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Climate Change Effect: देश में लू से बढ़ीं मौतें, वैज्ञानिकों ने कहा, जलवायु परिवर्तन के असर से बढ़ेंगी चरम मौसमी घटनाएं
Tue, 17 May 2022 05:00 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला रिसर्च डेस्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला रिसर्च डेस्क, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 17 May 2022 05:00 AM IST
सार
देश में तापमान वृद्धि दक्षिण एशिया में ग्लोबल वॉर्मिंग का नतीजा है। मौसम का बार-बार चरम पर पहुंचना जलवायु परिवर्तन का एक बड़ा संकेत है। इस साल मार्च भारत में 122 साल (1901-2022) में सबसे गर्म मार्च का महीना रहा। इस दौरान देशभर में तापमान ऊपर था और लू चलने लगी थी। अप्रैल में भी तापमान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी जारी रही।
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लू का कहर (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण जलवायु परिवर्तन का असर अब चरम मौसमी घटनाओं के रूप में दिखने लगा है। भारत में एकतरफ उत्तर भारत में लू कहर ढा रही है तो दक्षिण और पूर्वोत्तर को भारी बारिश और बाढ़ के प्रकोप का शिकार होना पड़ रहा है। वैज्ञानिकों ने चेताया है कि बदलती जलवायु से हालात बद से बदतर ही होने जा रहे हैं। अब देश में लू से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ी है।
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अब ज्यादा लंबे समय तक लू का सामना करना पड़ेगा तो ठंड के दिन कम होते जाएंगे। पर्यावरणविद और जलवायु विज्ञानी शकील अहमद रोमशू के मुताबिक, देश में तापमान वृद्धि दक्षिण एशिया में ग्लोबल वॉर्मिंग का नतीजा है। मौसम का बार-बार चरम पर पहुंचना जलवायु परिवर्तन का एक बड़ा संकेत है। इस साल मार्च भारत में 122 साल (1901-2022) में सबसे गर्म मार्च का महीना रहा। इस दौरान देशभर में तापमान ऊपर था और लू चलने लगी थी। अप्रैल में भी तापमान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी जारी रही। जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (आईपीसीसी) की बीते साल की रिपोर्ट भी चेता चुकी है कि बढ़ते तापमान के कारण हमें अधिक लू और लंबे गर्म दिनों का सामना करना पड़ेगा तो ठंड के दिन घट जाएंगे।
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शहरों में इन उपायों की सख्त दरकार
वैज्ञानिकों का कहना है, लू की अवधि इसी तरह बढ़ती रही तो इसका हमारे क्षेत्र में भोजन-पानी और ऊर्जा सुरक्षा पर खतरनाक असर पड़ेगा। कम हरियाली और कंक्रीट निर्माण के कारण जलवायु परिवर्तन शहरों में ज्यादा मुखर हुआ है। इसके लिए वहां कार्य घंटों, सार्वजनिक ढांचा, स्कूल, अस्पताल, कार्यस्थल, घर, परिवहन और खेती प्रबंधन के लिए नीतिगत स्तर पर दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने की सख्त दरकार है। सरकारों को शहरी निर्माण में हरियाली और जल निकाय बढ़ाने पर जोर देना होगा।
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दिल्ली 1951 के बाद सबसे गर्म
दो दिन पहले ही राजधानी दिल्ली में पारा 49 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया, जो मई 1966 के बाद इस स्तर पर पहुंचा है। दिल्ली में अप्रैल वर्ष 1951 के बाद दूसरी बार सबसे गर्म माह रहा और इस दौरान अधिकतम तापमान औसतन 40.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे पहाड़ी इलाकों में पारा सामान्य से ऊपर रहा।
एक ओर आग, दूसरी ओर बहीं सड़कें
उत्तरी राज्यों में जहां सूर्य से आग बरस रही है तो केरल व लक्ष्यद्वीप द्वीपसमूह में रविवार को भारी बरसात हुई। वहीं, पूर्वोत्तर में असम का दीमा हसाओ जिला बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहा है, जिसके चलते वहां रेल व सड़क संपर्क ही टूट गया है।
अर्थव्यवस्था पर असर
लू सेहत के अलावा काम की गुणवत्ता और अर्थव्यवस्था पर भी असर डालती है, जिसे बकायदा दस्तावेजों में दर्ज किया गया है। एक अनुमान की मानें तो तेज होती लू के कारण इस सदी के अंत तक भारत में लोगों की कार्य प्रदर्शन 30 से 40 फीसदी तक गिर जाएगा। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, लू के चलते देशभर में 1992 से 2015 के दौरान 24 हजार से ज्यादा मौतें हुई हैं। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि बीचे चार दशकों में लू से मृत्यु दर प्रति दस लाख बढ़कर 62.2 फीसदी हो गई है।