Indian Army: भारतीय सेना को भविष्य में और ताकतवर बनाने के लिए दिल्ली में हाईलेवल बैठक, स्वदेशी तकनीकों पर जोर
भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने दिल्ली में सैन्य व नागरिक विशेषज्ञों संग बैठक की। आत्मनिर्भर और विकसित भारत 2047 विजन के तहत, भारतीय सेना को आधुनिक तकनीकों से लैस करने और स्वदेशी क्षमताओं को अपनाने पर चर्चा हुई।
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भारतीय सेना को और मजबूत बनाने के लिए भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने मंगलवार को अहम बैठक की। ये बैठक दिल्ली में सैन्य और नागरिक विशेषज्ञों के साथ हुई। इस बैठक में भविष्य में भारतीय सेना को और मजबूत व आधुनिक बनाने के लिए उन्नत तकनीकों के इस्तेमाल पर चर्चा हुई। बैठक का मकसद 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत 2047' की दिशा में सेना की तैयारी को और बेहतर बनाना था।
भारतीय सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बैठक की तस्वीरें साझा करते हुए जानकारी दी। भारतीय सेना और नीति आयोग के बीच उन्नत तकनीकों के उपयोग को लेकर उच्चस्तरीय चर्चा हुई। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और नीति आयोग के सीईओ श्री बी वी आर सुब्रह्मण्यम ने इस बैठक की अध्यक्षता की।
भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने पर जोर
भारतीय सेना ने बताया कि चर्चा का मुख्य विषय था कि कैसे देश की घरेलू क्षमताओं (इंडिजिनस टेक्नोलॉजी) को अपनाकर सेना की ताकत को और बढ़ाया जाए, ताकि वह हर बदलती चुनौती का डटकर सामना कर सके। इसके साथ ही सेना ने ये भी बताया कि भारतीय सेना ने वर्ष 2024 को टेक्नोलॉजी अब्जॉर्प्शन का वर्ष घोषित किया है। इस साल सेना कई नई और उन्नत तकनीकों को अपनी व्यवस्था में शामिल करने के लिए प्रयासरत है।
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बता दें कि इससे पहले बीते साल 19 अगस्त 2024 को नई दिल्ली में सेना की शीर्ष नेतृत्व की बैठक हुई थी। यह बैठक जनरल द्विवेदी के सेना प्रमुख बनने के बाद पहली बड़ी रणनीतिक बैठक थी। उस समय भी चर्चा का केंद्र बिंदु अमृत काल था। जिसका उद्देश्य सेना का भविष्य तय करना और भारत को 2047 तक एक विकसित और सशक्त राष्ट्र बनाना था।
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विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर जोर
गौरतलब है कि 2024 की बैठक में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक साझा विजन पर चर्चा की थी, जिसका उद्देश्य था भारतीय सेना को एक आधुनिक, चुस्त, अनुकूलनीय, तकनीकी रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बल में बदलना, जो बहु-क्षेत्रीय युद्ध की स्थितियों में देश के हितों की रक्षा कर सके। यह बैठक इस बात का संकेत है कि भारतीय सेना अब केवल परंपरागत युद्धों की तैयारी नहीं कर रही, बल्कि भविष्य की जटिल तकनीकी चुनौतियों से भी निपटने के लिए खुद को लगातार विकसित कर रही है।