फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Ministry of Home Affairs to refer Manipur viral video case to CBI

Manipur Video Case: मणिपुर वायरल वीडियो मामले की जांच CBI को सौंपी गई, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी

Fri, 28 Jul 2023 12:59 AM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Fri, 28 Jul 2023 12:59 AM IST
विज्ञापन
Ministry of Home Affairs to refer Manipur viral video case to CBI
सीबीआई। - फोटो : अमर उजाला

मणिपुर में दो महिलाओं के साथ दरिंदगी से देश को शर्मसार करने वाले मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी दी। साथ ही केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर मामले की सुनवाई मणिपुर से बाहर कराने का आग्रह किया है। इससे पहले गृह मंत्रालय ने मणिपुर वायरल वीडियो की जांच सीबीआई को सौंपने की जानकारी दी थी। 

विज्ञापन


केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीबीआई जांच का एलान करते हुए बताया कि मणिपुर में करीब 72 फीसदी सरकारी कर्मचारी काम पर लौट आए हैं। 82 फीसदी बच्चे भी स्कूल आने लगे हैं। सरकार ने मिणपुर में सभी जरूरी कदम उठाए हैं। अतिरिक्त सुरक्षाबल दिए गए। करीब 36 हजार जवान वहां तैनात हैं। केंद्रीय बलों की 124 कंपनियां और सेना व असम राइफल्स की 184 टुकड़ियां भेजी गईं। गृह मंत्री शाह ने तीन दिन और केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने 22 दिन मणिपुर में कैंप किया है।
विज्ञापन


इस बीच, सरकारी सूत्रों के हवाले से यह भी सामने आया है कि जिस मोबाइल से वह वायरल वीडियो शूट किया गया था। उसे भी बरामद कर लिया गया है। साथ ही वीडियो शूट करने वाले व्यक्ति को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। सरकारी सूत्रों ने यह भी बताया है कि केंद्र सरकार ने केंद्र ने कुकी और मैतेई समुदायों के सदस्यों के साथ बातचीत की है। प्रत्येक समुदाय के साथ छह दौर की बातचीत हुई है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय गृहमंत्रालय लगातार मैतेई और कुकी समुदाय के लोगों के संपर्क में है। राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए बातचीत अंतिम चरण में है। राज्य में तीन महीने तक चली जातीय हिंसा में करीब 150 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने यह भी बताया कि मणिपुर में कानून-व्यवस्था की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन सामान्य नहीं है। लगभग 35,000 सुरक्षाकर्मी मैदान पर हैं। राज्य में दवा और दैनिक आपूर्ति की कोई कमी नहीं है। वहां खाद्य और आवश्यक आपूर्ति की कीमतें नियंत्रण में हैं। बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी काम पर लौट रहे हैं और स्कूल भी फिर से शुरू हो रहे हैं।  

पिछले हफ्ते 4 मई की घटना का वीडियो वायरल होने के बाद से देशभर में आक्रोश है और इसकी निंदा हुई। संसद में भी मानसून सत्र की शुरुआत से हंगामा जारी है। भाजपा ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है लेकिन साथ ही वीडियो वायरल करने के समय पर भी सवाल उठाया है। वीडियो 20 जुलाई से शुरू हुए मानसून सत्र से एक दिन पहले वायरल हुआ था।

न्यायिक जांच वाली याचिका सीजेआई के पास
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा और यौन हमले की घटनाओं की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक स्वतंत्र कमेटी से कराने की मांग संबंधी एक याचिका को बृहस्पतिवार को सीजेआई के पास भेज दिया। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता विशाल तिवारी से कहा कि वह अपनी याचिका में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का उल्लेख करें। यह मामला पहले जस्टिस एसके कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किए जाने का उल्लेख था।

विपक्षी गठबंधन के सांसद 29-30 जुलाई को करेंगे मणिपुर का दौरा
जातीय हिंसा से जूझ रहे मणिपुर की स्थिति के आकलन के लिए विपक्षी गठबंधन इंडिया के सांसदों का एक समूह 29-30 जुलाई को इस पूर्वोत्तर राज्य का दौरा करेगा। लोकसभा में कांग्रेस के सचेतक मनिकम टैगोर ने बताया कि 20 से अधिक विपक्षी सांसदों का प्रतिनिधिमंडल इस सप्ताह के अंत में मणिपुर का दौरा करेगा और राज्य के मौजूदा हालात का जायजा लेगा।

