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लोगों में भय : छिन न जाए भारतीयता की पहचान, मेघालय के गांव पर मंडरा रहा खतरा

Wed, 12 Jan 2022 06:23 AM IST
योगेश साहू एजेंसी, लिंगखोंग (मेघालय)।
एजेंसी, लिंगखोंग (मेघालय)। Published by: योगेश साहू Updated Wed, 12 Jan 2022 06:23 AM IST
सार

बीएसएफ मेघालय फ्रंटियर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया समझौते के अनुसार, जीरो लाइन से कम से कम 150 गज की दूरी पर बाड़ लगाई जाती है लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता।

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Meghalaya village peolple feared for loose Indian identity, work of fencing along the border with Bangladesh reached in final stage
meghalaya - फोटो : meghalaya

विस्तार

भारत-बांग्लादेश सीमा पर जीरो लाइन के पास स्थित लिंगखोंग गांव के करीब 90 निवासी देश के अन्य हिस्सों से कट जाने के भय के साथ जी रहे हैं। यहां, भारत की सीमा के भीतर 150 गज की दूरी तक, बाड़ लगाने का काम पूरा होने वाला है।

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पहचान के संकट के भय से सहमे बड़े-बूढ़े ने रविवार को अपना दर्द साझा किया। पूर्वी खासी पर्वतीय जिले में लिंगखोंग गांव के पास, एकल बाड़ की नींव रख दी गई है, लेकिन निवासियों के विरोध के चलते इस कार्य को रोक दिया गया है। हालांकि, अधिकारी अब तक इस बात पर सहमत नहीं हुए हैं कि बाड़ नहीं लगाई जाएगी या इसे जीरो लाइन पर ही लगाया जाएगा। 
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गांव की एक बुजुर्ग महिला बार्निंग खोंग्सडीर ने कहा, यह ठीक नहीं है कि बाड़ लगने के बाद हमारा गांव भारत के क्षेत्र से बाहर हो जाएगा। हम सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। हम यहां जमाने से रह रहे हैं। सरकार को हमारी सुरक्षा और कुशलता के लिए कुछ करना चाहिए। बार्निंग का घर जीरो लाइन और उन्हें और बांग्लादेश में रहने वालों को अलग करने वाले सीमा स्तंभ से बमुश्किल कुछ फुट की दूरी पर है। 
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हालांकि, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का एक शिविर लिंगखोंग में स्थित है। गौरतलब है कि मेघालय में भारत-बांग्लादेश सीमा पर करीब 80 फीसदी हिस्से में बाड़ लगाई जा चुकी है। कुछ हिस्सा बाकी है जहां पर या तो निवासियों के विरोध के कारण, बांग्लादेश के बॉर्डर गॉर्ड्स के विरोध के कारण या फिर भौगोलिक स्थिति की वजह से बाड़ नहीं लगाई जा सकी है।

सुरक्षा के लिए बाड़ जरूरी मगर जीरो लाइन पर लगे
बार्निंग ने कहा कि राष्ट्र विरोधी तत्व आन जाने के लिए इस आसान सीमा का फायदा उठाते हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के लिहाज से सभी चाहते हैं कि बाड़ जल्द से जल्द लग जाए, लेकिन जीरो-लाइन पर लगे। उन्होंने कहा कि अस्थायी रूप से, गांव ने महामारी के मद्देनजर पिछले साल से खुद को बांग्लादेश से अलग करने के लिए बांस और छोटी टहनियों से बनी बाड़ लगाई है।

जीरो लाइन से 150 गज की दूरी पर लगाई जाती है बाड़
बीएसएफ मेघालय फ्रंटियर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया समझौते के अनुसार, जीरो लाइन से कम से कम 150 गज की दूरी पर बाड़ लगाई जाती है लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। बांग्लादेश के बॉर्डर गार्ड कुछ मामलों में जीरो लाइन के पास ही बाड़ लगाने के लिए सहमत हो जाते हैं।

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