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Waqf Bill: वक्फ संशोधन बिल पर संसदीय समिति की हुई पहली बैठक, सदस्यों ने विधेयक के प्रावधानों पर उठाए सवाल
Thu, 22 Aug 2024 07:06 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Thu, 22 Aug 2024 07:06 PM IST
सार
गुरुवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संसद की संयुक्त समिति ने पहली बैठक आयोजित की। इस दौरान केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने एक प्रस्तुति दी। वहीं विपक्षी सांसदों ने प्रस्तावित कानून के कई प्रावधानों पर आपत्ति जताई है।
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वक्फ संशोधन बिल पर संसदीय समिति की हुई पहली बैठक
- फोटो : ANI
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विस्तार
वक्फ (संशोधन) विधेयक पर विचार के लिए गठित संसद की संयुक्त समिति ने बृहस्पतिवार को मैराथन बैठक की जिसमें कई विपक्षी सांसदों ने इस प्रस्तावित कानून के कई प्रावधानों को लेकर आपत्ति जताई। समिति की इस पहली बैठक के दौरान अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की ओर से एक प्रस्तुति दी गई। सूत्रों ने बताया कि भाजपा के सांसदों ने विधेयक में संशोधनों-खासकर महिलाओं को सशक्त बनाने संबंधी प्रावधान की सराहना की। इस बैठक के दौरान कई बार तीखी बहस हुई लेकिन कई दलों के सदस्यों ने कई घंटे तक बैठकर विधेयक के प्रावधानों पर अपने विचार दर्ज कराए, सुझाव दिए और स्पष्टीकरण मांगा।
समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने बैठक को बताया सार्थक
पत्रकारों से बातचीत में समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने बैठक को सार्थक बताया। वहीं समिति के एक सदस्य ने दावा किया कि यह हाल के दिनों में किसी संसदीय समिति की तरफ से आयोजित सबसे लंबी बैठकों में से एक थी। सूत्रों का कहना है कि समिति की अगली बैठक 30 अगस्त को होगी और समिति कई राज्य वक्फ इकाइयों के विचार भी सुन सकती है।
समिति के कुछ सदस्यों ने कहा कि अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय बैठक में उठाए गए प्रश्नों का समाधान करने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं था और जो प्रस्तुति दी गई वह आशा के अनुरूप नहीं थी। समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने सदस्यों को आश्वासन दिया कि समिति कई मुस्लिम संगठनों समेत सभी हितधारकों से बात करेगी। सूत्रों के अनुसार, भाजपा की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने कहा कि मुस्लिम समुदाय की चिंताओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए और उन्हें व्यापक विचार-विमर्श के लिए बुलाया जाना चाहिए। भाजपा की प्रमुख सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) ने भी व्यापक विचार-विमर्श करने की पैरवी की।
इन दलों के सदस्यों ने बैठक में लिया हिस्सा
बैठक में भाग लेने वाले सदस्यों में भाजपा के संजय जायसवाल, अपराजिता सारंगी, तेजस्वी सूर्या, दिलीप सैकिया और गुलाम अली शामिल थे। वहीं, कांग्रेस पार्टी के गौरव गोगोई और नासिर हुसैन, तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी, वाईएसआर कांग्रेस के वी. विजयसाई रेड्डी, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के असदुद्दीन ओवैसी, द्रमुक के ए राजा, लोजपा (रामविलास) के अरुण भारती और तेदेपा के लावु श्रीकृष्ण देवरायलू शामिल थे।
कई विपक्षी सदस्यों ने विधेयक के ऐसे खंडों और उनके औचित्य पर सवाल उठाया, जिनमें विवादित संपत्ति के स्वामित्व पर निर्णय लेने में जिलाधिकारियों को सशक्त बनाने और वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान भी शामिल है।
बैठक के बाद समिति के सदस्यों की प्रतिक्रिया
वाईएसआर कांग्रेस के सांसद रेड्डी ने बाद में एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने कई हितधारकों की तरफ से व्यक्त की गई चिंताओं के कारण विधेयक का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक अपने मौजूदा स्वरूप में स्वीकार्य नहीं है और वह अपना असहमति नोट समिति को सौंपेंगे। सूत्रों ने कहा कि ओवैसी ने प्रस्तावित कानून की तीखी आलोचना की और दावा किया कि अगर यह लागू हुआ तो सामाजिक अस्थिरता पैदा होगी। वहीं कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने उम्मीद जताई कि समिति सभी दृष्टिकोणों पर विचार करेगी और सुनिश्चित करेगी कि संवैधानिक मूल्यों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अतिक्रमण न हो।
जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में हुई बैठक
