Manipur Violence: सुरक्षा एजेंसियों ने की बैठक, कुकी विधायकों ने गृहमंत्री से की मुलाकात
बैठक में सेना, असम राइफल्स, मणिपुर पुलिस, सीआरपीएफ, बीएसएफ और आरएएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। असम राइफल्स ने बैठक का संचालन किया और भविष्य की आकस्मिकताओं की स्थिति में किए जाने वाले उपायों पर विचार-विमर्श किया।
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मणिपुर में धीरे-धीरे शांति बहाल होने लगी है। पिछले करीब 72 घंटों से कहीं भी किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं है। शांति बहाली की कोशिश के बीच, सुरक्षा एजेंसियों ने हालात का जायजा लेने के लिए एक अहम बैठक की। इसमें सुरक्षाबलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस बची, अलग राज्य की मांग करने वाले मणिपुर के दस कुकी विधायकों ने सोमवार को गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। दूसरी और, मंगलवार को सरकार ने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ और संरक्षित जंगलों में बेदखली करते समय कभी भी किसी विशेष समुदाय को निशाना नहीं बनाया गया।
इस बीच जानकारी मिली है कि मणिपुर प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने दिल्ली में राहुल गाधी से मुलाकात की और हालात की जानकारी दी। सेना के प्रवक्ता के मुताबिक इम्फाल शहर में तैनात सभी केंद्रीय और राज्य बलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रथम मणिपुर राइफल्स में एक सुरक्षा और समन्वय बैठक की और अब तक किए गए कार्यों की समीक्षा की गई और आगे की रणनीति बनाई गई। बैठक में सेना, असम राइफल्स, मणिपुर पुलिस, सीआरपीएफ, बीएसएफ और आरएएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। असम राइफल्स ने बैठक का संचालन किया और भविष्य की आकस्मिकताओं की स्थिति में किए जाने वाले उपायों पर विचार-विमर्श किया। शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए सभी सुरक्षा बलों के प्रयासों में तालमेल बिठाने के कदमों पर भी चर्चा की गई।
किसी विशेष समुदाय को निशाना नहीं बनाया: सरकार
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मणिपुर सरकार ने मंगलवार को कहा है कि उसने कभी भी किसी भी समुदाय विशेष के खिलाफ कोई भेदभाव पूर्ण कार्रवाई नहीं की है। सरकार ने कहा है कि ड्रग्स से संबंधित मामलों में गिरफ्तारी हो या फिर आरक्षित और संरक्षित जंगलों से बेदखली पर कार्रवाी करते हुए, सरकार ने कभी भी किसी समुदाय विशेष समुदाय को निशाना नहीं बनाया। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एसपी, एनएबी द्वारा गृह आयुक्त, मणिपुर को सौंपी गई एक रिपोर्ट में 2017 से अब तक की गई ड्रग्स से संबंधित गिरफ्तारियों का विवरण दिया गया है। साथ ही उन क्षेत्रों की सूची भी दी गई है जहां अफीम की खेती को नष्ट कर दिया गया।
गृहमंत्री से मिले 10 कुकी विधायक
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मणिपुर हिंसा के दो हफ्ते बाद राज्य के दस कुकी विधायकों ने सोमवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और उन्हें राज्य में सुरक्षा से अवगत कराया। इन विधायकों ने पूर्व में एक संयुक्त बयान जारी करके अपने लोगों की भावनाओं को व्यक्त किया और मणिपुर से अलग होने की बात कही थी। अमित शाह के साथ बैठक के दौरान, कुकी विधायकों ने अपनी सुरक्षा चिंताओं को व्यक्त किया। कुकी-चिन-मिजो-जोमी-हमार अल्पसंख्यक समुदाय के लिए एक अलग प्रशासन की मांग की।
कुकी विधायकों ने अमित शाह को ज्ञापने भी सौपा, जिसमें कहा गया है कि बहुसंख्यक मैतेई समुदाय द्वारा जातीय कुकी-चिन-मिजो-ज़ोमी-हमार अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ किए गए संस्थागत जातीय हिंसा और अत्याचारों ने सभी को हैरान कर दिया। उन्होंने कहा कि 'मणिपुर अब विभाजित हो गया है, जो जमीनी हकीकत है। इंफाल घाटी में कोई आदिवासी नहीं बचा है। पहाड़ियों में कोई मैती नहीं बचा है। मणिपुर सरकार और उसकी पुलिस मशीनरी को सांप्रदायिक बना दिया गया और कुकी आदिवासियों के खिलाफ तबाही में इस्तेमाल किया गया। विधायकों ने यह भी आरोप लगाया कि हिंसा स्वतःस्फूर्त नहीं थी और इम्फाल शहर में कुकी कॉलोनियों और घरों को चिन्हित किया गया और सटीक हमला किया गया।
ऐसे बोर्ड लगने से लोगों में आक्रोश
मणिपुर में दस कुकी विधायकों द्वारा अलग राज्य की मांग करने के बाद कुछ जगह सेप्रेट एडमिनिस्ट्रेशन (कांकपोकपी जिला) के बोर्ड दिखाई देने लगे हैं। इससे एक बार फिर से मणिपुर में हालात बिगड़ सकते हैं। कुछ लोगों ने इसे देखकर खुशी जाहिर कर रहे हैं तो कुछ लोग कह रहे हैं कि इससे भाई-चारा बिगड़ेगा। पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन किसी से संपर्क नहीं हो पाया। यहां क्षेत्र चीन-कुली बाहुल्य है।