मणिपुर में जातीय दंगों के लिए सीएम बीरेन सिंह दोषी- सीपीआईएम 
सीपीआईएम ने मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को राज्य में जातीय हिंसा के लिए दोषी ठहराया है। सीपीआईएम ने गुरुवार को उन पर मैतेई अंधराष्ट्रवाद का आरोप लगाया साथ ही कहा बीरेन सिंह खुलेआम कुकी समुदाय के खिलाफ बोल रहे हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार ने यह जानने के बावजूद हस्तक्षेप नहीं किया है कि मुख्यमंत्री और राज्य प्रशासन के बीच समझौता हो गया है और वे निष्पक्ष तरीके से कार्य करने में असमर्थ हैं।

मणिपुर में चार मई को क्या हुआ था? 
बता दें कि, यह घटना राज्य की राजधानी इंफाल से लगभग 35 किलोमीटर दूर कांगपोकपी जिले के गांव बी. फीनोम में हुई। ग्राम प्रधान द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, चार मई को शाम लगभग तीन बजे 900-1000 की संख्या में कई संगठनों से जुड़े लोग बी. फीनोम गांव में जबरदस्ती घुस आए। इनके पास एके राइफल्स, एसएल.आर इंसास और 303 राइफल्स जैसे अत्याधुनिक हथियार थे। हिंसक भीड़ ने सभी घरों में तोड़फोड़ की और फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, बर्तन, कपड़े, अनाज सहित नकदी को लूटने के बाद सभी चल संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया।  

इसके अलावा पांच ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए जंगल की ओर भाग गए। बाद में उन्हें नॉनपाक सेकमाई पुलिस टीम द्वारा बचाया गया और वे नोंगनोक सेकमाई थाने के रास्ते में थे। इस बीच उन्हें रास्ते में एक भीड़ ने रोक दिया और नोंगपोक सेकमाई थाने से लगभग दो किलोमीटर दूर और 33 एआर सोमरेई चौकी से लगभग तीन किलोमीटर दूर भीड़ ने उन्हें पुलिस टीम की सुरक्षा से छीन लिया। इसके अलावा एक 56 साल के व्यक्ति की घटनास्थल पर ही हत्या कर दी गई। 

प्रधान ने बताया कि इसी दौरान भीड़ द्वारा तीन महिलाओं को उनके कपड़े उतारने के लिए मजबूर किया गया और भीड़ के सामने निर्वस्त्र कर दिया गया। घटना से जुड़े वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पुरुष असहाय महिलाओं के साथ लगातार छेड़छाड़ कर रहे हैं, जो रो रही हैं और उनसे छोड़ने की गुहार लगा रही हैं। हैवानियत यहीं सीमित नहीं रही, एक 21 साल की लड़की का दिन दहाड़े बेरहमी से सामूहिक दुष्कर्म किया गया। जब 19 वर्षीय छोटे भाई ने अपनी बहन की अस्मिता और जान बचाने की कोशिश की, तो भीड़ में शामिल लोगों ने उसकी मौके पर ही हत्या कर दी। हालांकि, पीड़िता कुछ लोगों की मदद से मौके से भागने में सफल रहीं।

घटना में आरोपियों पर केस किन धाराओं में दर्ज हुआ? 
पहले 18 मई को जीरो एफआईआर और फिर घटना के एक महीने से अधिक समय बाद 21 जून को एफआईआर दर्ज की गई थी। मामला आईपीसी की धारा 153ए, 398, 427, 436, 448, 302, 354, 364, 326, 376 और 34 और शस्त्र अधिनियम की धारा 25(1सी) के तहत दर्ज किया गया। पुलिस द्वारा दर्ज इस एफआईआर में भीड़ में शामिल करीब 1,000 लोगों पर कई आरोप लगाए गए हैं। इसमें विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना, घातक हथियार के साथ डकैती करना, आग लगाना, घर में जबरन घुसना, हत्या के लिए अपहरण करना, क्षति पहुंचाना, दुष्कर्म, हमला, गंभीर चोट पहुंचाना और आग्नेयास्त्र का उपयोग करके एक इरादे से हत्या करना।

मामले हुआ ये एक्शन 

इस घटना को लेकर जीरो एफआईआर कांगपोकपी जिले की सैकुल पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। बाद में इसे थौबल जिले के नोंगपोक सेकमाई पुलिस स्टेशन को रेफर कर दिया गया। यहां मामला दर्ज होने के करीब एक महीने बाद मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा कि वीडियो सामने आने के तुरंत बाद राज्य सरकार ने वीडियो का स्वत: संज्ञान लिया और जांच के आदेश दिए। उन्होंने कहा था कि मणिपुर पुलिस ने कार्रवाई कर पहली गिरफ्तारी की है। मुख्य अपराधी को आज सुबह एक पुलिस ऑपरेशन में गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी की पहचान 32 वर्षीय हुइरेम हेरोदास मैतेई के रूप हुई है जो पेची अवांग लीकाई का रहने वाला है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed