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स्मृति शेष: भारत-ब्रिटेन संबंधों को प्रगाढ़ बनाने में मेघनाद की थी अहम भूमिका; पीएम मोदी ने निधन पर जताया शोक

Wed, 30 Jul 2025 05:44 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: शिव शुक्ला Updated Wed, 30 Jul 2025 05:44 AM IST
सार

देसाई लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर थे। 1992 में देसाई ने इस प्रतिष्ठित संस्थान में वैश्विक शासन अध्ययन केंद्र की स्थापना की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर शोक जताया है।

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Meghnad Desai play important role in strengthening India-UK relation; PM Modi expresses grief over his demise
हाउस ऑफ लार्ड्स के पूर्व सदस्य लाॅर्ड मेघनाद देसाई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत और भारतीय संस्कृति से गहरा जुड़ाव रखने वाले मेघनाद देसाई का  85 वर्ष की आयु में निधन देश के लिए अपूरणीय क्षति है। गुजरात के वडोदरा में जन्मे मेघनाद देसाई अपनी बहुमुखी प्रतिभा के कारण भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित होने के साथ-साथ ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य भी रहे। आर्थिक मामलों में विशेषज्ञता के साथ उन्हें राजनीति की भी गहरी समझ थी। उन्होंने भारत-ब्रिटेन संबंधों को प्रगाढ़ बनाने में अहम भूमिका निभाई।

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देसाई लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर थे। 1992 में देसाई ने इस प्रतिष्ठित संस्थान में वैश्विक शासन अध्ययन केंद्र की स्थापना की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर शोक जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, प्रतिष्ठित विचारक, लेखक और अर्थशास्त्री मेघनाद देसाई जी के निधन से व्यथित हूं। वे सदैव भारत और भारतीय संस्कृति से जुड़े रहे। हम अपनी बहुमूल्य अंतर्दृष्टि साझा करते हुए हुई हमारी चर्चाओं को याद करेंगे। पीएम ने देसाई के परिवार और मित्रों के प्रति संवेदना जताई।  बता दें, देसाई लंदन में रहते हुए भी भारत की संस्कृति और अर्थनीति के बारे में लगातार सोचते और लिखते रहे।
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कई किताबें लिखीं, लेबर पार्टी के सदस्य रहे
मेघनाद देसाई ने कई चर्चित किताबें लिखीं। इनमेंं मार्क्सियन इकोनॉमिक थ्योरी, मार्क्स रिवेंज: द रिसर्जेंस ऑफ कैपिटलिज्म एंड द डेथ ऑफ स्टेटिस्ट सोशलिज्म, द रीडिस्कवरी ऑफ इंडिया, 'नेहरूज हीरो दिलीप कुमार' हू रोट द भगवदगीता शामिल हैं। उन्होंने 200 से ज्यादा अकादमिक लेख भी लिखे। उनकी किताब मार्क्सियन इकोनॉमिक थ्योरी' मार्क्सवादी अर्थशास्त्र को समझने में मदद करती है। मार्क्स रिवेंज: द रिसर्जेंस ऑफ कैपिटलिज्म एंड द डेथ ऑफ स्टेटिस्ट सोशलिज्म में उन्होंने बताया कि कैसे पूंजीवाद फिर से उभरा।  
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देसाई ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में 1965 से 2003 तक पढ़ाया। ब्रिटेन के शैक्षणिक और राजनीतिक क्षेत्रों में बहुत प्रभाव रखने वाले देसाई ब्रिटेन के लेबर पार्टी के सदस्य रहे। 1986 से लेकर 1992 तक चेयरमैन भी रहे। पार्टी के पूर्व नेता जेरेमी कॉर्बिन की वापस होने पर नवंबर 2020 में पार्टी छोड़ दी। करीब 49 साल की सियासी पारी रही।        

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