फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Maratha bodies angry after Tulja Bhavani temple 'denies' entry to Sambhajiraje in sanctum citing rule

महाराष्ट्र: संभाजीराजे को नहीं मिला तुलजा भवानी मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश, मराठा संगठनों ने जताई नाराजगी 

Wed, 11 May 2022 03:57 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे Published by: Amit Mandal Updated Wed, 11 May 2022 03:57 PM IST
सार

मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया कि संभाजीराजे के प्रति अनादर दिखाने का कोई इरादा नहीं था और उनकी यात्रा के दौरान उन्हें हुई असुविधा के लिए माफी का पत्र जारी किया।

विज्ञापन
Maratha bodies angry after Tulja Bhavani temple 'denies' entry to Sambhajiraje in sanctum citing rule
Tulja Bhawani temple - फोटो : social media

विस्तार

मराठा संगठनों ने महाराष्ट्र के तुलजापुर में प्रसिद्ध तुलजा भवानी मंदिर के प्रशासन पर नाराजगी जताई है जिसने पूर्व राज्यसभा सांसद संभाजीराजे छत्रपति को निर्धारित समय के बाद गर्भगृह के अंदर प्रवेश नहीं करने दिया।  संभाजीराजे छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रत्यक्ष वंशज हैं। उस्मानाबाद जिले के तुलजा भवानी मंदिर ट्रस्ट ने कहा कि निजाम युग 'देउल-ए-कवायत' अधिनियम के अनुसार, देवी तुलजा भवानी का अभिषेक (विशेष अनुष्ठान) करने के बाद मुख्य पुजारी को छोड़कर किसी को भी गर्भगृह के अंदर रहने की अनुमति नहीं है।  

विज्ञापन


संभाजीराजे के पहुंचने से पहले हो चुका था अभिषेक 
तहसीलदार और मंदिर ट्रस्ट की प्रबंधन प्रशासक योगिता कोल्हे ने कहा कि संभाजीराजे सोमवार की रात करीब साढ़े नौ बजे मंदिर आए और गर्भगृह में प्रवेश की इच्छा जताई। हालांकि, मंदिर प्रशासन ने उन्हें बताया कि चूंकि अभिषेक हो चुका है, इसलिए किसी को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं है। मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया कि संभाजीराजे के प्रति अनादर दिखाने का कोई इरादा नहीं था और उनकी यात्रा के दौरान उन्हें हुई असुविधा के लिए माफी का पत्र जारी किया। कोल्हे ने कहा कि मंदिर का प्रशासन 'देउल-ए-कवायत' अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार किया जाता है। उन्होंने कहा कि कोल्हापुर संस्थान, जिसके सदस्य संभाजीराजे हैं, उन्हें पारंपरिक रूप से देवी तुलजा भवानी के मंदिर में अभिषेक करने का पहला सम्मान प्राप्त है, जिसे महाराष्ट्र के कुलदेवता के रूप में जाना जाता है।
विज्ञापन


कोल्हे ने समझाया कि यदि किसी शाही परिवार का कोई व्यक्ति मंदिर जाता है, तो उस व्यक्ति द्वारा अभिषेक किया जाता है। अगर परिजन या शाही परिवार के सदस्य मौजूद नहीं होते हैं, तो उनके प्रतिनिधि अभिषेक अनुष्ठान करते हैं। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान जब मंदिर बंद थे, शाही परिवार के प्रतिनिधि अभिषेक करते थे। कोल्हे ने कहा कि संभाजीराजे को बताया गया था कि अगर वह अभिषेक पूजा के समय आए होते, तो विशेष अनुष्ठान उनके द्वारा ही किया जाता। कोल्हे ने कहा कि संभाजीराजे छत्रपति ने फिर चोपदार दरवाजे से दर्शन किए, जो देवी की मूर्ति से मुश्किल से पांच फीट की दूरी पर है। आमतौर पर सभी वीवीआईपी दर्शन उसी दरवाजे से होते हैं। उन्होंने कहा कि संभाजीराजे के वहां से चले जाने के बाद मराठा संगठनों के सदस्यों ने मंदिर ट्रस्ट की आलोचना करना शुरू कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed