फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Ministry of Home Affairs finalises a comprehensive Model Prisons Act 2023

MHA: 130 साल पुराने कानून में संशोधन, गृह मंत्रालय ने 'आदर्श कारागार अधिनियम, 2023' को दिया अंतिम रूप

Fri, 12 May 2023 05:49 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 12 May 2023 05:49 PM IST
सार

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा, आदर्श कारागार अधिनियम, 2023 का उद्देश्य जेल प्रबंधन में सुधार करना और कैदियों को कानून का पालन करने वाले नागरिकों में बदलना और समाज में उनका पुनर्वास सुनिश्चित करना है।

विज्ञापन
Ministry of Home Affairs  finalises a comprehensive Model Prisons Act 2023
गृह मंत्रालय - फोटो : एएनआई

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के निर्देशों पर गृह मंत्रालय (एमएचए) ने एक व्यापक 'आदर्श कारागार अधिनियम, 2023' को अंतिम रूप दिया है, जो राज्यों के लिए एक मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में काम कर सकता है। केंद्रीय गृहमंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। 

विज्ञापन


गृह मंत्रालय ने 'कारागार अधिनियम, 1894' के साथ-साथ 'कैदी अधिनियम, 1900' और 'कैदियों का स्थानांतरण अधिनियम, 1950' की भी समीक्षा की है और इन अधिनियमों के प्रासंगिक प्रावधानों को भी 'मॉडल जेल अधिनियम, 2023' में शामिल किया है।

विज्ञापन


मंत्रालय ने कहा, आदर्श कारागार अधिनियम, 2023 का उद्देश्य जेल प्रबंधन में सुधार करना और कैदियों को कानून का पालन करने वाले नागरिकों में बदलना और समाज में उनका पुनर्वास सुनिश्चित करना है। नया कारागार अधिनियम महिलाओं और ट्रांसजेंडर कैदियों की सुरक्षा पर अधिक जोर देगा और जेल प्रबंधन में पारदर्शिता लाएगा और कैदियों के सुधार और पुनर्वास के लिए प्रदान करेगा। नया अधिनियम कैदियों के व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास और समाज में उनके पुनर्मिलन पर ध्यान केन्द्रित करेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन


एमएच ने पिछले कुछ दशकों में वैश्विक स्तर पर जेलों और कैदियों के बारे में एक पूरी तरह से नया दृष्टिकोण विकसित होने की ओर भी इशारा किया और कहा कि आज जेलों को केवल दंड देने वाले स्थानों के रूप में नहीं जाना जाता है, बल्कि इन्हें संस्कार देने वाले और सुधार करने वाले संस्थानों के रूप में जाना जाता है, जहां कैदियों को कानून का पालन करने वाले नागरिक के रूप में बदल दिया जाता है और उन्हें पुनर्वासित किया जाता है।

जारी बयान में एमएचए ने कहा, भारत के संविधान के प्रावधानों के मुताबिक 'जेल'/'हिरासत में लिए गए व्यक्ति' राज्य का विषय हैं। जेल प्रबंधन और कैदी प्रशासन की जिम्मेदारी पूरी तरह से राज्य सरकारों की है जो अकेले इस संबंध में उचित विधायी प्रावधान करने में सक्षम हैं। हालांकि, आपराधिक न्याय प्रणाली में कुशल जेल प्रबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए भारत सरकार इस संबंध में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का समर्थन करने को उच्च स्तर का महत्व देती है।


एमएचए ने इस बात पर भी गौर किया कि मौजूदा कारागार अधिनियम में कई खामियां हैं, जो सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जेल प्रशासन को नियंत्रित करता है।  जेल प्रबंधन की आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप अधिनियम को संशोधित और उन्नत करने की आवश्यकता महसूस की गई।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed