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सीपीसीबी ने चेताया, दिल्ली में बढ़ेगा प्रदूषण, सितंबर से मौसम की स्थिति बेहद प्रतिकूल

Fri, 16 Oct 2020 05:27 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 16 Oct 2020 05:27 PM IST
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meteorological conditions in Delhi have been extremely unfavourable for dispersion of pollutants since this September
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई (फाइल)

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने शुक्रवार को कहा कि इस साल सितंबर में दिल्ली में मौसम संबंधी स्थिति पिछले साल सितंबर की तुलना में प्रदूषकों के फैलाव के लिए बेहद प्रतिकूल है। बोर्ड ने कहा कि यह प्रदूषण की उच्च दर का संकेत है। सीपीसीबी के सदस्य सचिव प्रशांत गार्गव ने कहा कि एक सितंबर से 14 अक्तूबर के बीच पीएम10 की सांद्रता पिछले साल इसी अवधि की तुलना में अधिक है। 

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प्रशांत गार्गव ने कहा कि इस संबंध में किया गया एक विश्लेषण बताता है कि साल 2019 में एक सितंबर से 14 अक्तूबर के बीच सात दिन बरसात हुई, जिसमें संचयी बारिश 121 मिलीमीटर हुई। जबकि इस साल इसी अवधि में 21 मिलीमीटर संचयी बरसात के साथ केवल तीन दिन बारिश हुई। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में इस वर्ष सितंबर और अक्तूबर में मौसम की स्थिति बेहद प्रतिकूल रही है।
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सीपीसीबी सचिव ने कहा कि इस साल  सितंबर और अक्तूबर में औसत वेंटिलेशन इंडेक्स 1334 वर्ग मीटर प्रति सेकेंड रही है। यह पिछले साल इसी अवधि में 1850 वर्ग मीटर प्रति सेकेंड रही थी। बता दें कि वेंटिलेशन इंडेक्स वह गति है जिसपर प्रदूषक फैल सकते हैं। 10 किमी प्रति घंटे से कम हवा की रफ्तार पर 6000 वर्ग मीटर प्रति सेकेंड से कम का वेंटिलेशन इंडेक्स प्रदूषकों के फैलाव के प्रतिकूल रहता है।

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दिल्ली में प्रदूषण के लिए आप सरकार जिम्मेदार :आदेश गुप्ता

दिल्ली भाजपा प्रमुख आदेश गुप्ता ने शुक्रवार को दावा किया कि पराली जलाए जाने से दिल्ली में सिर्फ पांच फीसदी, जबकि स्थानीय कारणों से 95 फीसदी प्रदूषण होता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए आम आदमी पार्टी सरकार जिम्मेदार है। गुप्ता ने कहा कि शहर में भाजपा शासित नगर निगम वायु प्रदूषण से अग्रिम मोर्चे पर मुकाबला कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार सिर्फ प्रचार में व्यस्त है।

प्रदूषण हॉटस्पॉट पर नजर रखने के लिए सीपीसीबी की 50 टीमें तैनात

इससे पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गुरुवार को दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के मौसम में सर्वाधिक प्रदूषित स्थलों (हॉटस्पॉट) पर नजर रखने के लिए सीपीसीबी की 50 टीमें तैनात की थीं। इसके साथ ही उन्होंने पंजाब सरकार से पराली जलाने पर रोक लगाने की भी अपील की थी। हालांकि उन्होंने कहा था कि दिल्ली-एनसीआर में वायू प्रदूषण के लिए पराली जलाया जाना बड़ा कारण नहीं है।

केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने कहा था कि केवल चार प्रतिशत प्रदूषण पराली जलाने के कारण है। इसके अलावा 96 प्रतिशत प्रदूषण बायोमास जलाने, कूड़ा करकट फेंकने, कच्ची सड़कों, धूल, निर्माण कार्य और तोड़-फोड़ संबंधी गतिविधियों इत्यादि के कारण है। बाद में उन्होंने एक ट्वीट कर स्पष्ट किया था कि उनके कहने का आशय यह था कि इस सप्ताह प्रदूषण में चार प्रतिशत हिस्सा पराली जलाने का रहा।
 
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