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चयन की बात: न्यायाधिकरणों में मनमर्जी से नियुक्तियां नहीं कर सकती सरकार, सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा

Thu, 16 Sep 2021 06:13 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Thu, 16 Sep 2021 06:13 AM IST
सार

न्यायाधीशों की चयन समिति की सिफारिशें नजरअंदाज कर पद भरे जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सरकार से कहा कि हम लोकतांत्रिक देश में हैं, यहां कानून का राज है, आप नाम अस्वीकार नहीं कर सकते हैं। शीर्ष अदालत ने दो हफ्ते के भीतर ट्रिब्यूनलों में सभी खाली पद भरने के निर्देश भी दिए हैं। आइए जानते हैं आखिर क्या कुछ है ये पूरा मामला...

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matter of selection: Government cannot make appointments in tribunals arbitrarily, why did the Supreme Court say so
supreme court - फोटो : पीटीआई

विस्तार

न्यायाधिकरणों में खाली पड़े पदों पर नियुक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को बुधवार को फिर कड़ी फटकार लगाई। सरकार द्वारा की गई हालिया नियुक्तियों पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने कहा कि चयन समिति की सिफारिश में से नाम चुनने में सरकार ने मनमर्जी की।

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चीफ जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता वाली चयन समितियों द्वारा चुने नामों में से कुछ को चुनने और बाकी नियुक्तियां प्रतीक्षा सूची से करने पर नाखुशी जताई। सीजेआई ने अटॉनी जनरल केके वेणुगोपाल से कहा, हमने न्यायिक सदस्यों के लिए 534 और तकनीकी सदस्यों के लिए 400 से अधिक का साक्षात्कार लिया था। 
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उसमें से हमने 10 न्यायिक सदस्यों की सूची और 11 तकनीकी सदस्यों की सूची दी थी। चयन सूची में से तीन और अन्य नाम प्रतीक्षा सूची से लिए गए। आप चयन सूची की अनदेखी करके प्रतीक्षा सूची में नहीं जा सकते। यह किस तरह की नियुक्ति है? पीठ ने कहा कि हम लोकतांत्रिक देश में हैं, यहां कानून का राज है और हम संविधान के तहत काम करते हैं। आप (केंद्र) यह नहीं कह सकते हें कि हम नामों को स्वीकार नहीं कर सकते।

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सदस्यों की नियुक्ति ही एकमात्र समाधान

चीफ जस्टिस रमण ने वेणुगोपाल से कहा, सदस्यों की नियुक्ति ही समाधान है। इस पर अटॉर्नी जनरल ने आश्वासन दिया कि नियुक्तियां दो हफ्ते में की जाएंगी और नियुक्तियां न होने पर ठोस कारण बताया जाएगा। मामले को स्थगित करते हुए सीजेआई ने कहा कि हम दो हफ्ते की मोहलत दे रहे हैं। नियुक्तियों की व्यापक योजना के साथ आइए।

हमारे प्रयास व्यर्थ जा रहे
चीफ जस्टिस रमण ने कहा, जिस तरह से निर्णय लिए जा रहे हैं, उससे हम बहुत नाखुश हैं। हम चयन करते हैं और सरकार कहती है कि हम उन्हें नहीं चुन सकते। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जज कोरोना के दौरान देशभर में गए और नामों को चुना लेकिन हमारे प्रयास व्यर्थ जा रहे हैं। यह सिर्फ हमारे समय की बर्बादी है।

कौन सा जज एक साल के लिए करना चाहेगा काम

चीफ जस्टिस ने कहा, न्यायिक सदस्यों को प्रभावी रूप से केवल एक वर्ष का कार्यकाल मिलेगा। दो साल तक चयन लंबित रखे। नियुक्ति आदेश अब जारी हुए हैं, जब जजों की उम्र 64 वर्ष है। 65 वर्ष में सेवानिवृत्ति से पहले सिर्फ एक वर्ष का कार्यकाल बचा है। उन्होंने सवाल किया, कौन सा जज एक साल के लिए इस नौकरी में जाना चाहेगा।

सरकार ने कहा, सिफारिश न मानना हमारा अधिकार
अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि यह सरकार का अधिकार है कि वह सिफारिश माने या न माने। उन्होंने मौजूदा न्यायाधिकरण सुधार कानून 2021 का भी हवाला दिया। इस पर सीजेआई ने कहा, हम कानून के शासन का पालन कर रहे हैं। यदि सरकार को ही अंतिम फैसला करना है तो प्रक्रिया की शुचिता क्या है? हमने समाधान दिया, इसे लागू आपको करना है।

ओडिशा प्रशासनिक न्यायाधिकरण समाप्त करने पर केंद्र को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बीआर गवई की तीन सदस्यीय पीठ ने ओडिशा प्रशासनिक न्यायाधिकरण को समाप्त करने को चुनौती देने वाली याचिका पर कार्मिक, सार्वजनिक शिकायतें एवं पेंशन मंत्रालय, ओडिशा सरकार व अन्य को नोटिस जारी किया है। इन सभी से आठ हफ्ते के अंदर जवाब देने को कहा है। ओडिशा हाईकोर्ट ने न्यायाधिकरण समाप्त करने को सही ठहराया था। ओडिशा प्रशासनिक न्यायाधिकरण बार एसोसिएशन ने इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की है।

केंद्र ने कहा, 6 न्यायाधिकरणों में 84 नियुक्तियां... कोई भी सिफारिश लंबित नहीं

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने आईटीएटी और एनसीएलटी समेत छह न्यायाधिकरणों में 84 नियुक्तियां की हैं और अब चयन समिति की कोई भी सिफारिश लंबित नहीं है।

  • राजस्व निदेशक अरविंद शरण द्वारा दायर हलफनामे में कहा है कि केंद्र ने एससीएससी द्वारा की गई सभी सिफारिशों पर कार्रवाई की है और नियुक्ति आदेश जारी किए गए हैं।
  • आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी), राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी), टेलीकॉम विवाद एवं निपटान अपीलीय न्यायाधिकरण (टीडीएसएटी), राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी), विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) और सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) में की गई नियुक्तियों के संदर्भ में सरकार ने चार्ट भी पेश किया।
  • हलफनामे के अनुसार, वर्ष 2020 और 2021 में विभिन्न न्यायाधिकरणों में कुल 84 नियुक्तियां की गईं। हलफनामे में सबसे पहले एनसीएलटी के लिए सिफारिशों व नियुक्तियां का जिक्र किया गया। ब्यूरो
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