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मनोज वर्मा: जिस IPS अफसर को CM ममता ने कभी बताया था 'माकपा का एजेंट', अब उन्हीं को सौंपी कोलकाता पुलिस की कमान

Tue, 17 Sep 2024 11:14 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 17 Sep 2024 11:14 PM IST
सार

Manoj Verma: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 2024 में उसी आईपीएस अधिकारी को कोलकाता पुलिस आयुक्त नियुक्त किया है, जिनकी उन्होंने कभी कड़ी आलोचना की थी। कोलकाता पुलिस हाल ही में आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले को लेकर विवादों में है। 

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Manoj Verma: IPS officer whom Mamata Banerjee once called agent of CPIM, now Kolkata Police commissioner
मनोज वर्मा - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

चौदह साल पहले पश्चिम बंगाल में सियासी तूफान उफान पर था, तब ममता बनर्जी ने रेल मंत्री थीं। उस समय उन्होंने पश्चिम मेदिनीपुर के पुलिस प्रमुख मनोज वर्मा को 'माकपा का एजेंट' बताकर उनकी आलोचना की थी। उनका आरोप था कि वर्मा ने विपक्ष की गतिविधियों पर सख्ती बरतकर माकपा सरकार की मदद की थी। 

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अब तीन बार की मुख्यमंत्री बनर्जी 2024 में उसी आईपीएस अधिकारी को कोलकाता पुलिस आयुक्त नियुक्त किया है। कोलकाता पुलिस हाल ही में आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले को लेकर विवादों में है। 
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मनोज वर्मा ने पश्चिम बंगाल के सबसे कठिन वक्त में अपनी छाप छोड़ी, जब माओवादियों ने जंगलमहल क्षेत्र में पकड़ मजबूत कर ली थी। 2008 में जब उन्हें एसपी नियुक्त किया गया, तब माओवादियों ने इस क्षेत्र में अपनी सत्ता बना ली थी। वर्मा ने स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर सख्ती से काम किया और माओवादी गढ़ को खत्म करने में सफल रहे। 
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2010 में माओवादियों की ताकत कमजोर हो गई। इस दौरान वर्मा को लेकर बहुत विवाद हुए। साथ ही तारीफ भी हुई। उन्होंने सुरक्षा बलों द्वारा अपनाए गए कुछ विवादित तरीकों का समर्थन किया था। इनमें एक तरीके में माओवादियों के शवों को बांस की बल्लियों पर ले जाया गया था। इस कदम की काफी आलोचना हुई थी। लेकिन वर्मा ने इसे सही ठहराने की कोशिश की। 

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने वार्मा की आलोचना की थी और उन्हें माकपा एजेंट कहा था। बनर्जी ने अक्तूबर 2010 में वादा किया था कि वह सत्ता में आने के बाद वर्मा से माफी मंगवाएंगी। 2011 में सत्ता में आने के बाद टीएमसी सरकार ने वर्मा को अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया था। लेकिन बाद में उनकी अहमियत को समझते हुए उन्हें वापस बुला लिया। 



वर्मा ने माओवादी आंदोलन को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 2017 में दार्जिलिंग में एक उग्र माओवादी आंदोलन के दौरान वर्मा को क्षेत्रीय आईजी नियुक्त किया गया। उनकी सख्त कार्रवाई के कारण कई जीजेएम नेता भागने को मजबूर हुए। जिनमें बिमल गुरंग भी शामिल थे। इस सफलता के लिए उन्हें 2017 में पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। 


हाल ही में, वर्मा को बैरकपुर पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया, जहां राजनीतिक हिंसा और गैंगवार चरम पर थे। उन्होंने सख्त कार्रवाई की, लेकिन भाजपा के नेताओं ने उनपर टीएमसी के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया। अब वर्मा  कोलकाता पुलिस की कमान संभाल रहे हैं। जहां पुलिस को आरजी कर अस्पताल के दुष्कर्म और हत्या मामले के कई आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। कोलकाता पुलिस के अधिकारी अभिजीत मंडल को सीबीआई ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तार किया है। 

मनोज वर्मा की अतीत की सफलताएं उनकी इस नई जिम्मेदारी में कितनी कारगर साबित होंगी, यह भविष्य में ही पता चलेगा। लेकिन जिन ममता बनर्जी को कभी उनका सबसे कड़ा आलोचक माना जाता था, अभ उन्हें इस चुनौतीपूर्ण समय में कोलकाता पुलिस का नेतृत्व सौंपा है। वर्मा ने माओादी उग्रवाद, दार्जिलिंग की अशांति और बैरकपुर की राजनीतिक हिंसा को संभालने में अपनी क्षमताओं को बार-बार साबित किया है।  

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