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चिंताजनक: टायरों के घिसने से निकलता है माइक्रोप्लास्टिक, सेहत के लिए चार गुना अधिक हानिकारक
Mon, 23 Sep 2024 05:49 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Mon, 23 Sep 2024 05:49 AM IST
सार
इंपीरियल कॉलेज लंदन के ट्रांजिशन टू जीरो पॉल्यूशन इनिशिएटिव के शोधकर्ताओं ने कहा है कि दुनियाभर में हर साल 60 लाख टन टायरों के घिसने के कारण अत्यंत लघु आकार के छोटे कण निकलते हैं, जो न सिर्फ पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं बल्कि जिस हवा में हम सांस लेते हैं उसमें भी यह कण समाए होते हैं।
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टायर (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
टायरों के घिसने के कारण माइक्रोप्लास्टिक रूपी छोटे-छोटे कण और पार्टिकुलेट मैटर लोगों की सेहत के लिए धीमे जहर जैसे हैं। इंपीरियल कॉलेज लंदन के ट्रांजिशन टू जीरो पॉल्यूशन इनिशिएटिव के शोधकर्ताओं ने कहा है कि दुनियाभर में हर साल 60 लाख टन टायरों के घिसने के कारण अत्यंत लघु आकार के छोटे कण निकलते हैं, जो न सिर्फ पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं बल्कि जिस हवा में हम सांस लेते हैं उसमें भी यह कण समाए होते हैं।
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सड़कों में बहता पानी जलमार्गों के जरिये जलाशय और खेतों में जाता है, इसलिए यह कृषि पर भी बुरा प्रभाव डालते हैं। भले ही हमारे सभी वाहन आगे चलकर जीवाश्म ईंधन के बजाय बिजली द्वारा ही क्यों न संचालित हों फिर भी टायरों के घिसने के कारण इनके द्वारा उत्सर्जित हानिकारक प्रदूषण वातावरण में घुलता मिलता रहेगा।
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इलेक्ट्रिक वाहन के टायर घिसते हैं ज्यादा
इलेक्ट्रिक वाहन डीकार्बोनाइज परिवहन के लिए निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन हमें बड़ी तस्वीर को भी देखने की जरूरत है। चिंता इस बात की है कि इलेक्ट्रिक वाहन भारी होते हैं जो टायरों के घिसने में वृद्धि करते हैं। टायरों के घिसने से निकलने वाले कण टायर टूटने, टायर रबर के दिखाई देने वाले टुकड़ों से लेकर नैनोकणों तक कई प्रकार के कण छोड़ते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि इन कणों में पॉलीएरोमैटिक हाइड्रोकार्बन, बेंजोथियाजोल, आइसोप्रीन, जिंक और लेड जैसी भारी धातुओं सहित कई तरह के जहरीले रसायन होते हैं।
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कई गंभीर बीमारियों के लिए जिम्मेदार
इंपीरियल कॉलेज के डिपार्टमेंट ऑफ लाइफ साइंसेज के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. विल पियर्स के अनुसार टायर का कचरा स्वाभाविक रूप से नष्ट नहीं होता है और यह धीरे-धीरे पर्यावरण में घुल-मिलकर अन्य प्रदूषकों के साथ-साथ जैविक जीवों पर भी विपरीत प्रभाव डालता है। शोध के दौरान इस बात के भी सबूत मिले हैं कि टायरों के घिसने से निकलने वाले कण अन्य प्रदूषित कणों के साथ मिलकर हृदय, फेफड़े, शारीरिक विकास, प्रजनन और कैंसर सहित कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ाते हैं।
भयावह रूप धारण करता जा रहा प्रदूषण
वर्तमान में टायरों के घिसने के स्तर और उनकी विषाक्तता को मापने का कोई मानकीकृत तरीका नहीं है, इसलिए यह प्रदूषण धीरे-धीरे भयावह रूप धारण करता जा रहा है। एक तरह से इसे एक अदृश्य दुश्मन की संज्ञा दी जा सकती है। शोधकर्ताओं का तर्क है कि सीओ-2 और अन्य उत्सर्जन में कमी के साथ-साथ टायर प्रदूषण को कम करने और यातायात को स्वच्छ बनाने के लिए ठोस नीति की आवश्यकता है।