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रेल मंत्रालय: बिना भर्ती प्रक्रिया के नियुक्ति की मांग मंजूर नहीं, मांग संविधान और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के विपरीत
Mon, 31 Jan 2022 05:14 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Mon, 31 Jan 2022 05:14 AM IST
सार
ये नियुक्ति किसी अनिवार्यता अथवा कार्यकारी जरूरत के समय इस्तेमाल करने के लिए की जाती है। हालांकि इन्हें नियुक्ति से जुड़े लाभ मिलते हैं लेकिन अस्थायी रेलवे कर्मी होने के कारण बिना भर्ती प्रक्रिया पूरी किए ये स्थायी कर्मचारी के रूप में नहीं नियुक्त किए जा सकते।
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बिना भर्ती प्रक्रिया के नियुक्ति की मांग मंजूर नहीं।
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
रेल मंत्रालय ने कहा है कि रेलवे से जुड़े संस्थानों में प्रशिक्षण लेने वाले प्रशिक्षुओं की यह मांग मंजूर नहीं की जा सकती कि उन्हें बिना उचित भर्ती प्रक्रिया के नियुक्त कर लिया जाए। हालांकि मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि इन प्रशिक्षुओं को रेलवे की भर्तियों में दूसरे उम्मीदवारों के मुकाबले तरजीह दी जाती है, लेकिन इसके लिए न्यूनतम अंक हासिल करना और मेडिकल के मानकों पर खरा उतरना जरूरी है।
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मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार रेलवे के अलग-अलग संस्थानों में एप्रेंटिस एक्ट के तहत विभिन्न ट्रेड में 1963 से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन प्रशिक्षुओं को बिना किसी प्रतिस्पर्धा अथवा चयन प्रक्रिया के सिर्फ उनके अंकों के आधार पर प्रशिक्षण के लिए चुना जाता है। हालांकि रेलवे इन्हें सिर्फ प्रशिक्षण देने के लिए बाध्य है, लेकिन 2004 से लेवल एक के पदों पर इन्हें प्रशिक्षण खत्म होने के बाद वैकल्पिक एजेंट के रूप में अस्थायी रूप से नियुक्त किया जा रहा है।
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ये नियुक्ति किसी अनिवार्यता अथवा कार्यकारी जरूरत के समय इस्तेमाल करने के लिए की जाती है। हालांकि इन्हें नियुक्ति से जुड़े लाभ मिलते हैं लेकिन अस्थायी रेलवे कर्मी होने के कारण बिना भर्ती प्रक्रिया पूरी किए ये स्थायी कर्मचारी के रूप में नहीं नियुक्त किए जा सकते।
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20 प्रतिशत सीटें रेलवे के प्रशिक्षुओं के लिए
मंत्रालय ने कहा कि भारतीय रेलवे की भर्तियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने के लिए रेलवे ने 2017 से लेवल एक की सभी भर्तियों के लिए केंद्रीयकृत प्रक्रिया शुरू की जिसके तहत राष्ट्रव्यापी कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) हो रहा है। इसके लिए एप्रेंटिस एक्ट में 2014 में संशोधन किया गया। इस संशोधन के जरिये लेवल एक की विज्ञापित सभी सीटों में 20 प्रतिशत सीटें रेलवे के अपने प्रशिक्षुओं के लिए आरक्षित की गईं। हालांकि इन प्रशिक्षुओं को अन्य सामान्य प्रशिक्षुओं की तरह ही लिखित परीक्षा में शामिल होना पड़ता है लेकिन उन्हें नियुक्ति में वरीयता दी जाती है। हालांकि इसके लिए एक न्यूनतम अंक की अर्हता और मेडिकल टेस्ट पास करना जरूरी है।
मांग संविधान और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के विपरीत
मंत्रालय ने कहा कि वर्ष 2018 में विज्ञापित लेवल 1 के 63202 पदों में से 12504 पद रेलवे के प्रशिक्षुओं के लिए आरक्षित थे जबकि 2019 में विज्ञापित 103769 पदों में से 20734 पद आरक्षित थे। मंत्रालय ने कहा कि ये प्रशिक्षु मांग कर रहे हैं कि बिना तय भर्ती परीक्षा, यानी लिखित और शारीरिक परीक्षा के ही इन्हें नियुक्त कर लिया जाए जो कि संभव नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि यह मांग सरकारी नौकरियों के बारे में संविधान के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के खिलाफ है।