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Maternal Mortality: भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि, 33 साल में 80 फीसदी गिरी मातृ मृत्यु दर; रिपोर्ट का दावा

Sat, 28 Mar 2026 10:02 PM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Sat, 28 Mar 2026 10:02 PM IST
सार

भारत ने बीते तीन दशकों में मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है, जिससे गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी मौतों में बड़ी कमी आई है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, संस्थागत प्रसव और जागरूकता अभियानों का इसमें अहम योगदान रहा है। हालांकि वैश्विक स्तर पर अभी भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है और कई देश लक्ष्य से पीछे हैं।

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Maternal mortality rate in India has declined by 80 percent in 33 years Lancet Report healthcare improvement
भारत में मातृ मृत्यु दर में आई बड़ी गिरावट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत ने मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित एक वैश्विक विश्लेषण के अनुसार, 1990 से 2023 के बीच भारत के मातृ मृत्यु अनुपात में लगभग 80 फीसदी की कमी आई है। वर्ष 1990 में प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 508 मौतें होती थीं, जो 2023 में घटकर 116 रह गई हैं।
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रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में भारत में कुल 24,700 मातृ मृत्यु दर्ज की गईं। तुलनात्मक रूप से इसी अवधि में पाकिस्तान में 10,300, इथियोपिया में 11,900 और नाइजीरिया में 32,900 मौतें हुईं। हालांकि, नवीनतम नमूना पंजीकरण प्रणाली 2021-23 के आंकड़ों के अनुसार भारत का मातृ मृत्यु अनुपात अब 88 मृत्यु प्रति लाख तक गिर चुका है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि भारत की यह प्रगति वैश्विक औसत से कहीं बेहतर है।
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दुनियाभर में 2023 में 2.4 लाख मौतें
यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के शोधकर्ताओं ने नोट किया कि पिछले तीन दशकों में वैश्विक स्तर पर मौतों में एक-तिहाई की कमी आई है। दुनिया भर में 2023 में कुल 2.4 लाख मातृ मृत्यु हुईं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रसव के दौरान रक्तस्राव और उच्च रक्तचाप मौत के मुख्य कारण हैं। संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के तहत 2030 तक इस अनुपात को 70 से नीचे लाने का लक्ष्य है। भारत इस लक्ष्य को समय से पहले हासिल करने की दिशा में मजबूती से बढ़ रहा है।
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कोविड के दौरान हुई थी अस्थायी वृद्धि
दुनिया के 204 में से 104 देश अब भी इस लक्ष्य से पीछे हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, कोविड-19 महामारी के शुरुआती दौर में भी मातृ मृत्यु दर में अस्थायी वृद्धि देखी गई थी। टीकाकरण से पहले 2020-21 के दौरान कई क्षेत्रों में संक्रमण के कारण मौतें बढ़ी थीं। रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि प्रसव पूर्व देखभाल, सुरक्षित प्रसव सेवाओं और आपातकालीन प्रसूति देखभाल तक बेहतर पहुंच के जरिये इन मौतों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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