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Delhi Politics: क्या अब नहीं होगा केजरीवाल कैबिनेट में कोई डिप्टी सीएम? पर हो सकती है महिला मंत्री की एंट्री!
सार
दिल्ली सरकार में हुए बड़े सियासी उठापटक के बाद यह चर्चा भी जोरों पर है कि क्या अरविंद केजरीवाल अपनी कैबिनेट में उपमुख्यमंत्री का पद बरकरार रखेंगे या मनीष सिसोदिया के इस्तीफे के साथ इस पद को खत्म कर दिया जाएगा।
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अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
दिल्ली सरकार के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के इस्तीफे के बाद उनकी जगह किसकी एंट्री होगी, इसका सवाल अभी बना हुआ है। एक सवाल यह भी है कि क्या दिल्ली सरकार में अरविंद केजरीवाल की कैबिनेट में अब महिला मंत्री की भी एंट्री होगी? सियासी जानकारों का मानना है कि इस सरकार में अरविंद केजरीवाल की कैबिनेट में किसी भी महिला को जगह नहीं मिली है। इसलिए इसके कयास सबसे ज्यादा लगाए जा रहे हैं। वही इसके अलावा दूसरा सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या अब दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के इस्तीफे के बाद सरकार में कोई उपमुख्यमंत्री होगा भी या नहीं होगा?
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दिल्ली सरकार के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के इस्तीफे के बाद सबसे ज्यादा चर्चा अब उन दो नए नामों को लेकर हो रही है जिसकी एंट्री अरविंद केजरीवाल की कैबिनेट में होने वाली है। सात मंत्रियों वाली कैबिनेट में एक मुख्यमंत्री के अलावा छह मंत्री दिल्ली सरकार में नियमतः बनाए जा सकते हैं। चुके अरविंद केजरीवाल की कैबिनेट के दो मंत्री जिसमें सत्येंद्र जैन बीते कई महीनों से तिहाड़ जेल में बंद है, इसके अलावा दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को भी सीबीआई ने हिरासत में ले लिया है। ऐसे में एक तिहाई मंत्रियों की अनुपस्थिति में दिल्ली सरकार की कैबिनेट न सिर्फ अधूरी है बल्कि सरकारी कामकाज पर मंत्रियों की अनुपस्थिति में बड़ा असर पड़ने वाला है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है यही वजह है कि दोनों मंत्रियों के इस्तीफे हुए और उनको केजरीवाल ने स्वीकार भी कर लिया। चर्चा यही हो रही है कि आखिर इन दोनों मंत्रियों को रिप्लेस करने के लिए अब कौन विधायक मंत्री बनेगा।
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सियासी जानकारों का मानना है कि अरविंद केजरीवाल की सरकार में अभी तक कोई भी महिला मंत्री नहीं है। इसलिए अरविंद केजरीवाल इस बार किसी महिला विधायक को भी अपनी मंत्रिमंडल में जगह दे सकते हैं। महिलाओं के तौर पर अरविंद केजरीवाल के मंत्रिमंडल में शामिल होने वाली दो नेताओं की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है। इसमें एक नाम आतिशी का है जबकि दूसरा नाम राखी बिड़ला का भी चल रहा है। सियासी जानकार बताते हैं कि अरविंद केजरीवाल के साथ कैबिनेट में ना होने के बाद भी उनके आंदोलनों, उनकी नीतियों और सरकार की योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने में यह दोनों विधायक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर अरविंद केजरीवाल इस बार कुछ ऐसा ही कर सकते हैं जो कि विमेन एंपावरमेंट के साथ साथ युवा नेतृत्व के तौर पर भी अपनी कैबिनेट में इनको शामिल कर एक संदेश दे। यही वजह है कि सियासी गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बार अरविंद केजरीवाल दोनों मंत्रियों की वजह से रिक्त हुई जगह पर अपनी कैबिनेट में महिलाओं को जगह दे सकते हैं।
वहीं, दूसरी ओर दिल्ली सरकार में मंत्री पद की रेस में आतिशी और राखी बिड़ला के अलावा सौरभ भारद्वाज, संजीव झा, दुर्गेश पाठक और दिलीप पांडे का नाम भी आगे हैं। आम आदमी पार्टी में इस वक्त कैबिनेट मंत्री ना होने के बाद भी बड़े चेहरों के तौर पर सौरभ भारद्वाज और संजीव झा समेत दिलीप पांडे बड़े नाम माने जा रहे हैं। राजनैतिक जानकार संजीव चटर्जी कहते हैं कि दिल्ली सरकार में पहले सौरभ भारद्वाज मंत्री भी रह चुके हैं। इनके पास बतौर मंत्री काम करने का अनुभव भी है। सौरभ भारद्वाज तो इस वक्त दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष भी हैं। चटर्जी कहते हैं की शिक्षा के मामले में आम आदमी पार्टी के विधायक आतिशी ने मनीष सिसोदिया के साथ मिलकर ना सिर्फ काम किया बल्कि दिल्ली सरकार में शिक्षा के के लिए महत्वपूर्ण योगदान भी दिया है। इसके अलावा दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष राखी बिरला भी अरविंद केजरीवाल कैबिनेट में पहले मंत्री रही हैं और लगातार आम आदमी पार्टी की पसंद बनी हुई हैं। जबकि सियासत के लिहाज से संजीव झा और दिलीप पांडे यूपी और बिहार के बड़े तबके को न सिर्फ रिप्रेजेंट करते हैं आम आदमी पार्टी में उनके बड़े नेता के तौर पर पहचाने भी जाते हैं।
दिल्ली सरकार में हुए बड़े सियासी उठापटक के बाद यह चर्चा भी जोरों पर है कि क्या अरविंद केजरीवाल अपनी कैबिनेट में उपमुख्यमंत्री का पद बरकरार रखेंगे या मनीष सिसोदिया के इस्तीफे के साथ इस पद की समाप्ति कर दी जाएगी। सियासी जानकारों का कहना है कि जिस तरीके से अरविंद केजरीवाल अपने पार्टी के विस्तार के लिए देश के अलग-अलग राज्यों में लगातार सक्रिय रहते हैं उस लिहाज से उपमुख्यमंत्री जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी तो कैबिनेट के किसी सदस्य को मिल सकती है। लेकिन इतनी जल्दी यह जिम्मेदारी किसी कैबिनेट मंत्री को मिलेगी यह मुश्किल लग रहा है। राजनीतिक विश्लेषक संजीव कहते हैं कि मनीष सिसोदिया के मुसीबत में फंसने के साथ अरविंद केजरीवाल तुरंत किसी को उपमुख्यमंत्री बनाएं ऐसा लग भी नहीं रहा है। कयास यह भी लगाए जा रहे हैं संभव है कि मनीष सिसोदिया के बाद अब कोई भी मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के क्या मिनट में ना बने। राजनीतिक विश्लेषक अरविंद कुमार कहते हैं कि दरसल छह मंत्रियों में से दो मंत्रियों के ना होने से विकास कार्य बाधित हो रहे थे। इस वजह से दोनों मंत्रियों के इस्तीफे स्वीकार किए गए। ताकि पूर्ण कैबिनेट के साथ दिल्ली सरकार अपने विकास कार्यों को आगे बढ़ा सके।।वह कहते हैं कि ऐसे में मंत्रिमंडल में दो विधायकों को शामिल करके संख्या तो पूरी हो सकती है। लेकिन उपमुख्यमंत्री जैसा पद अब किसी कैबिनेट मंत्री को मिलेगा इसकी संभावना फिलहाल सियासत की दूरदर्शिता के लिहाज से तो नहीं दिख रही है।