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भारत-कनाडा राजनयिक विवाद: 'समानता के लिए हमने सही कदम उठाए', विदेश मंत्रालय ने जारी किया बयान
Fri, 20 Oct 2023 03:54 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Fri, 20 Oct 2023 03:54 PM IST
सार
विदेश मंत्रालय ने कहा, नई दिल्ली और ओटावा में आपसी राजनयिक उपस्थिति में समानता की गारंटी है। इसे लागू करने के लिए हम लगातार कनाडा के साथ जुड़े रहे। हमारे द्वारा समानता को लागू करने के लिए उठाए गए सभी कदम सही हैं।
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MEA spokesperson Arindam Bagchi
विस्तार
भारत और कनाडा के बीच विवाद थम नहीं रहा है। खालिस्तानी आतंकवादी निज्जर की हत्या में भारतीय खुफिया एजेंसियों के शामिल होने के आरोप के बाद से ही भारत-कनाडा के बीच राजनयिक रिश्तों में दारा पड़ गई है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच भारत ने कनाडा के आरोपों को बेबुनियाद बताया। साथ ही भारत ने कनाडा पर कई कठोर प्रतिबंध लगा दिए। भारत ने तय मानको से ज्यादा देश में कनाडाई राजनयिक उपस्थिति पर सवाल खड़े करते हुए उन्हें संख्या घटाने की चेतावनी दी थी। जिसके बाद से ही दोनों देशों में दरार ज्यादा बढ़ गई।
विदेश मंत्रालय ने जारी किया बयान
शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मामले पर बयान जारी किया। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया, 'हमने भारत में कनाडाई राजनयिक उपस्थिति के संबंध में कनाडा सरकार का गुरुवार को दिए गए बयान के देखा। भारत में कनाडाई राजनयिकों की बहुत अधिक संख्या है,यहां तक कि हमारे देश के आंतरिक मामलों में हमेशा से उनका हस्तक्षेप रहा है। नई दिल्ली और ओटावा में आपसी राजनयिक उपस्थिति में समानता की गारंटी है। इसे लागू करने के लिए हम लगातार कनाडा के साथ जुड़े रहे। हमारे द्वारा समानता को लागू करने के लिए उठाए गए सभी कदम सही हैं
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में वियना कन्वेंशन का अनुच्छेद 11.1 का भी जिक्र किया गया। अनुच्छेद का जिक्र करते हुए कहा, 'मिशन के आकार के बारे में विशिष्ट समझौते की अनुपस्थिति में प्राप्तकर्ता राज्य को यह आवश्यकता हो सकती है कि राजनयिकों का आकार उसके द्वारा मानी जाने वाली सीमा के भीतर रखा जाए। प्राप्तकर्ता राज्य की परिस्थितियों शर्तों तथा विशेष मिशन की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उचित और सामान्य है'। वहीं विदेश मंत्रालय ने सख्त लहजे में कहा कि हम पूरी तरह से कनाडा द्वारा लगाए गए आरोपों को अस्वीकार करते हैं।
सूत्रों की माने तो बेंगलुरु, मुम्बई और चंडीगढ़ में उनके वाणिज्य दूतावासों में कनाडाई राजनयिक ताकत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। भारत में अपने तीन वाणिज्य दूतावासों का संचालन बंद करने का कनाडा का निर्णय एकतरफा है। इसका समानता के कार्यान्वयन से कोई संबंध नहीं है।
कनाडा के विदेश मंत्री ने क्या दिया था बयान?
कनाडाई विदेश मंत्री मेलानी जोली ने कहा था कि कनाडा के 41 राजनयिकों को मिली छूट वापस लेने की भारत की चेतावनी के बाद कनाडा ने इन राजनयिकों को भारत से वापस बुला लिया है।
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विदेश मंत्रालय ने जारी किया बयान
शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मामले पर बयान जारी किया। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया, 'हमने भारत में कनाडाई राजनयिक उपस्थिति के संबंध में कनाडा सरकार का गुरुवार को दिए गए बयान के देखा। भारत में कनाडाई राजनयिकों की बहुत अधिक संख्या है,यहां तक कि हमारे देश के आंतरिक मामलों में हमेशा से उनका हस्तक्षेप रहा है। नई दिल्ली और ओटावा में आपसी राजनयिक उपस्थिति में समानता की गारंटी है। इसे लागू करने के लिए हम लगातार कनाडा के साथ जुड़े रहे। हमारे द्वारा समानता को लागू करने के लिए उठाए गए सभी कदम सही हैं
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Parity in Canadian diplomatic presence in India:https://t.co/O1fqsrOx8n pic.twitter.com/WxJojOrr5D
विज्ञापन विज्ञापन— Arindam Bagchi (@MEAIndia) October 20, 2023
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में वियना कन्वेंशन का अनुच्छेद 11.1 का भी जिक्र किया गया। अनुच्छेद का जिक्र करते हुए कहा, 'मिशन के आकार के बारे में विशिष्ट समझौते की अनुपस्थिति में प्राप्तकर्ता राज्य को यह आवश्यकता हो सकती है कि राजनयिकों का आकार उसके द्वारा मानी जाने वाली सीमा के भीतर रखा जाए। प्राप्तकर्ता राज्य की परिस्थितियों शर्तों तथा विशेष मिशन की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उचित और सामान्य है'। वहीं विदेश मंत्रालय ने सख्त लहजे में कहा कि हम पूरी तरह से कनाडा द्वारा लगाए गए आरोपों को अस्वीकार करते हैं।
सूत्रों की माने तो बेंगलुरु, मुम्बई और चंडीगढ़ में उनके वाणिज्य दूतावासों में कनाडाई राजनयिक ताकत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। भारत में अपने तीन वाणिज्य दूतावासों का संचालन बंद करने का कनाडा का निर्णय एकतरफा है। इसका समानता के कार्यान्वयन से कोई संबंध नहीं है।
कनाडा के विदेश मंत्री ने क्या दिया था बयान?
कनाडाई विदेश मंत्री मेलानी जोली ने कहा था कि कनाडा के 41 राजनयिकों को मिली छूट वापस लेने की भारत की चेतावनी के बाद कनाडा ने इन राजनयिकों को भारत से वापस बुला लिया है।