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MIG-21 Crash: ज्यादातर देशों में रिटायर हो चुका विमान भारतीय वायु सेना की जरूरत या मजबूरी? जानिए इस विमान के बारे में सब कुछ

Sat, 25 Dec 2021 07:42 PM IST
सुभाष कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुभाष कुमार Updated Sat, 25 Dec 2021 07:42 PM IST
सार

यह पहला मामला नहीं है, जहां मिग-21 विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ है। लगातार हो रहे हादसों और देश के बहादुर जवानों की मौत की वजह से मिग-21 विमानों को ''फ्लाइंग कॉफिन'' यानी उड़ता हुआ ताबूत के नाम से भी जाना जाने लगा है।

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Mig21 aircraft crashed near jaisalmer,many country retired it, then why india is using, know why it is known as flying coffin in the world,full history of mig 21
मिग 21 - फोटो : Social Media

विस्तार

भारतीय वायु सेना का एक और विमान मिग-21 बीते दिन राजस्थान के जैसलमेर में हादसे का शिकार हो गया। इसमें विंग कमांडर हर्षित सिन्हा का निधन हो गया। जानकारी के मुताबिक, हर्षित सिन्हा ने अभ्यास के लिए विमान से उड़ान भरी थी, लेकिन तकनीकी खराबी की वजह से विमान हादसे का शिकार हो गया। इस घटना ने एक बार फिर मिग-21 विमानों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, यह पहला मामला नहीं है, जहां मिग-21 विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ है। लगातार हो रहे हादसों और देश के बहादुर जवानों की मौत की वजह से मिग-21 विमानों को ''फ्लाइंग कॉफिन'' यानी उड़ता हुआ ताबूत के नाम से भी जाना जाने लगा है। आइए जानते हैं इस विमान के बारे में सब कुछ...

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कब हुआ निर्माण?
मिग-21 को मिकोयान गुरेविच भी कहते हैं। यह सोवियत काल के उन्नत लड़ाकू विमानों में से एक है। सोवियत यूनियन (वर्तमान में रूस) की मिकोयान कंपनी इसका निर्माण करती थी। इसने अपनी पहली उड़ान साल 1955 में भरी थी और इसे आधिकारिक रूप से साल 1959 में सेना में शामिल किया गया था। इस विमान के निर्माण के पीछे मुख्य वजह सोवियत संघ और पश्चिमी देशों के बीच प्रतिद्वंदिता थी। सोवियत संघ इसके जरिए अमेरिका और उसके सहयोगी नाटों देशों को जवाब देना चाहता था। 





भारतीय वायुसेना में कब शामिल किया गया?
मिग-21 विमान को भारतीय वायु सेना में साल 1963 में शामिल किया गया था। उस वक्त के सबसे उन्नत किस्म के विमानों में से एक होने की वजह से भारत ने कुल 874 मिग-21 विमानों को अपने बेड़े में शामिल किया था। इनमें से ज्यादातर विमानों का निर्माण भारत में ही किया गया था। हालांकि, अब इस विमान का निर्माण बंद किया जा चुका है। भारत की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) इसे लाइसेंस के तहत अपग्रेड करती है। 
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हादसों पर वायु सेना का क्या कहना है? 
इन विमानों को उड़ता हुआ ताबूत कहे जाने को वायु सेना के अधिकारी सही नहीं ठहराते। उन्होंने कई बार इस बात से इनकार किया है। उन्हें अब भी इस विमान पर भरोसा है। यही कारण है कि इसे सुरक्षित विमान साबित करने के लिए भारतीय वायु सेना के दो पूर्व प्रमुख बीएस धनोआ और आरकेएस भदौरिया ने खुद इस विमान से उड़ान भरी थी। 

हादसों की लंबी सूची
भारतीय वायु सेना के मिग-21 विमानों के हादसों की सूची काफी लंबी है। साल 2021 में अब तक 5 मिग-21 विमान हादसे का शिकार हो चुके हैं। इससे पहले साल 2012 में तत्कालीन रक्षामंत्री एके एंटनी ने अपने आधिकारिक बयान में बताया था कि वायु सेना में शामिल होने के बाद से लेकर साल 2012 तक 482 मिग-21 विमान हादसे के शिकार हो चुके थे। इन हादसों में 171 पायलट, 39 आम नागरिक और आठ अन्य की मौत हुई थी। इसके बाद भी साल दर साल ये विमान हादसे का शिकार होते रहे।

इस साल हुए 5 हादसे

5 जनवरी 2021-  मिग-21 राजस्थान में क्रैश, पायलट बाल-बाल बचे।

17 मार्च 2021-     मिग-21 ग्वालियर में क्रैश, ग्रुप कैप्टन आशीष गुप्ता की मौत।

20 मई 2021-      मिग-21 पंजाब के मोगा में क्रैश, पायलट अभिनव गुप्ता की मौत।  

25 अगस्त 2021-  मिग-21 राजस्थान के बाड़मेर में क्रैश, पायलट बाल-बाल बचे।

24 दिसंबर 2021-  मिग-21 विमान जैसलमेर के पास क्रैश, विंग कमांडर हर्षित सिन्हा की मौत।

