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नई दिल्ली: सैन्य कमांडर कॉन्फ्रेंस में भारत-चीन संबंधों पर तैयार होगी कार्ययोजना, अधिकारी बना रहे नई रणनीति
Sun, 06 Nov 2022 06:24 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Sun, 06 Nov 2022 06:24 AM IST
सार
7 से 11 नवंबर तक सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे के नेतृत्व में सभी कमानों के कमांडर, डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर और डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस के प्रमुख तथा वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा के विभिन्न आयाम पर मंथन करेंगे।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी तनाव के बीच सेना के शीर्ष अधिकारी भारत-चीन के सामयिक संबंधों पर नई रणनीति तैयार कर रहे हैं। दिल्ली में सोमवार से शुरु होने वाली पांच दिवसीय सैन्य कमांडर कॉन्फ्रेंस में इसकी कार्ययोजना तय की जाएगी। साथ ही सुरक्षा परिप्रेक्ष्य में तकनीक की बढ़ती चुनौतियों से निपटने का ब्लू प्रिंट भी तैयार किया जाएगा।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, 7 से 11 नवंबर तक सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे के नेतृत्व में सभी कमानों के कमांडर, डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर और डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस के प्रमुख तथा वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा के विभिन्न आयाम पर मंथन करेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी इस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे।
साथ ही थलसेना, वायुसेना और नौसेना प्रमुखों के साथ अलग से बैठक करेंगे। साल में दो बार होने वाली यह कॉन्फ्रेंस प्रशासनिक-सामरिक नीति और रणनीति तय करने का उच्चस्तरीय मंच है। मंत्रालय ने जानकारी दी कि सेना उत्पादन में आत्मनिर्भरता, मानव संसाधन व प्रशिक्षण संबंधी नए नीतिगत फैसले लिए जाएंगे। कॉन्फ्रेंस में सेना के तीनों अंगों के अधिकारियों की रूस-यूक्रेन युद्ध पर किए जा रहे अध्ययनों पर भी लंबे विमर्श की योजना है। पूर्वी लद्दाख के मौजूदा हालात के साथ समुद्र में चीन की हरकतों पर भी कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
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रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, 7 से 11 नवंबर तक सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे के नेतृत्व में सभी कमानों के कमांडर, डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर और डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस के प्रमुख तथा वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा के विभिन्न आयाम पर मंथन करेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी इस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे।
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साथ ही थलसेना, वायुसेना और नौसेना प्रमुखों के साथ अलग से बैठक करेंगे। साल में दो बार होने वाली यह कॉन्फ्रेंस प्रशासनिक-सामरिक नीति और रणनीति तय करने का उच्चस्तरीय मंच है। मंत्रालय ने जानकारी दी कि सेना उत्पादन में आत्मनिर्भरता, मानव संसाधन व प्रशिक्षण संबंधी नए नीतिगत फैसले लिए जाएंगे। कॉन्फ्रेंस में सेना के तीनों अंगों के अधिकारियों की रूस-यूक्रेन युद्ध पर किए जा रहे अध्ययनों पर भी लंबे विमर्श की योजना है। पूर्वी लद्दाख के मौजूदा हालात के साथ समुद्र में चीन की हरकतों पर भी कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
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