भारत और ईयू ने तैयार किया कूटनीतिक रणनीति पर पांच साल का रोडमैप : विदेश मंत्रालय
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भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के 15वें शिखर सम्मेलन को लेकर विदेश मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस सम्मेलन के बारे में जानकारी दी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस सम्मेलन से जो महत्वपूर्ण परिणाम निकला है वह यह है कि मंत्रियों के स्तर पर उच्च स्तरीय वार्ता स्थापित करने का फैसला है। यह फैसला व्यापार और निवेश समझौते के संदर्भ में व्यापार संबंधों के साथ-साथ व्यापार और निवेश समझौतों के विकास का मार्गदर्शन करने के लिए है।
#WATCH live: Ministry of External Affairs (MEA) briefs the media. https://t.co/He96Nj18gv
— ANI (@ANI) July 15, 2020
विदेश मंत्रालय के सचिव विकास स्वरूप (पश्चिमी) ने कहा कि 15वां भारत-ईयू शिखर सम्मेलन पूरा हो गया है। यूरोपीय संघ के साथ हमारे संबंध बहुत सक्रिय हैं। हमारे संबंध एक तरह से सभी आयामों को समाहित करते हैं। वस्तुओं को लेकर 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा व्यापार के साथ यूरोपीय यूनियन हमारा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है। हमारे बीच लगभग 40 बिलियन डॉलर का सेवा व्यापार भी है।
स्वरूप ने कहा कि यूरोपीय संघ भारत में सबसे बड़े निवेशकों में से एक है, जिसका कुल संचयी निवेश 91 बिलियन डॉलर से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि यह शिखर सम्मेलन बहुत ही सौहार्दपूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया था। इसमें दोनों पक्षों के नेताओं के बीच आपसी सम्मान और प्रशंसा दर्शित हुई, जो उनके पिछले संबंधों की एक बानगी थी। बता दें कि कोरोना वायरस के चलते यह सम्मेलन डिजिटल तरीके से आयोजित किया गया।
EU is one of the largest investors in India with cumulative investment of over US$ 91 Billion. The summit was held in a very cordial atmosphere marked by mutual respect & appreciation between the leaders which has been a hallmark of past interactions between them: Vikas Swarup https://t.co/DUpU1EMuye
— ANI (@ANI) July 15, 2020
सम्मेलन में चीन का भी हुआ जिक्र
स्वरूप ने बताया कि सम्मेलन में वैश्विक और क्षेत्रीय विकास की समीक्षा के हिस्से के रूप में चीन के साथ हमारे संबंधों का विषय भी सामने आया। इसे लेकर प्रधानमंत्री ने सामने आए। इस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-चीन संबंध और सीमावर्ती क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति पर हमारे विचार साझा किए। वहीं, यूएनएससी (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद) में भारत की सदस्यता और जी-20 के लिए भारत की अध्यक्षता को लेकर दोनों पक्षों में अधिक सक्रिय जुड़ाव में पारस्परिक रुचि थी।
As part of the review of global and regional development, our relations with China did come up. The PM shared our views on the India-China relationship in general and the current situation in the border areas: Vikas Swarup, Secretary (West), MEA on 15th India-EU summit pic.twitter.com/WpQavrBOPt
— ANI (@ANI) July 15, 2020
व्यापार के साथ आतंकवाद पर भी हुई चर्चा
विदेश मंत्रालय ने कहा कि सम्मेलन में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश समझौते को लेकर अंतिम निर्णय के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई लेकिन दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई है कि चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए दो मंत्रियों को जल्द से जल्द मिलना चाहिए। दोनों पक्षों के नेताओं ने आतंकवाद की चुनौती पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान पाकिस्तान का भी जिक्र हुआ। पाकिस्तान उन गतिविधियों के संदर्भ में आया जो भारत और अन्य देशों के साथ-साथ वैश्विक आतंकवाद को लेकर जारी हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि वार्ता के दौरान भारत और यूरोपीय संघ ने वैश्विक शांति और सुरक्षा, निरस्त्रीकरण और अप्रसार के लिए अपनी मजबूत प्रतिबद्धता की पुष्टि की। दोनों पक्षों ने आतंकवाद के सभी रूपों का मुकाबला करने और उसके वित्तपोषण और व कट्टरपंथीकरण का मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्धता जताई। मंत्रालय ने बताया कि सम्मेलन में दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि भारत और यूरोपीय संघ इस संबंध में आदान-प्रदान और सहयोग की गति को और तेज करेंगे।