हिमंता बिस्वा सरमा बोले- एनआरसी के आंकड़ों से हुई छेड़छाड़, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे
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असम के वित्त मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के आंकड़े पर हम पूरी तरह भरोसा नहीं कर पा रहे। ये आंकड़ा 19 लाख से ज्यादा होना चाहिए। हमें लगा था कि दोबारा वैरिफिकेशन होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
Assam Min HB Sarma on over 19 lakh people left out from #NRCassam: No. should've been a little more as we had evidence of Legacy Data manipulation. We thought re-verification will be ordered. But it didn't happen. I think the number is a bit conservative, it should have been more pic.twitter.com/JrusaasR5z
— ANI (@ANI) August 31, 2019विज्ञापन
उन्होंने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखना जारी रखेंगे। हमारी मांग है कि बांगलादेश की सीमा से लगे इलाकों में 20 फीसदी जबकि बाकी इलाकों में 10 फीसदी रि-वैरिफिकेशन हो। हमारे पास इसके पुख्ता सबूत हैं कि आंकड़ों से छेड़छाड़ हुई है।
Assam Minister HB Sarma on #NRCassam: We'll continue to pursue our case before Supreme Court that in bordering dists 20% re-verification should be ordered&in remaining dist 10% re-verification should be ordered because we've found manipulation of data,we've clear evidence with us pic.twitter.com/5JM7TuBqEY
— ANI (@ANI) August 31, 2019
इसके साथ ही सरमा ने कहा कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के अंतिम संस्करण में कई ऐसे लोगों के नाम शामिल नहीं हैं जो 1971 से पहले बांग्लादेश से भारत आए थे। सरमा ने ट्वीट किया, 'एनआरसी में कई ऐसे भारतीय नागरिकों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं जो 1971 से पहले शरणार्थियों के रूप में बांग्लादेश से आए थे क्योंकि प्राधिकारियों ने शरणार्थी प्रमाण पत्र स्वीकार करने इनकार कर दिया।'
#NRCAssam
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) August 31, 2019
Names of many Indian citizens who migrated from Bangladesh as refugees prior to 1971 have not been included in the NRC because authorities refused to accept refugee certificates. Many names got included because of manipulation of legacy data as alleged by many 1/2
उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकारों के पहले किए अनुरोध के अनुसार उच्चतम न्यायालय को सीमावर्ती जिलों में कम से कम 20 फीसदी और शेष असम में 10 फीसदी को फिर से सत्यापन की अनुमति देनी चाहिए।
दोनों सरकारों ने खासकर बांग्लादेश की सीमा से लगे जिलों में एनआरसी में गलत तरीके से शामिल नाम और बाहर किए गए नाम का पता लगाने के लिए नमूनों का फिर से सत्यापन को लेकर न्यायालय से दो बार अपील की थी।
न्यायालय ने इस माह की शुरुआत में कड़े शब्दों में कहा था कि निश्चित पैमानों के आधार पर एनआरसी की पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू नहीं की जा सकती।