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माया की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, नया मंच तैयार कर रहे नाराज BSP नेता
amarujala.com- Written by: राघवेंद्र मिश्र
Updated Sat, 01 Apr 2017 11:40 AM IST
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मायावती
- फोटो : amar ujala
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विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद बहुजन समाजवादी सुप्रीमो मायावती की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, बसपा से नाराज होकर अलग हुए लोगों ने आंबेडकर जयंती से एक दिन पहले 13 अप्रैल को राज्य स्तरीय सम्मेलन बुलाया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बसपा सरकार में मंत्री रहे कमलाकांत और मायावती के ओएसडी रह चुके गंगाराम आंबेडकर इस सम्मेलन की अगुवाई करेंगे। इस दिन वे 'मिशन सुरक्षा परिषद' के नाम से एक समूह भी बनाएंगे। बताते चलें कि विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आने के बाद दोनों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।
कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही दोनों नेताओं ने कहा था कि वे कांशीराम के बहुजन मिशन को आगे बढ़ाना चहाते हैं। इसके लिए उऩ्होंने सभी बीएसपी समर्थकों से आगे आने की अपील की थी। वे बाबा साहब की जयंती पर एक नया फोरम बनाने जा रहे हैं। इससे ये कयास लगाए जा रहे हैं कि इसी दिन वे अलग राजनैतिक मंच बना सकते हैं।
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दोनों नेताओं ने मायावती पर आरोप लगाते हुए कहा था कि लगातार हार के बाद भी उन्हें पार्टी और कार्यकर्ताओं की परवाह नहीं है। कांशीराम द्वारा बनाई गई पार्टी का वोटबेस गिरता जा रहा है।
नेताओं का कहना है कि वह दलितों, अति पिछड़ों और दूसरे कमजोर तबकों के लिए नया कैडर बनाएंगे। इसका फैसला 26 मार्च का लिया गया था। इसमें बीएसपी से नाराज कई नेता और जिले स्तर के कई पदाधिकारी शामिल थे।
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रिपोर्ट के मुताबिक, बसपा सरकार में मंत्री रहे कमलाकांत और मायावती के ओएसडी रह चुके गंगाराम आंबेडकर इस सम्मेलन की अगुवाई करेंगे। इस दिन वे 'मिशन सुरक्षा परिषद' के नाम से एक समूह भी बनाएंगे। बताते चलें कि विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आने के बाद दोनों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।
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कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही दोनों नेताओं ने कहा था कि वे कांशीराम के बहुजन मिशन को आगे बढ़ाना चहाते हैं। इसके लिए उऩ्होंने सभी बीएसपी समर्थकों से आगे आने की अपील की थी। वे बाबा साहब की जयंती पर एक नया फोरम बनाने जा रहे हैं। इससे ये कयास लगाए जा रहे हैं कि इसी दिन वे अलग राजनैतिक मंच बना सकते हैं।
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दोनों नेताओं ने मायावती पर आरोप लगाते हुए कहा था कि लगातार हार के बाद भी उन्हें पार्टी और कार्यकर्ताओं की परवाह नहीं है। कांशीराम द्वारा बनाई गई पार्टी का वोटबेस गिरता जा रहा है।
नेताओं का कहना है कि वह दलितों, अति पिछड़ों और दूसरे कमजोर तबकों के लिए नया कैडर बनाएंगे। इसका फैसला 26 मार्च का लिया गया था। इसमें बीएसपी से नाराज कई नेता और जिले स्तर के कई पदाधिकारी शामिल थे।