AIIMS में लगी आग में जली छात्रों की मेहनत, कई जरूरी शोधपत्र भी हुए खाक
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राजधानी के एम्स अस्पताल ने अब पूरी तरह सामान्य रुप से कामकाज करना शुरु कर दिया है। शनिवार को आग लगने के बाद अस्पताल में अफरा-तफरी फैल गई थी और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई थीं। कई विभाग के मरीजों को दूसरी जगहों पर शिफ्ट करना पड़ा था। अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के कुछ हिस्से को नुकसान पहुंचा है, जिसे ठीक करने के लिए प्रशासन ने जरुरी कदम उठाए हैं।
आग लगने के सटीक कारणों की पहचान नहीं
सोमवार को भी अस्पताल प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों की बैठक हुई और बिल्डिंग को पहुंचे नुकसान को ठीक करने से संबंधित फैसले लिए गए। हालांकि मिली जानकारी के मुताबिक अभी तक अस्पताल में आग लगने के सटीक कारणों की पहचान नहीं हो सकी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि माइक्रोबायोलोजी विभाग में किसी तरह की तकनीकी गड़बड़ी होने के बाद आग लग गई, जो बाद में दूसरी जगहों में भी फैल गई।
अस्पताल प्रशासन का दावा है कि उसके पास आग से निबटने की पर्याप्त इंतजाम थे और यही कारण है कि इतनी आग लगने के बाद भी जान-माल का नुकसान नहीं होने पाया और समय रहते सभी मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया।
छात्रों को नुकसान की आशंका
आग लगने वाले ब्लॉक में मेडिकल छात्रों की पढ़ाई से जुड़ी गतिविधियां चलती थीं। माइक्रोबायोलोजी विभाग के छात्रों के रिसर्च से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण रिसर्च और टेस्ट प्रभावित क्षेत्र में ही थे। आशंका है कि छात्रों के रिसर्च से जुड़े जरूरी कागजात और टेस्ट सामग्री इस आग में नष्ट हो गई है। अस्पताल ने आगामी होने वाले कुछ टेस्ट को आगे के लिए टाल दिया गया है।
अरुण जेटली की हालत गंभीर
आग लगने वाली जगह से कुछ ही दूर पर कार्डियो-न्यूरो सेंटर में भाजपा नेता अरुण जेटली का भी इलाज चल रहा है। वे काफी गंभीर हालत में बताए जाते हैं। एक शीर्ष नेता के अस्पताल में मौजूद होने के बीच आग लगने जैसी घटना को प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है और इस तरह की कोई घटना दुबारा न हो, इसके लिए पर्याप्त कदम उठाने संबंधित निर्देश दिये हैं। वहीं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने भी अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों से मिलकर हालात का जायजा लिया है।