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MHA: CAPF/CPO, जांच एजेंसी व राज्य पुलिस में राष्ट्रपति पदक की सिफारिश वाले प्रोफार्मा में पूछी जा रही 'जाति'
सार
MHA: केंद्रीय गृह मंत्रालय की पुलिस 1 डिवीजन (पीएमए सेल) की तरफ से गत माह सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के गृह सचिव और डीजीपी को एक पत्र लिखा गया था। वह पत्र आईबी, सीबीआई, एसवीपीएनपीए, एसपीजी, एनपीए और एनसीआरबी के डायरेक्टर को भी भेजा गया।
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गृह मंत्रालय
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत प्रदान किए जाने वाले विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक (पीएसएम) / सराहनीय सेवा का पदक (एमएसएम) के प्रोफार्मा में आवेदक की जाति के बारे में पूछा जाता है। गणतंत्र दिवस 2025 के मद्देनजर, केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक और सराहनीय सेवा पदक (एमएसएम) के लिए ऑनलाइन नोमिनेशन मांगे गए थे। इनमें आवेदक और सिफारिश करने वाले मंत्रालय, विभाग, संगठन या एजेंसी को कई तरह की जानकारी देनी होती हैं। इन्हीं जानकारियों में एक कॉलम 'जाति' का भी रखा गया है। प्रोफार्मा के छठे कॉलम में लिखा था कि आवेदक अनुसूचित जाति से है, अनुसूचित जनजाति से है, ओबीसी वर्ग से है या सामान्य वर्ग से आता है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की पुलिस 1 डिवीजन (पीएमए सेल) की तरफ से गत माह सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के गृह सचिव और डीजीपी को एक पत्र लिखा गया था। वह पत्र आईबी, सीबीआई, एसवीपीएनपीए, एसपीजी, एनपीए और एनसीआरबी के डायरेक्टर को भी भेजा गया। इनके साथ ही बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एनएसजी, एनआईए, आरपीएफ, एनडीआरएफ, एनएचआरसी, असम राइफल (थ्रू एलओएआर), फायर सर्विस, बीपीआरएंडडी, सचिव रॉ, एससी/एसटी आयोग, सचिव लोकसभा/राज्यसभा सचिवालय और सभी केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों (रक्षा मंत्रालय को छोड़कर), को भी उक्त पत्र प्रेषित किया गया। इसमें गणतंत्र दिवस 2025 के मद्देनजर, केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा विशिष्ट सेवा का राष्ट्रपति पदक / सराहनीय सेवा का राष्ट्रपति पदक के लिए ऑनलाइन नोमिनेशन मांगे गए थे। कई राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों व सीएपीएफ/सीपीओ से तय तिथि तक ये आवेदन प्राप्त नहीं हुए थे। बाद में इन आवेदनों के पहुंचने की अंतिम तिथि 31 अक्तूबर रखी गई थी।
पीएसएम और एमएसएम के लिए जिस अधिकारी के नाम की सिफारिश की गई है, उसके बारे में दो सौ शब्दों का हवाला/अनुलेखन देना होगा। पत्र में यह भी कहा गया था कि सीएपीएफ/सीपीओ अपनी सिफारिशें, सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भेज सकते हैं। उक्त अवार्ड के लिए कई तरह के नियम तय किए गए हैं। इनमें विजिलेंस क्लीयरेंस और पिछले दस वर्ष की एपीएआर का होना भी अनिवार्य किया गया है। होमगार्ड और सिविल डिफेंस वालंटियर के मामले में एपीएआर लिखने का प्रावधान नहीं था।
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विशिष्ट सेवा का राष्ट्रपति पदक और सराहनीय सेवा का राष्ट्रपति पदक की सिफारिशों के लिए एक प्रोफार्मा तैयार किया गया है। इसे सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, सुरक्षा संगठन/एजेंसियां, केंद्रीय मंत्रालय/विभाग, सीएपीएफ/सीपीओ, जेल विभाग, सिविल डिफेंस एवं फायर सर्विसेज को भेजा गया था।
इसमें कई बातों की जानकारी मांगी गई थी। जैसे आवेदक का नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि, जेंडर और जाति का विवरण पूछा गया था। प्रोफार्मा के छठे कॉलम में लिखा था कि आवेदक अनुसूचित जाति से है, अनुसूचित जनजाति से है, ओबीसी वर्ग से है या सामान्य वर्ग से आता है। आवेदक की नियुक्ति के बारे में भी जानकारी मांगी गई थी।
इनके अलावा संबंधित आवेदक की कुल सेवा, वर्तमान पोस्टिंग, प्रतिनियुक्ति का विवरण, पहले कोई अवार्ड मिला है तो उसमें कितनी राशि दी गई, आदि सूचना भी देनी होगी। सेवाकाल के दौरान कोई सजा, मेडिकल श्रेणी, कोई पेंडिंग जांच व एपीएआर की पिछले दस वर्ष की रेटिंग, यह जानकारी भी मांगी गई थी। सिविल डिफेंस और होमगार्ड वालंटियर की वर्क परफोरमेंस रिपोर्ट के लिए जो प्रोफार्मा तैयार किया गया है, उसमें जॉब नॉलेज, क्वालिटी ऑफ वर्क, सेंस ऑफ रेस्पॉंसबिलिटी, मोटिवेशन फॉर वालंटियरिंग और प्रेरणा स्त्रोत आदि की जानकारी के कॉलम तैयार किए गए थे।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय की पुलिस 1 डिवीजन (पीएमए सेल) की तरफ से गत माह सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के गृह सचिव और डीजीपी को एक पत्र लिखा गया था। वह पत्र आईबी, सीबीआई, एसवीपीएनपीए, एसपीजी, एनपीए और एनसीआरबी के डायरेक्टर को भी भेजा गया। इनके साथ ही बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एनएसजी, एनआईए, आरपीएफ, एनडीआरएफ, एनएचआरसी, असम राइफल (थ्रू एलओएआर), फायर सर्विस, बीपीआरएंडडी, सचिव रॉ, एससी/एसटी आयोग, सचिव लोकसभा/राज्यसभा सचिवालय और सभी केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों (रक्षा मंत्रालय को छोड़कर), को भी उक्त पत्र प्रेषित किया गया। इसमें गणतंत्र दिवस 2025 के मद्देनजर, केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा विशिष्ट सेवा का राष्ट्रपति पदक / सराहनीय सेवा का राष्ट्रपति पदक के लिए ऑनलाइन नोमिनेशन मांगे गए थे। कई राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों व सीएपीएफ/सीपीओ से तय तिथि तक ये आवेदन प्राप्त नहीं हुए थे। बाद में इन आवेदनों के पहुंचने की अंतिम तिथि 31 अक्तूबर रखी गई थी।
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पीएसएम और एमएसएम के लिए जिस अधिकारी के नाम की सिफारिश की गई है, उसके बारे में दो सौ शब्दों का हवाला/अनुलेखन देना होगा। पत्र में यह भी कहा गया था कि सीएपीएफ/सीपीओ अपनी सिफारिशें, सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भेज सकते हैं। उक्त अवार्ड के लिए कई तरह के नियम तय किए गए हैं। इनमें विजिलेंस क्लीयरेंस और पिछले दस वर्ष की एपीएआर का होना भी अनिवार्य किया गया है। होमगार्ड और सिविल डिफेंस वालंटियर के मामले में एपीएआर लिखने का प्रावधान नहीं था।
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विशिष्ट सेवा का राष्ट्रपति पदक और सराहनीय सेवा का राष्ट्रपति पदक की सिफारिशों के लिए एक प्रोफार्मा तैयार किया गया है। इसे सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, सुरक्षा संगठन/एजेंसियां, केंद्रीय मंत्रालय/विभाग, सीएपीएफ/सीपीओ, जेल विभाग, सिविल डिफेंस एवं फायर सर्विसेज को भेजा गया था।
इसमें कई बातों की जानकारी मांगी गई थी। जैसे आवेदक का नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि, जेंडर और जाति का विवरण पूछा गया था। प्रोफार्मा के छठे कॉलम में लिखा था कि आवेदक अनुसूचित जाति से है, अनुसूचित जनजाति से है, ओबीसी वर्ग से है या सामान्य वर्ग से आता है। आवेदक की नियुक्ति के बारे में भी जानकारी मांगी गई थी।
इनके अलावा संबंधित आवेदक की कुल सेवा, वर्तमान पोस्टिंग, प्रतिनियुक्ति का विवरण, पहले कोई अवार्ड मिला है तो उसमें कितनी राशि दी गई, आदि सूचना भी देनी होगी। सेवाकाल के दौरान कोई सजा, मेडिकल श्रेणी, कोई पेंडिंग जांच व एपीएआर की पिछले दस वर्ष की रेटिंग, यह जानकारी भी मांगी गई थी। सिविल डिफेंस और होमगार्ड वालंटियर की वर्क परफोरमेंस रिपोर्ट के लिए जो प्रोफार्मा तैयार किया गया है, उसमें जॉब नॉलेज, क्वालिटी ऑफ वर्क, सेंस ऑफ रेस्पॉंसबिलिटी, मोटिवेशन फॉर वालंटियरिंग और प्रेरणा स्त्रोत आदि की जानकारी के कॉलम तैयार किए गए थे।