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Marine Pollution: प्लास्टिक कचरे के लिए भारत व 12 देश जिम्मेदार; समुद्र तल में 1.10 करोड़ टन प्लास्टिक

Fri, 12 Apr 2024 06:32 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 12 Apr 2024 06:32 AM IST
सार

Marine Pollution: शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया है कि 192 देशों से निकला करीब 80 लाख टन प्लास्टिक कचरा प्रतिवर्ष महासागरों में समा रहा है। समुद्रों में पहुंचने वाला करीब 80 फीसदी कचरा जमीन पर ठोस कचरे के कुप्रबंधन से जुड़ा है। यह कचरा भूमि से जुड़े समुद्री मार्गों के जरिए समुद्र तल तक पहुंच रहा है।

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Marine pollution threatens biodiversity with 1.10 crore tonnes of plastic deposited on the sea floor
समुद्री कचरा - फोटो : iStock

विस्तार

मानवीय लापरवाही के कारण समुद्र भी तेजी से प्रदूषित होते जा रहे हैं। एक अघ्ययन में पता चला है कि समुद्र की गहराइयों में 1 करोड़ 10 लाख टन प्लास्टिक जमा है, जो न सिर्फ पर्यावरण बल्कि जैवविविधता के लिए गंभीर संकट बन चुका है। अध्ययन के अनुसार हर मिनट कचरे से भरे एक ट्रक के बराबर प्लास्टिक समुद्र में समा रहा है।

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प्लास्टिक कचरे के लिए भारत व 12 देश जिम्मेदार
भारत दुनिया के 60 प्रतिशत कुप्रबंधित प्लास्टिक कचरे के लिए जिम्मेदार बारह देशों में से एक है। यह खुलासा स्विट्जरलैंड की गैर-लाभकारी अर्थ एक्शन (ईए) की प्लास्टिक ओवरशूट डे रिपोर्ट में हुआ है। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रति व्यक्ति प्लास्टिक कचरा उत्पादन जिम्मेदार 12 देशों में सबसे कम है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2021 के बाद से वैश्विक प्लास्टिक अपशिष्ट उत्पादन में 7.11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में प्रति व्यक्ति प्लास्टिक कचरा उत्पादन (प्रति वर्ष 8 किलोग्राम प्रति व्यक्ति) कम होने के कारण भारत को कम अपशिष्ट उत्पादक प्रदूषक के रूप में वर्गीकृत किया गया है, लेकिन इसमें कहा गया है कि 2024 में देश का अपेक्षित कुप्रबंधित कचरा 74 लाख टन होगा, जो कि बहुत ज्यादा है। 

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कॉमनवेल्थ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ऑर्गनाईजेशन (सीएसआईआरओ) और टोरंटो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का अध्ययन ओशियोनोग्राफिक रिसर्च पेपर्स में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया है कि 192 देशों से निकला करीब 80 लाख टन प्लास्टिक कचरा प्रतिवर्ष महासागरों में समा रहा है। समुद्रों में पहुंचने वाला करीब 80 फीसदी कचरा जमीन पर ठोस कचरे के कुप्रबंधन से जुड़ा है। यह कचरा भूमि से जुड़े समुद्री मार्गों के जरिए समुद्र तल तक पहुंच रहा है। शेष 20 फीसदी कचरे के लिए समुद्र तट के किनारे बसी हुई बस्तियां जिम्मेदार हैं।

नहीं रोका तो होगा विनाशकारी
अध्ययन से जुड़ी शोधकर्ता एलिस झू कहती हैं कि समुद्र तल पर मौजूद प्लास्टिक कचरे की मात्रा समुद्र की सतह पर तैरते प्लास्टिक से 100 गुना अधिक हो सकती है। यदि हम प्लास्टिक को समुद्रों में प्रवेश करने से रोक सकें तो इसकी मात्रा कम हो जाएगी। यदि इसको नहीं रोका गया तो यह पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए विनाशकारी साबित होगा।

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2060 तक करीब 3 गुना बढ़ जाएगा प्लास्टिक कचरा
आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) की हाल ही जारी रिपोर्ट ‘ग्लोबल प्लास्टिक आउटलुक: पालिसी सिनेरियोज टू 2060’ से पता चला है कि हर साल पैदा होने वाला यह प्लास्टिकत कचरा 2060 तक करीब तीन गुना बढ़ जाएगा। एक मोटे अनुमान के अनुसार यह अगले 37 वर्षों में बढ़कर 101.4 करोड़ टन से ज्यादा होगा। दुनिया भर में समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण के सबसे बड़े उत्सर्जक 10 देश हैं। इनमें सबसे अधिक से लेकर सबसे कम तक क्रमशः चीन, इंडोनेशिया, फिलिपीन, वियतनाम, श्रीलंका, थाईलैंड, मिस्र, मलेशिया, नाइजीरिया और बांग्लादेश हैं।

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