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Youth Fest: 21वीं सदी के अर्जुनों के लिए ‘मेगा यूथ फेस्ट’ का आयोजन; एक हजार से ज्यादा युवाओं ने लिया हिस्सा

Mon, 01 Jul 2024 02:01 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता महतो Updated Mon, 01 Jul 2024 02:01 PM IST
सार

कार्यक्रम की मुख्य इंचार्ज साध्वी तपेश्वरी भारती ने युवाओं की स्थिति को चित्रित करते हुए कहा कि आज का युवा, ‘ये दिल मांगे मोर’ का राग अलापते हुए धड़ले से सोशल मीडिया पर रील्स और ओटीटी पर वेब सीरीज देखने में लगा हुआ है।

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Mega Youth Fest organized by the Peace Program of Divya Jyoti Jagrati Sansthan news in hindi
यूथ फेस्ट - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

दिल्ली में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के पीस प्रोग्राम द्वारा रविवार को ‘मेगा यूथ फेस्ट’ का आयोजन किया गया। ‘उठ पार्थ, युद्ध कर’ नामक इस फेस्ट में स्टैंड-अप कॉमेडी, नृत्य-नाटकोंऔर प्रेरक वार्ताओं को लाईव देखने-सुनने के लिए लगभग एक हजार युवा मानेक शॉ ऑडिटोरियम में एकत्रित हुए। इसके साथ ही दिल्ली के कई शैक्षिक संस्थानों के उप-कुलपति, डीन, एच.ओ.डी भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे और गेस्ट वक्ता के तौर पर अवध ओझा सर तथा जाह्नवी पंवर ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज की। फेस्ट के विभिन्न सत्रों का आयोजन आशुतोष महाराज की साध्वी शिष्याओं द्वारा किया गया।
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पीसप्रोग्राम की सह-इन्चार्ज, साध्वी डॉ. निधि भारती ने बताया कि आज युवा करियर और नौकरी की दौड़ से मिलने वाली थकान वतनाव से छुटकारा पाने के लिए रील्स, वेबसीरीज और ऑनलाइनगेम्स का सहारा लेने लगा है। जो असल में उसके तनाव को कम करने की बजाय उसे अवसाद में ज्यादा डाल रही है। ऐसा इंस्टेंट मजा पाने के चक्कर में वह फिर इन्हीं रील्स एवं वेबसीरीज से प्रेरित होकर इंस्टेंट लव रिलेशन भी बनाने लग जाता है। युवाओं की इस ‘क्या फर्क पड़ता है’ वाली सोच को साध्वी ने ठोस तर्कों एवं वैज्ञानिक तथ्यों द्वारा सिरे से खारिज किया और यह सिद्ध किया की असल में इन सबसे युवा की मानसिकता और व्यक्तित्व पर ही नहीं, बल्कि उसकी पूरी जिंदगी पर गहरा फर्क पड़ता हैं।
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कार्यक्रम के अगले सत्र में भारतीय इतिहास में दर्ज सच्ची प्रेम गाथाओं पर आधारित एक संगीतमय प्रस्तुति हुई। इस सत्र की मुख्य वक्ता साध्वी मणिमाला भारती ने कहा कि इंस्टेंट लव, हुक-अप्स और ब्रेकअप्स वाले रिश्तों का ट्रेंड पाश्चात्य जगत से अपनाया गया है, क्योंकि भारत की संस्कृति ने तो हमेशा से त्याग, समर्पण, विश्वास और पवित्रता जैसे मूल्यों पर आधारित सच्चे-प्रेम का पाठ ही विश्व को पढ़ाया है। साध्वी ने रानी पद्मावती और रतन सिंह की प्रेम कहानी को सुनाया।
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आगे इस कार्यक्रम की मुख्य इंचार्ज साध्वी तपेश्वरी भारती ने युवाओं की स्थिति को चित्रित करते हुए कहा कि आज का युवा, ‘ये दिल मांगे मोर’ का राग अलापते हुए धड़ले से सोशल मीडिया पर रील्स और ओटीटी पर वेब सीरीज देखने में लगा हुआ है। इस पर भी स्थिति बद-से-बदतर दिखाई तब देने लगती है, जब युवा इन्हीं प्लेटफार्म्स पर पोर्न और अश्लील कंटेंट देखने में अधिक रूचि लेता नजर आने लगता है। 

लत के संदर्भ में साध्वी जी ने अपने आध्यात्मिक गुरु आशुतोष महाराज जी के वचनों को रेखांकित करते हुए कहा कि जब व्यक्ति सिगरेट के धुंए का पहला छर्रा उड़ाता है, तब साथ में खूब जोर से खांसता भी है। उसकी अंतर्चेतना उसे आगाह करती है कि यह उसके लिए हानिकारक है। पर क्या इस अनुभव को लेने के बाद भी वो धुम्रपान करना छोड़ देता है? नहीं! ठीक यही होता है जब वो शराब के जाम अपने अंदर उतारता है- वमन करना, खुद से नियंत्रण खो देना, नशे की हालत में गलत काम कर जाना। इन खराब अनुभवों के बावजूद भी क्या वो शराब से दूरी बना लेता है? नहीं! क्योंकि, इन व्यसनों का संग करने का एक ही परिणाम होता है– दूरी नहीं; मजबूरी। यह इंसान की मजबूरी बनकर उसे तबाही की कगार तक ले जाते है। 

पहले गेस्ट वक्ता थे–सिविल परीक्षा के मशहूर टीचर,अवध ओझा सर। उन्होनें कहा,‘मेरा मानना है कि आज के युवाओं में जितनी भी लतें है, उनके पीछे एक बुनियादी इकाई है- वह है उनका मन और इस चंचल मन को काबू में करने का एकमात्र तरीका भारतीय परम्परा में निहित ध्यान की प्रक्रिया ही है।’


दूसरी गेस्ट वक्ता थी भारत की वंडर गर्ल- जाह्नवी पंवर। सबसे पहले जाह्नवी ने हरियाणवीं और अंग्रेजी लहजे में एक अनोखी जुगलबंदी प्रस्तुत की। इसके साथ अपने 20 साल के छोटे जीवन में इतने बड़े मुकाम को हासिल करने के पीछे किये गए संघर्ष की यात्रा कोभी उन्होनें सबसे सांझा किया। और बताया कि किस तरह से वह अपने लक्ष्य को पाने के लिए अनगिनत दिनों तक डटी रही।
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