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Modi 3.0: मुसलमानों का नई सरकार में शून्य हुआ प्रतिनिधित्व; दो साल से सरकार में नहीं, चार उम्मीदवारों में सभी
Mon, 10 Jun 2024 05:30 AM IST
शिव शरण शुक्ला
हिमांशु मिश्र
हिमांशु मिश्र
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Mon, 10 Jun 2024 05:30 AM IST
सार
मोदी सरकार में मुस्लिम प्रतिनिधित्व का सिलसिला तीन से शुरू हो कर अब शून्य पर अटक गया है। पहले कार्यकाल में मोदी मंत्रिमंडल में नजमा हेपतुल्ला, एमजे अकबर और नकवी के रूप में तीन मुसलमानों का प्रतिनिधित्व था।
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नरेंद्र मोदी
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
देश में 20 करोड़ की आबादी। कुल आबादी में करीब 14 फीसदी की हिस्सेदारी। बावजूद इसके मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में यह बिरादरी मंत्रिमंडल में उपस्थिति दर्ज नहीं करा सकी। आजादी के बाद यह पहली सरकार है जिसके मंत्रिमंडल में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व शून्य है। हालांकि शून्य प्रतिनिधित्व का सिलसिला जुलाई 2022 से जारी है, जब सरकार के इकलौते मुस्लिम मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी राज्यसभा का टिकट नहीं मिलने के कारण उच्च सदन में नहीं पहुंच सके थे।
गौरतलब है कि मोदी सरकार में मुस्लिम प्रतिनिधित्व का सिलसिला तीन से शुरू हो कर अब शून्य पर अटक गया है। पहले कार्यकाल में मोदी मंत्रिमंडल में नजमा हेपतुल्ला, एमजे अकबर और नकवी के रूप में तीन मुसलमानों का प्रतिनिधित्व था। हालांकि इसी कार्यकाल में मी टू अभियान के निशाने पर आए अकबर को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा तो हेपतुल्ला के राज्यपाल बनने के बाद नकवी के रूप में मुसलमानों का इकलौता प्रतिनिधित्व रह गया था।
दूसरे कार्यकाल में भी नकवी ही मंत्रिमंडल में मुसलमानों के इकलौते प्रतिनिधि थे। हालांकि जुलाई 2022 में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री रहते नकवी का राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो गया। दोबारा टिकट नहीं मिलने के कारण उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और इसके साथ ही मोदी मंत्रिमंडल में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व शून्य हो गया।
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लोकसभा में भी घटा प्रतिनिधित्व
सीमित संख्या में चुनाव लड़ने का अवसर मिलने के कारण वर्तमान लोकसभा में भी मुसलमानों का प्रतिनिधित्व घट गया। एनडीए ने ही नहीं विपक्षी इंडी गठबंधन ने भी इस बिरादरी को मौका देने में कंजूसी बरती। इसके कारण बीते साल 27 के मुकाबले इस बार महज 23 मुसलमान उम्मीदवार ही चुनाव जीत पाए। राजग ने इस बार चार, कांग्रेस ने 19, सपा ने 4, टीएमसी ने 6 और बीएसपी ने 32 मुसलमान उम्मीदवार उतारे थे। इनमें बसपा और राजग का एक भी उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाया। इस बार यूपी से पांच, प. बंगाल से 6, जम्मू कश्मीर से 3, बिहार—केरल से दो—दो, लक्षद्वीप, असम तमिलनाडु, तेलंगाना और लद्दाख से एक—एक मुस्लिम उम्मीदवार को जीत मिली।
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गौरतलब है कि मोदी सरकार में मुस्लिम प्रतिनिधित्व का सिलसिला तीन से शुरू हो कर अब शून्य पर अटक गया है। पहले कार्यकाल में मोदी मंत्रिमंडल में नजमा हेपतुल्ला, एमजे अकबर और नकवी के रूप में तीन मुसलमानों का प्रतिनिधित्व था। हालांकि इसी कार्यकाल में मी टू अभियान के निशाने पर आए अकबर को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा तो हेपतुल्ला के राज्यपाल बनने के बाद नकवी के रूप में मुसलमानों का इकलौता प्रतिनिधित्व रह गया था।
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दूसरे कार्यकाल में भी नकवी ही मंत्रिमंडल में मुसलमानों के इकलौते प्रतिनिधि थे। हालांकि जुलाई 2022 में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री रहते नकवी का राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो गया। दोबारा टिकट नहीं मिलने के कारण उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और इसके साथ ही मोदी मंत्रिमंडल में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व शून्य हो गया।
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लोकसभा में भी घटा प्रतिनिधित्व
सीमित संख्या में चुनाव लड़ने का अवसर मिलने के कारण वर्तमान लोकसभा में भी मुसलमानों का प्रतिनिधित्व घट गया। एनडीए ने ही नहीं विपक्षी इंडी गठबंधन ने भी इस बिरादरी को मौका देने में कंजूसी बरती। इसके कारण बीते साल 27 के मुकाबले इस बार महज 23 मुसलमान उम्मीदवार ही चुनाव जीत पाए। राजग ने इस बार चार, कांग्रेस ने 19, सपा ने 4, टीएमसी ने 6 और बीएसपी ने 32 मुसलमान उम्मीदवार उतारे थे। इनमें बसपा और राजग का एक भी उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाया। इस बार यूपी से पांच, प. बंगाल से 6, जम्मू कश्मीर से 3, बिहार—केरल से दो—दो, लक्षद्वीप, असम तमिलनाडु, तेलंगाना और लद्दाख से एक—एक मुस्लिम उम्मीदवार को जीत मिली।