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नौ साल बाद भी लगता है पापा घर आएंगे : शहीद की बेटी

Sat, 25 Nov 2017 06:34 PM IST
एजेंसी / मुंबई
एजेंसी / मुंबई Updated Sat, 25 Nov 2017 06:34 PM IST
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Martyr's daughter said Nine years later, Papa seems to be coming home
मुंबई अटैक
हमें महसूस होता है कि पापा किसी भी पल घर वापस आ जाएंगे। हालांकि दिल की गहराइयों से हम जानते हैं कि वह हमारे बीच कभी नहीं लौटेंगे। पर नौ साल बाद भी उनके लौटने इंतजार है। आंसुओं से भरी आंखें लिए शहीद पुलिस कर्मी तुकाराम ओंबले की बड़ी बेटी वैशाली ने यह बात कही। तुकाराम मुंबई पर हमला करने वाले आतंकी अजमल कसाब को पकड़ते वक्त शहीद हो गए थे।
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पढ़ें- मुंबई हमले के गवाह का दावा ‘जिंदा है कसाब’
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एमएड कर लेक्चर बनने की तैयारी कर रहीं वैशाली ने कहा कि हमें हमेशा लगता है कि पापा ड्यूटी गए हैं और वह घर लौटेंगे। हमने घर पर उनका सारा सामान वहीं रखा हुआ है, जहां वह हुआ करता था। हमें उनके सर्वोच्च बलिदान पर गर्व है। वैशाली कहती हैं कि पिछले नौ साल में एक दिन भी ऐसा नहीं गुजरा जब उन्होंने उन्हें याद न किया हो।
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वशाली अपनी मां तारा और बहन भारती के साथ वर्ली के पुलिस कैंप में रहती हैं। उनकी बहन भारती भी राज्य जीएसटी विभाग में अधिकारी बन गई हैं। 27 नवंबर, 2008 को सहायक उप निरीक्षक तुकाराम कसाब की गोलियों से मारे गए थे। पर उनकी बहादुरी से ही कसाब को पकड़ना संभव हुआ। कसाब मुंबई हमले का एकमात्र आतंकी था, जिसे पकड़ा गया और फांसी दी गई। 

कब तक शहीद होते रहेंगे जवान

Martyr's daughter said Nine years later, Papa seems to be coming home
मुंबई अटैक
वैशाली कहती हैं कि आखिर कब तक पुलिस और बलों के जवान बलिदान के नाम पर अपनी जिंदगियां गवाते रहेंगे। यह कहीं न कहीं रुकना चाहिए। बदलाव आना चाहिए। हर नागरिक को सतर्क रहना चाहिए, जिससे ऐसे हमले नाकाम हों। वैशाली बताती हैं कि उनका परिवार महाराष्ट्र के सतारा जिले का रहने वाला है। परिवार में शहीदों का इतिहास रहा है।

इस साल अगस्त में यहीं के निवासी सीआरपीएफ कांस्टेबल रविंद्र धानवाडे आतंकियों से लड़ते हुए कश्मीर में शहीद हो गए थे। वहीं यहीं के कर्नल संतोष महादिक 2015 में कश्मीर में आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हुए थे। सबसे ज्यादा पीड़ा की बात यह है कि शहीदों की यह सूची रुक ही नहीं रही है।
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