओर ले गए हैं, जहां आपसी जुड़ाव, दया और सम्मान की उतनी ही अहमियत है, जितनी आंकड़ों की। पीएम मोदी का नेतृत्व अक्सर छोटे, अनियोजित क्षणों में सर्वाधिक जीवंत दिखाई देता है।

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पीएम मोदी के ये पल सिर्फ किसी एक दिन लोगों के दिलों को गर्मजोशी से भरने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि इन घटनाओं ने नेताओं के व्यवहार के स्तर को नई ऊंचाई दी। मोदी के ये संकेत अब सार्वजनिक जीवन में नरम और संवेदनशील भाषा को मुख्यधारा में लेकर आए हैं, जहां मंत्री अब जवानों के साथ खाना खाते हैं, सांसद स्कूली बच्चों के साथ तस्वीरें साझा करते हैं और अधिकारी फ्रंटलाइन कर्मचारियों को सुर्खियों में लेकर आते हैं। जब शीर्ष पर सहजता का उदाहरण सामने आता है, तो नेता और नागरिक के बीच की दूरी कम लगने लगती है।

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संसद पहुंचे तो झुककर किया प्रणाम
नरेंद्र मोदी जब मई 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बने तो संसद में शानो-शौकत नहीं, बल्कि श्रद्धा के साथ दाखिल हुए। उन्होंने गहरे झुककर और माथा टेककर संसद की सीढ़ियों को लोकतंत्र का मंदिर माना। संसद को आंखें बंद करके प्रणाम करने वाला उनके चित्र की लंबे समय तक चर्चा होती रही। उन्होंने संदेश दिया कि वे व्यक्तियों से ऊपर संस्थानों को और भव्यता से ऊपर कृतज्ञता को रखते हैं।

बच्चों से जुड़ने के लिए तोड़ा प्रोटोकॉल
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 2018 में लाल किले से संबोधन के बाद पीएम मोदी सुरक्षा घेरे को तोड़कर तिरंगा लहराते स्कूली बच्चों की भीड़ में शामिल हो गए। हाथ मिलाया, बातचीत की और उन बच्चों के चेहरों पर ऐसी खुशी बिखेर दी, जो उन्हें जीवनभर याद रहेगी। यह सहज भावना, बच्चों और आम लोगों की परवाह करने का उनका जज्बा, उनकी रैलियों में भी दिखता है। 2024 में, मध्य प्रदेश के झाबुआ में उन्होंने अपने भाषण के बीच में रुककर एक बच्चे को, जो अपने पिता के कंधों पर बैठा था, हाथ नीचे करने को कहा ताकि उसे तकलीफ न हो। यह दृश्य याद दिलाता है कि सार्वजनिक मंच पर भी कोई नेता किसी पड़ोसी की तरह व्यवहार कर सकता है।

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सीमाओं पर भी करुण भाव, जवानों के साथ दिवाली
वर्ष 2014 से पीएम मोदी हर दीवाली जवानों के साथ बिताते हैं-चाहे सियाचिन और कारगिल की बर्फीली चोटियां हों, पंजाब की सीमाएं हों, या कच्छ का रेगिस्तान। वे वहां सिर्फ निरीक्षण के लिए नहीं जाते, बल्कि जवानों के साथ भोजन करते हैं, मिठाइयां भी बांटते हैं और हंसी-मजाक करते नजर आते हैं। उनकी मुलाकातें जवानों का हौसला बढ़ाती हैं और नागरिकों को बताती हैं कि राज्य कोई अमूर्त विचार नहीं, बल्कि लोग हैं।

जब सिवन को गले लगाया
2019 में जब चंद्रयान-2 का लैंडर संपर्क खो बैठा, तो इसरो के अध्यक्ष डॉ. के. सिवन की आंखें छलक पड़ीं। पीएम मोदी ने देश के प्रमुख वैज्ञानिक को रोते देखा तो उन्हें गर्मजोशी से गले लगा लिया। पीठ थपथपाई, धीमी आवाज में सांत्वना दी और लंबे समय तक उनको गले से लगाए रखा। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर इसलिए वायरल हो गई, क्योंकि यह भव्य नहीं, बल्कि गहरी मानवीय संवेदना से भरी हुई थी। उसी साल प्रयागराज के कुंभ में, उन्होंने सफाई कर्मचारियों को सम्मान देते हुए उनके सामने झुककर और मंच पर उनके पैर धोकर उनकी सेवा को सराहा। इन्हें कर्मयोगी कहकर पुकारा, जो विशाल समागम को स्वच्छ रखने में जुटे थे।

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