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2013 से अब तक हादसे का शिकार हुए 20 मिग-21 - (सोर्स- bharatrakshak.com)
 
साल मिग-21 क्रैश मौतें
2013 2 1
2014 3 1
2015 2 0
2016 3 0
2018 2 1
2019 3 0
2021 5 3

क्या है विमान की खूबी?
मिग-21 विमान को भारतीय वायु सेना के पहले सुपर सोनिक विमान के रूप में जाना जाता है। यह विमान ध्वनि की गति से तेज उड़ने की क्षमता रखते हैं। इसका इस्तेमाल दुनिया भर के 60 से अधिक देशों ने किया है। भारत के लिए भी कई अहम मौके पर मिग-21 ने गेंमचेंजर की भूमिका निभाई है। 1965, 1971 और 1999 में पाकिस्तान से लड़ाई में इस विमान ने अहम योगदान दिया था। 

भारतीय वायुसेना के पास मिग-21 विमानों के 4 स्क्वाड्रन हैं। एक स्क्वाड्रन में लड़ाकू विमानों की संख्या 16 से 18 के बीच होती है। अनुमान के मुताबिक, वायुसेना के पास 64 मिग-21 उपलब्ध है। बालाकोट स्ट्राइक के समय विंग कमांडर अभिनंदन ने इसी मिग-21 से पाकिस्तानी वायुसेना के एफ-16 विमान को मार गिराया था।

विमान की खामियां
मिग-21 विमान अपने आप में एक ऐतिहासिक किस्म का विमान है, लेकिन आधी सदी से अधिक पुराने हो जाने के कारण यह आधुनिकता की दौर में काफी पीछे छूट गया है। भारतीय वायु सेना इसके सबसे उन्नत किस्म मिग-21 बाइसन का इस्तेमाल करती है। इसे अत्याधुनिक बीवीआर मिसाइल से लैस किया जा सकता है। हालांकि, सभी सकारात्मक बातों के बीच आधुनिक दौर में लड़ाकू विमानों में इंजन की तकनीक सबसे ज्यादा मायने रखती है और मिग-21 विमानों की इंजन तकनीक अब काफी पुरानी हो चली है। इसके अलावा विमान का डिजाइन और फ्रेम भी पुराने जमाने का है। इस विमान को रूस ने 1985 में ही रिटायर कर दिया था। इसके अलावा ज्यादातर उपयोगकर्ता देश भी इसे रिटायर कर चुके हैं।  

भारत की जरूरत भी और मजबूरी भी
भारतीय वायु सेना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायु सेना है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी समस्या पुराने होते विमान हैं। विमानों के बेड़े में सबसे पुराना मिग-21 है। दशकों से ही इसे रिटायर करने की बातें की जा रही हैं। हालांकि, वायु सेना अभी इसे कम से कम साल 2024 तक प्रयोग करने वाली है। इसका प्रमुख कारण वायु सेना के कम स्क्वाड्रन की संख्या हैं। 

भारतीय वायु सेना की मांग के अनुसार, पाकिस्तान और चीन दोनों को एक साथ काबू करने के लिए लड़ाकू विमानों के 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है। हालांकि, वर्तमान में सेना के पास 31-32 स्क्वाड्रन ही उपलब्ध हैं। एक स्क्वाड्रन में विमानों की संख्या 16 से 18 के बीच होती है। अगर मिग-21 को तत्काल प्रभाव से रिटायर करना पड़े, तो स्क्वाड्रन की संख्या 30 से भी कम हो जाएगी। 

क्या हैं उपाय?
मिग-21 को रिटायर करने के लिए तेजस विमानों के निर्माण में तेजी लाना जरूरी है। वायु सेना ने 48 हजार करोड़ के सौदे के तहत हिंदुस्तान एचएएल को 83 हल्के स्वदेशी तेजस मार्क 1A विमानों का ऑर्डर दिया है। ये विमान कुछ ही सालों में वायु सेना के बेड़े में शामिल होना शुरू हो जाएंगे और मिग-21 विमानों की जगह लेंगे। 

इसके अलावा वायु सेना ने एक लाख करोड़ रुपये से अधिक रकम के मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट डील के तहत 114 लड़ाकू विमान खरीदने की बात कही है। इसके अलावा एचएएल और डीआरडीओ साथ मिलकर वायुसेना के लिए पांचवी-छठवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट का भी निर्माण कर रहे हैं। आगे चलकर यह विमान वायु सेना के कम होते स्क्वाड्रन और मिग-21 के अलावा भी पुराने हो चले अन्य विमानों की भरपाई करेंगे।

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