रावलपिंडी के अस्पताल में छिपा मसूद अजहर, पाक सेना दे रही पहरा
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पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड गाजी राशिद के खात्मे के बाद खुफिया एजेंसियों को आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के ठिकाने के बारे में पुख्ता सूचना मिली है। सूत्रों के मुताबिक, आतंकी मौलाना मसूद अजहर पाकिस्तान के रावलपिंडी शहर के आर्मी अस्पताल को अपना ठिकाना बनाया हुआ है। अजहर के आस पास पाकिस्तानी सेना के जवानों को पहरा है। पाकिस्तानी सेना की सरपरस्ती में वह अस्पताल से ही भारत के खिलाफ आतंकी साजिशों को अंजाम दे रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को पता चला है कि अजहर इलाज के नाम पर बेहद सख्त सुरक्षा में अस्पताल के एक कमरे में कैद हो गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इसी अस्पताल से अजहर ने पुलवामा में सुरक्षाबलों के काफिले पर आत्मघाती हमला करने का आदेश दिया था। हमले से करीब आठ दिन पहले जैश सरगना ने ऑडियो टेप जारी किया था। इसमें उसने कहा था कि इस लड़ाई में मौत से ज्यादा अच्छा कुछ नहीं है। कोई इन्हें दहशतगर्द कहेगा, कोई निकम्मा, कोई पागल तो कोई इन्हें अमन के लिए खतरा कहेगा। इस टेप के जरिये ही अजहर ने गाजी राशिद को घाटी में युवाओं का ब्रेन वाश करने और उन्हें आईईडी धमाके के साथ आत्मघाती हमलों के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी।
आतंकियों को लांच पैड से हटाने में जुटी पाक सेना
घाटी में आतंकियों के खिलाफ आर पार की लड़ाई में जुटे सुरक्षाबलों की कार्रवाई से डरे पाकिस्तान ने एलओसी के पास पीओके में लांच पैड से आतंकियों को हटाना शुरू कर दिया है। घाटी में जैश ए मोहम्मद के करीब 60 से ज्यादा आतंकी मौजूद हैं, जो अलग-अलग जिले में फैले हुए हैं। ये आतंकी लगातार अपना ठिकाना बदल रहे हैं। इतना ही नहीं सीमा पार पाकिस्तानी सेना भी इन आतंकियों को बचाने में जुट गई है। एलओसी के पास पाक सेना अलर्ट पर है और वहां मौजूदा आतंकी ठिकानों को शिफ्ट करना शुरू कर दिया है। खबरों के मुताबिक, इन शिविरों में आतंकियों की कोई हलचल देखने को नहीं मिल रही है। इतना ही नहीं, पाक ने अपने सैनिकों को शीतकालीन बंकरों में तैनात कर दिया है।
एक थप्पड़ में कांपते हुए राज उगलने लगा था जैश सरगना मसूद अजहर
पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के दम पर भारत समेत दुनिया भर को धमकाने वाला सरगना मौलाना मसूद अजहर दरअसल बहुत ही डरपोक किस्म का आदमी है। सिक्किम पुलिस के पूर्व महानिदेशक अविनाश मोहनाने का कहना है कि सेना के जवान के एक थप्पड़ में ही उसकी अकड़ ढीली पड़ गई थी और वह सारे राज उगलने लगा था। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में फरवरी, 1994 में उसकी गिरफ्तारी की गई थी। उस दौरान मोहनाने ने उससे पूछताछ की थी। अजहर पुर्तगाली पासपोर्ट पर बांग्लादेश के रास्ते भारत में घुसकर कश्मीर पहुंचा।
अविनाश ने बताया कि हिरासत में खुफिया एजेंसियों को उससे पूछताछ करने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी थी। सेना के जवान के एक थप्पड़ पर ही वह बुरी तरह से हिल गया था और बोलना शुरू कर दिया था। उसने पाकिस्तान में आतंकवादियों की भर्ती प्रक्रिया और आतंकी गुटों की गतिविधियों की जानकारी दी थी। 1985 बैच के आईपीएस अधिकारी मोहनाने ने इंटेलीजेंस ब्यूरो में दो दशक के अपने कार्यकाल में अजहर से कई बार पूछताछ की थी। उन्होंने उस वक्त आईबी में कश्मीर डेस्क का नेतृत्व किया था।
ज्यादा बल प्रयोग नहीं करना पड़ा था
उन्होंने बताया कि कई बार कोट बलवाल जेल में उससे कई घंटे तक पूछताछ की। हमें उस पर ज्यादा बल प्रयोग नहीं करना पड़ा क्योंकि वह खुद ही सारी सूचनाएं बताता चला गया। उसी ने अफगानी आतंकियों के घाटी में भेजे जाने की जानकारी दी थी। साथ ही हरकत उल मुजाहिदीन (एचयूएम) और हरकत उल जेहाद ए इस्लामी (हुजी) के हरकत उल अंसार में विलय की भी जानकारी दी थी। वह हरकत उल अंसार का सरगना था।
सहारनपुर में की थी बैठक
मोहनाने ने बताया कि बांग्लादेश से 1994 में भारत पहुंचने के बाद अजहर कश्मीर जाने से पहले सहारनपुर गया था। यहां उसने साझा नीति बनाने के लिए एचयूएम और हूजी के अलग-अलग धड़ों के साथ बैठक की थी ताकि दोनों घाटी में एक साथ आ सकें।
पत्रकार बनकर गया था कई देशों में
अविनाश ने बताया कि कराची से प्रकाशित समाचार पत्र ‘सदा ए मुजाहिद’ में पत्रकार के तौर पर अजहर ने पाक के पत्रकारों के साथ 1993 में कुछ देशों की यात्रा की थी, जहां उसने ‘कश्मीर हित’ के लिए समर्थन मांगा था।
हमेशा छूट जाने का करता था दावा
मोहनाने ने बताया कि अजहर हमेशा दावा करता था कि पुलिस उसे ज्यादा दिन तक हिरासत में नहीं रख पाएगी क्योंकि वह पाकिस्तान और आईएसआई के लिए महत्वपूर्ण है। फरवरी 1994 में गिरफ्तारी के 10 महीने बाद दिल्ली से कुछ विदेशी नागरिकों का अपहरण हो गया और अपहर्ताओं ने उसे रिहा करने की मांग की लेकिन उमर शेख की गिरफ्तारी के कारण यह साजिश नाकाम हो गई। हालांकि 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814 के यात्रियों के अपहरण के बदले उसे रिहा कर दिया गया।