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Supreme Court News: चोरी का सामान रखना ही अपराध नहीं, साबित भी करना होगा
Wed, 07 Sep 2022 09:21 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 07 Sep 2022 09:21 PM IST
सार
पीठ ने आईपीसी की धारा 411 के बारे में विस्तार से बताया जो चोरी की संपत्ति बेईमानी से प्राप्त करने के अपराध से किस तरह संबंधित है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि केवल चोरी के सामान को अपने पास रखना अपराध तय करने के लिए पर्याप्त नहीं है और अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि आरोपी को यह जानकारी थी कि यह चोरी की संपत्ति है। न्यायमूर्ति के एम जोसेफ और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ ने आईपीसी के तहत बेईमानी से चोरी की संपत्ति प्राप्त करने के अपराध के लिए शिव कुमार नाम के एक व्यक्ति को दो साल की जेल की सजा और 1,000 रुपये के जुर्माने को खारिज कर दिया। पीठ ने आईपीसी की धारा 411 के बारे में विस्तार से बताया जो चोरी की संपत्ति बेईमानी से प्राप्त करने के अपराध से किस तरह संबंधित है।
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अदालत ने कहा कि सफल अभियोजन के लिए यह साबित करना पर्याप्त नहीं है कि आरोपी या तो लापरवाह था या उसके पास यह सोचने का कोई कारण था कि संपत्ति चोरी की है, या कि वह इस खरीदे गए सामान के बारे में पर्याप्त पूछताछ करने में विफल रहा। विचाराधीन सामान पर कब्जा अवैध नहीं हो सकता है, लेकिन यह जानते हुए कि यह चोरी की संपत्ति थी, इसे दोषी बनाता है। मामले के तथ्यों का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि जब हमने कानून की नजर से मामले को देखा तो पाया कि अभियोजन पक्ष यह स्थापित करने में विफल रहा है कि दोषी को इस बात की जानकारी थी कि उसके कब्जे से जब्त किया गया सामान चोरी का माल है।
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बंधुआ मजदूरी के बहाने एक रैकेट चल रहा
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि देश में कोई बंधुआ मजदूर नहीं है और बंधुआ मजदूरी के बहाने एक रैकेट चल रहा है। न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने एक महिला कार्यकर्ता की ओर से दिवंगत सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। इस मामले में एक ईंट भट्टा ठेकेदार ने जम्मू के आरएस पुरा में एक महिला से लगातार दुष्कर्म किया था। पीठ ने कहा, क्या आप जानते हैं कि बंधुआ मजदूर कौन हैं? वे बंधुआ नहीं हैं। वे पैसे लेते हैं और वहां जाते हैं और ईंट भट्टों से जुड़े होते हैं। वे पिछड़े इलाकों से आते हैं। वे पैसे लेते हैं और पैसे खाते हैं और फिर चले जाते हैं। यह एक रैकेट है। ये मजदूर केवल इस बंधुआ मजदूर की बात का फायदा उठाते हैं।