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नंदीग्राम: क्या ममता की हार का जख्म अभी भरा नहीं, तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच क्यों यह मुद्दा बना हुआ है
Thu, 11 Nov 2021 06:11 PM IST
प्रतिभा ज्योति
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Thu, 11 Nov 2021 06:11 PM IST
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ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी
- फोटो :
Amar Ujala
विस्तार
इसी साल अप्रैल-मई में पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नंदीग्राम विधानसभा सीट पर चुनाव हार गईं, लेकिन तृणमूल कांग्रेस में अभी तक यह जख्म नहीं भरा है। जबकि पार्टी विधानसभा चुनाव जीत चुकी है और सभी उपचुनावों के दौरान भी टीएमसी को भारी जीत मिली है। ममता बनर्जी तो भवानीपुर उपचुनाव रिकॉर्ड मतों से जीतीं , लेकिन नंदीग्राम में उनकी हार की टीस अभी तक पार्टी में कम नहीं है। इसलिए नंदीग्राम सीट अभी भी पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच बहस का मुद्दा बना हुआ है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर टीएमसी और भाजपा के बीच नेताओं में न केवल जुबानी जंग चलती रहेगी बल्कि दोनों पार्टियां अपने-अपने ढंग से इसका सियासी इस्तेमाल भी करेंगी।एक तरफ जहां भाजपा विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी नंदीग्राम सीट पर ममता को हराने को अपनी बड़ी कामयाबी मान रही है और पार्टी यहां अपने संगठन विस्तार में लगी है। वहीं तृणमूल कांग्रेस इस हार का बदला लेने के लिए नंदीग्राम में अपनी सियासी जमीन को और मजबूत करने के साथ-साथ बेहद आक्रमक तरीके से दूसरे राज्यों में भी चुनाव मैदान में उतर रही है।
टीएमसी ने लगाया अवैध तरीके से जीतने का आरोप
तृणमूल कांग्रेस ने बुधवार को भाजपा पर विधानसभा चुनावों के दौरान जबरन बूथों पर कब्जा करने और अवैध तरीकों से जीतने का आरोप लगाया। तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता और राज्य सचिव कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि नंदीग्राम को अवैध तरीकों से जीता गया था। उन्होंने दावा किया कि अगर नंदीग्राम में दोबारा चुनाव कराए जाएं तो ममता बनर्जी 22,000 से अधिक मतों से जीतेंगी। घोष के मुताबिक हम हमेशा के लिए नंदीग्राम से शुभेंदु अधिकारी को हटाना चाहते हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद से टीएमसी लगातार भाजपा पर यही आरोप लगाती रही है।
नंदीग्राम में अपना नामांकन भरते हुए शुभेन्दु अधिकारी
- फोटो :
ANI
नंदीग्राम सबसे हॉट सीट बन गई थी
पूरे चुनाव के दौरान नंदीग्राम को सबसे हॉट सीट माना गया क्योंकि यहां ममता बनर्जी के मुकाबले उनके पूर्व सहयोगी शुभेंदु अधिकारी चुनाव मैदान में थे। ममता यह चुनाव अधिकारी से से 1,956 मतों के अंतर से हार गई थीं। अधिकारी टीएमसी के नंदीग्राम आंदोलन के दिनों में ममता बनर्जी के करीबी रह चुके हैं।
दोनों पार्टी के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई थी
नंदीग्राम भाजपा और टीएमसी दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई थी क्योंकि ममता बनर्जी ने इसी विधानसभा क्षेत्र से भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलनों की अगुआई करते हुए वामपंथी शासन को ध्वस्त कर दिया था। इसी आंदोलन की बदौलत टीएमसी 2011 में सत्ता में आई।
नंदीग्राम 2007 में तब चर्चा में आया था जब तत्कालीन पश्चिम बंगाल की सरकार ने सलीम ग्रुप को 'स्पेशल इकनॉमिक जोन' नीति के तहत, नंदीग्राम में एक 'रसायन केन्द्र' की स्थापना करने की मंजूरी देने का फैसला किया। ग्रामीणों को जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने इस फैसले का विरोध किया और पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में 14 लोग मारे गए। राज्य में इस पुलिस फायरिंग का कड़ा विरोध हुआ और देश भर में यह बात चर्चा में आ गई। यहीं से ममता बनर्जी ने बंगाल में वाम मोर्चा सरकार को हटाने के लिए राजनीतिक बिगुल फूंक दिया।
पूरे चुनाव के दौरान नंदीग्राम को सबसे हॉट सीट माना गया क्योंकि यहां ममता बनर्जी के मुकाबले उनके पूर्व सहयोगी शुभेंदु अधिकारी चुनाव मैदान में थे। ममता यह चुनाव अधिकारी से से 1,956 मतों के अंतर से हार गई थीं। अधिकारी टीएमसी के नंदीग्राम आंदोलन के दिनों में ममता बनर्जी के करीबी रह चुके हैं।
दोनों पार्टी के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई थी
नंदीग्राम भाजपा और टीएमसी दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई थी क्योंकि ममता बनर्जी ने इसी विधानसभा क्षेत्र से भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलनों की अगुआई करते हुए वामपंथी शासन को ध्वस्त कर दिया था। इसी आंदोलन की बदौलत टीएमसी 2011 में सत्ता में आई।