बता दें कि भाजपा सदस्य जगदंबिका पाल की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय समिति को लोकसभा से विवादास्पद विधेयक की जांच करने का काम सौंपा गया है। विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने इस पर विरोध जताया है। यह विधेयक भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की पहली बड़ी पहल है जिसका उद्देश्य एक केंद्रीकृत पोर्टल के माध्यम से वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की प्रक्रिया में सुधार करना है। इसमें कई सुधारों का प्रस्ताव है, जिसमें राज्य वक्फ बोर्डों के साथ-साथ मुस्लिम महिलाओं और गैर-मुस्लिम प्रतिनिधियों को प्रतिनिधित्व देने वाली एक केंद्रीय वक्फ परिषद की स्थापना भी शामिल है।
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समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने बैठक को बताया सार्थक
पत्रकारों से बातचीत में समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने बैठक को सार्थक बताया। वहीं समिति के एक सदस्य ने दावा किया कि यह हाल के दिनों में किसी संसदीय समिति की तरफ से आयोजित सबसे लंबी बैठकों में से एक थी। सूत्रों का कहना है कि समिति की अगली बैठक 30 अगस्त को होगी और समिति कई राज्य वक्फ इकाइयों के विचार भी सुन सकती है।
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#WATCH दिल्ली में वक्फ (संशोधन) विधेयक पर भाजपा नेता जगदम्बिका पाल की अध्यक्षता में संयुक्त संसदीय समिति की बैठक संपन्न हुई। pic.twitter.com/WLvtllRCkU
विज्ञापन विज्ञापन— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 22, 2024
समिति के कुछ सदस्यों ने कहा कि अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय बैठक में उठाए गए प्रश्नों का समाधान करने के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं था और जो प्रस्तुति दी गई वह आशा के अनुरूप नहीं थी। समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने सदस्यों को आश्वासन दिया कि समिति कई मुस्लिम संगठनों समेत सभी हितधारकों से बात करेगी। सूत्रों के अनुसार, भाजपा की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने कहा कि मुस्लिम समुदाय की चिंताओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए और उन्हें व्यापक विचार-विमर्श के लिए बुलाया जाना चाहिए। भाजपा की प्रमुख सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) ने भी व्यापक विचार-विमर्श करने की पैरवी की।
इन दलों के सदस्यों ने बैठक में लिया हिस्सा
बैठक में भाग लेने वाले सदस्यों में भाजपा के संजय जायसवाल, अपराजिता सारंगी, तेजस्वी सूर्या, दिलीप सैकिया और गुलाम अली शामिल थे। वहीं, कांग्रेस पार्टी के गौरव गोगोई और नासिर हुसैन, तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी, वाईएसआर कांग्रेस के वी. विजयसाई रेड्डी, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के असदुद्दीन ओवैसी, द्रमुक के ए राजा, लोजपा (रामविलास) के अरुण भारती और तेदेपा के लावु श्रीकृष्ण देवरायलू शामिल थे।
कई विपक्षी सदस्यों ने विधेयक के ऐसे खंडों और उनके औचित्य पर सवाल उठाया, जिनमें विवादित संपत्ति के स्वामित्व पर निर्णय लेने में जिलाधिकारियों को सशक्त बनाने और वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान भी शामिल है।
बैठक के बाद समिति के सदस्यों की प्रतिक्रिया
वाईएसआर कांग्रेस के सांसद रेड्डी ने बाद में एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने कई हितधारकों की तरफ से व्यक्त की गई चिंताओं के कारण विधेयक का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक अपने मौजूदा स्वरूप में स्वीकार्य नहीं है और वह अपना असहमति नोट समिति को सौंपेंगे। सूत्रों ने कहा कि ओवैसी ने प्रस्तावित कानून की तीखी आलोचना की और दावा किया कि अगर यह लागू हुआ तो सामाजिक अस्थिरता पैदा होगी। वहीं कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने उम्मीद जताई कि समिति सभी दृष्टिकोणों पर विचार करेगी और सुनिश्चित करेगी कि संवैधानिक मूल्यों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अतिक्रमण न हो।
जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में हुई बैठक
बता दें कि भाजपा सदस्य जगदंबिका पाल की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय समिति को लोकसभा से विवादास्पद विधेयक की जांच करने का काम सौंपा गया है। विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने इस पर विरोध जताया है। यह विधेयक भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की पहली बड़ी पहल है जिसका उद्देश्य एक केंद्रीकृत पोर्टल के माध्यम से वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण की प्रक्रिया में सुधार करना है। इसमें कई सुधारों का प्रस्ताव है, जिसमें राज्य वक्फ बोर्डों के साथ-साथ मुस्लिम महिलाओं और गैर-मुस्लिम प्रतिनिधियों को प्रतिनिधित्व देने वाली एक केंद्रीय वक्फ परिषद की स्थापना भी शामिल है।