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Manipur: मणिपुर में सामूहिक दुष्कर्म की शिकार कुकी समुदाय की युवती की मौत, 32 महीनों तक झेली मानसिक प्रताड़ना

Sun, 18 Jan 2026 03:54 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल Published by: अमन तिवारी Updated Sun, 18 Jan 2026 03:54 PM IST
सार

मणिपुर हिंसा में सामूहिक दुष्कर्म और बर्बरता की शिकार कुकी युवती का गुवाहाटी में निधन हो गया। तीन साल तक इलाज चलने के बाद भी वह बच नहीं सकी। पुलिस अब तक किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है।

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Manipur woman from Kuki community victim of assault has died after enduring mental torture for 32 months
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मणिपुर में मई 2023 की जातीय हिंसा के दौरान दरिंदगी का शिकार हुई कुकी युवती की मौत हो गई है। करीब तीन साल तक गंभीर चोटों और सदमे से जूझने के बाद दस जनवरी 2026 को गुवाहाटी के एक निजी अस्पताल में उसने आखिरी सांस ली। मौत के समय उसकी उम्र करीब 20 साल थी।
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क्या है पूरा मामला?
  • यह घटना 15 मई 2023 की बताई जा रही है।
  • उस समय पीड़िता की उम्र सिर्फ 18 साल थी।
  • पीड़िता इम्फाल के न्यू चेकॉन इलाके में एटीएम से पैसे निकालने गई थी।
  • आरोप है कि वहां उसे रोक लिया गया।
  • इसके बाद उसे हथियारबंद लोगों के हवाले कर दिया गया।
  • हमलावरों ने उसकी आंखों पर पट्टी बांध दी।
  • उसे इम्फाल के अलग-अलग इलाकों में ले जाया गया।
  • इस दौरान उसके साथ बेरहमी से यौन उत्पीड़न किया गया।
  • आरोप है कि उसके साथ मारपीट भी की गई।
  • हमलावर उसे मरा हुआ समझकर छोड़कर फरार हो गए।
  • एक ऑटो चालक ने उसे देखा और उसकी जान बचाई।
  • ऑटो चालक ने पीड़िता को अस्पताल पहुंचाया।

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इलाज के दौरान पीड़िता की मौत
मणिपुर में प्रारंभिक उपचार के बाद, उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे गुवाहाटी रेफर किया गया था। मेडिकल सूत्रों के मुताबिक, हमले में उसके गर्भाशय को बहुत नुकसान पहुंचा था। उसे बार-बार संक्रमण हो रहा था और वह गहरे मानसिक सदमे में थी। इसी वजह से उसकी सेहत गिरती गई, और फिर उसकी मौत हो गई।
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तीन साल बाद भी गिरफ्तारी नहीं
पुलिस ने दुष्कर्म, हत्या की कोशिश और अपहरण जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया था। लेकिन समुदाय के नेताओं का आरोप है कि तीन साल बीतने के बाद भी पुलिस किसी भी आरोपी को पकड़ नहीं पाई है। कुकी महिला संघ और जनजातीय एकता समिति (सीओटीयू) ने इसे प्रशासन की बड़ी विफलता बताया है।

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कैंडल मार्च और आक्रोश
पीड़िता की मौत के बाद कांगपोकपी और चुराचंदपुर में लोगों ने मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि दी। सीओटीयू के प्रवक्ता ने कहा, "पीड़िता ने वर्षों तक हिंसा सहन की, लेकिन उसे न्याय कभी नहीं मिला। उसने अपने अंतिम वर्ष अस्पताल के वार्डों और अदालती फाइलों के बीच, दर्द और उम्मीद के बीच बिताए, लेकिन उसे केवल देरी का सामना करना पड़ा।"

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