नंदीग्राम 2007 में तब चर्चा में आया था जब तत्कालीन पश्चिम बंगाल की सरकार ने सलीम ग्रुप को 'स्पेशल इकनॉमिक जोन' नीति के तहत, नंदीग्राम में एक 'रसायन केन्द्र' की स्थापना करने की मंजूरी देने का फैसला किया। ग्रामीणों को जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने इस फैसले का विरोध किया और पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में 14 लोग मारे गए। राज्य में इस पुलिस फायरिंग का कड़ा विरोध हुआ और देश भर में यह बात चर्चा में आ गई। यहीं से ममता बनर्जी ने बंगाल में वाम मोर्चा सरकार को हटाने के लिए राजनीतिक बिगुल फूंक दिया।
नंदीग्राम में वोट मांगते भाजपा के उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी फाइल फोटो
- फोटो :
ANI
बुधवार को शहीद दिवस के मौके पर दोनों पार्टियों ने 2007 में जहां फायरिंग हुई थी उसी स्थान पर दो अलग-अलग कार्यक्रमों में इस घटना में मारे गए शहीदों को श्रद्धांजलि दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों कार्यक्रम भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति के बैनर तले आयोजित की गई, जो हर साल 14 मार्च और 10 नवंबर को नंदीग्राम के भूमि अधिग्रहण विरोधी प्रदर्शनों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देती है।
अधिकारी पर टीएमसी का हमला
इसी मौके पर तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने ममता की हार की खीज निकालते हुए शुभेंदु अधिकारी पर हमला बोला। घोष ने लोगों को यह भी बताया कि कैसे शुभेंदु अधिकारी ने ममता की पीठ में छुरा घोंपा है। उन्होंने शुभेंदु अधिकारी पर नंदीग्राम को सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करने का भी आरोप लगाया और कहा कि नंदीग्राम सीट के परिणाम को अब अदालत में चुनौती दी जा रही है।
गंगाजल छिड़क कर मंच शुद्ध किया
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ घंटों बाद, नंदीग्राम विधायक शुभेंदु अधिकारी भी चुपचाप उसी मंच पर आए और वहां गंगाजल छिड़क दिया। जाहिर तौर पर यह सब तृणमूल के आयोजन के बाद कार्यक्रम स्थल को "शुद्ध" करने के लिए किया गया।
अधिकारी पर टीएमसी का हमला
इसी मौके पर तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने ममता की हार की खीज निकालते हुए शुभेंदु अधिकारी पर हमला बोला। घोष ने लोगों को यह भी बताया कि कैसे शुभेंदु अधिकारी ने ममता की पीठ में छुरा घोंपा है। उन्होंने शुभेंदु अधिकारी पर नंदीग्राम को सांप्रदायिक आधार पर विभाजित करने का भी आरोप लगाया और कहा कि नंदीग्राम सीट के परिणाम को अब अदालत में चुनौती दी जा रही है।
गंगाजल छिड़क कर मंच शुद्ध किया
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ घंटों बाद, नंदीग्राम विधायक शुभेंदु अधिकारी भी चुपचाप उसी मंच पर आए और वहां गंगाजल छिड़क दिया। जाहिर तौर पर यह सब तृणमूल के आयोजन के बाद कार्यक्रम स्थल को "शुद्ध" करने के लिए किया गया।
नंदीग्राम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
- फोटो :
ANI
अधिकारी ने गुरुवार को कहा “मैंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया है और मैं पूरे राज्य में भगवा झंडा लहराएगा। मैंने वाम मोर्चा शासन के दौरान सीपीआईएम के लक्ष्मण सेठ को हराया है और मैंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया है। भविष्य में भी, मैं लोगों के समर्थन से जीतूंगा’। वहीं उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा “मैं उन लोगों को कभी नहीं भूलूंगा जिन्होंने नंदीग्राम आंदोलन के लिए अपनी जान गंवाई और जिन्होंने शक्तिशाली वाम मोर्चा शासन की निरंकुश शासन का विरोध किया। इसने आखिरकार पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया।
एक सीट का बदला कई सीटों पर
पश्चिम बंगाल की राजनीति को समझने वाले एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ने बताया कि चुनाव खत्म हो गए हैं लेकिन नंदीग्राम को लेकर टीएमसी और भाजपा के नेताओं में जुबानी जंग जारी है। इसका मतलब है कि टीएमसी इस बात को नहीं भूलने वाली है कि शुभेंदु अधिकारी ने यहां से ममता बनर्जी को हराया है। इसलिए पार्टी भाजपा से अपनी हार का बदला लेने के लिए न केवल बंगाल में भाजपा से 2024 के लोकसभा चुनाव में उससे सीटें छीनना चाहती हैं बल्कि बंगाल के बाहर भी अपनी पार्टी का विस्तार कर रही है। ममता बनर्जी के राष्ट्रीय राजनीति में आने की छटपटाहट का मुख्य मुद्दा भी यही है क्योंकि वे एक विधानसभा सीट पर हार का बदला कई विधानसभा सीटों से लेना चाहती हैं।
एक सीट का बदला कई सीटों पर
पश्चिम बंगाल की राजनीति को समझने वाले एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ने बताया कि चुनाव खत्म हो गए हैं लेकिन नंदीग्राम को लेकर टीएमसी और भाजपा के नेताओं में जुबानी जंग जारी है। इसका मतलब है कि टीएमसी इस बात को नहीं भूलने वाली है कि शुभेंदु अधिकारी ने यहां से ममता बनर्जी को हराया है। इसलिए पार्टी भाजपा से अपनी हार का बदला लेने के लिए न केवल बंगाल में भाजपा से 2024 के लोकसभा चुनाव में उससे सीटें छीनना चाहती हैं बल्कि बंगाल के बाहर भी अपनी पार्टी का विस्तार कर रही है। ममता बनर्जी के राष्ट्रीय राजनीति में आने की छटपटाहट का मुख्य मुद्दा भी यही है क्योंकि वे एक विधानसभा सीट पर हार का बदला कई विधानसभा सीटों से लेना चाहती हैं।